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छात्रवृत्ति घोटाले से बैंक अनजान!
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Wed, 29 Jun 2016 12:24 PM IST
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छात्रवृत्ति घोटाले
- फोटो : demo
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अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में हुए छात्रवृत्ति घोटाले की आंच बैंकों तक पहुंच रही है। प्रशासनिक अधिकारी इस घोटाले में बैंकों की संलिप्तता मान रहे हैं। वहीं बैैंक इस प्रकार की किसी भी घटना से अनभिज्ञता जता रहे हैं। इतना ही नहीं इस मामले में जांच कराना तक जरूरी नहीं समझ रहे हैं।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में छात्रों के भविष्य को नई दिशा देने के लिए आई छात्रवृत्ति को घोटाला कर विभाग के कर्मचारी डकार गए। इस मामले का खुलासा होने पर हड़कंप मच गया। सीडीओ आंद्रा वामसी ने इस मामले खुलासा करते हुए बताया था कि एसबीआई मुख्य कार्यालय के साथ ही पीलीकोठी, करुला और भोजपुर शाखा की मिलीभगत सामने आ रही है।
इस मामले पर एसबीआई मुख्य ब्रांच के प्रबंधक एसपी गौतम ने कहा कि पिछले कई दिनों से बैंक के कार्य से बाहर चल रहा हूं। इस मामले की मुझे कोई जानकारी नहीं हैं। वापस आकर देखेंगे कि कहां गड़बड़ी हुई है।
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वहीं भोजपुर शाखा के प्रबंधक सुनील कैरे ने बताया कि उनकी नियुक्ति अभी हाल ही में पहले ही हुई। सभी रिकार्ड एक सप्ताह पहले ही मुख्य ब्रांच भेज दिए गए हैं। करुला शाखा के प्रबंधक पीएस तोमर और पीलीकोठी शाखा के प्रबंधक जय सिंह भी इस प्रकार की किसी घोटाले शाखा के किसी कर्मचारी के लिप्त होने के आरोप पर अनभिज्ञता जता रहे हैं।
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अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में छात्रों के भविष्य को नई दिशा देने के लिए आई छात्रवृत्ति को घोटाला कर विभाग के कर्मचारी डकार गए। इस मामले का खुलासा होने पर हड़कंप मच गया। सीडीओ आंद्रा वामसी ने इस मामले खुलासा करते हुए बताया था कि एसबीआई मुख्य कार्यालय के साथ ही पीलीकोठी, करुला और भोजपुर शाखा की मिलीभगत सामने आ रही है।
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इस मामले पर एसबीआई मुख्य ब्रांच के प्रबंधक एसपी गौतम ने कहा कि पिछले कई दिनों से बैंक के कार्य से बाहर चल रहा हूं। इस मामले की मुझे कोई जानकारी नहीं हैं। वापस आकर देखेंगे कि कहां गड़बड़ी हुई है।
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वहीं भोजपुर शाखा के प्रबंधक सुनील कैरे ने बताया कि उनकी नियुक्ति अभी हाल ही में पहले ही हुई। सभी रिकार्ड एक सप्ताह पहले ही मुख्य ब्रांच भेज दिए गए हैं। करुला शाखा के प्रबंधक पीएस तोमर और पीलीकोठी शाखा के प्रबंधक जय सिंह भी इस प्रकार की किसी घोटाले शाखा के किसी कर्मचारी के लिप्त होने के आरोप पर अनभिज्ञता जता रहे हैं।