फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   Anil had given training at home to make his brother-in-law a soldier

फर्जीवाड़ा : साले को अपनी जगह सिपाही बनाने के लिए अनिल ने घर पर ही दी थी ट्रेनिंग

Sat, 19 Jun 2021 02:37 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 19 Jun 2021 02:37 AM IST
सार

  • हथियार चलाने, अफसरों को सेल्यूट करने का सिखाया था तरीका
  • सिपाही अनिल को बरेली से नवंबर 2016 में भेजा गया था मुरादाबाद, यहीं किया फर्जीवाड़ा

विज्ञापन
Anil had given training at home to make his brother-in-law a soldier
फर्जी पुलिसवाला सन्नी - फोटो : amar ujala

विस्तार

पुलिस विभाग में बड़ा खेल करने वाले जीजा-साले ने पुलिस अफसरों और सह पुलिस कर्मियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए लंबी तैयारियां की थीं। पुलिस के मुताबिक गिरफ्त में आए सिपाही अनिल कुमार ने बताया कि अपने साले को सिपाही की भूमिका में सफल साबित करने के लिए उसने घर ही प्रशिक्षित किया था। यह बात अलग है कि वह खुद सिपाही की ट्रेनिंग में दो बार फेल हो गया था। तीसरी बार में ट्रेनिंग में सफल हो सका था। पूछताछ के बाद पुलिस ने बताया कि अनिल कुमार 2011 बैच का सिपाही है।

विज्ञापन


अनिल ने बताया कि 2012 में बरेली में उसकी ट्रेनिंग शुरू हुई थी, लेकिन वह प्रशिक्षण पास नहीं कर पाया था। इसके बाद अनिल को दोबारा ट्रेनिंग का मौका गोरखपुर में मिला लेकिन वह फिर फेल हो गया। गोरखपुर में ही तीसरी ट्रेनिंग में वह कामयाब हो सका। उसके बाद अनिल को बरेली में पहली पोस्टिंग मिली।
विज्ञापन


अनिल को बरेली से नवंबर 2016 में मुरादाबाद स्थानांतरित कर दिया गया था। यहां पुलिस लाइन में पहली तैनाती हुई। पुलिस लाइन से बिलारी थाने की पीआरवी (पब्लिक रेसपोंस व्हेकिल) की पुलिस टीम में ड्यूटी पर लगाया गया। दो माह नौकरी करने के बाद जनवरी 2017 में उसने साले सुनील कुमार को अपनी जगह नौकरी करने के लिए घर पर ही प्रशिक्षित कर दिया था। इस ट्रेनिंग में अफसरों को सेल्यूट करने का तरीका, हथियार पकड़ने और चलाने की विधि और कानून संबंधी जानकारियां सिखाई थीं। जिस वक्त अनिल को बिलारी से ठाकुरद्वारा भेजा गया तो उसने अपने स्थान पर पहले से ट्रेंड साले सुनील की आमद दर्ज करवा दी और थाना स्टाफ और अफसरों की आंखों में धूल झोंक कर पूरे पांच साल अपने स्थान पर नौकरी करवाई।
विज्ञापन
विज्ञापन


माना जा रहा है कि ट्रांसफर ऑर्डर पर फोटो न होने से अनिल के स्थान पर सुनील की आमद का खेल पकड़ में नहीं आया होगा। हालांकि महकमे के लोग भी दबी जुबान चर्चा कर रहे हैं कि ज्वाइनिंग और आमद की औपचारिकता पूरी कराने वालों को उस वक्त किसी प्रलोभन से मिलीभगत में शामिल किया गया होगा।

बेटी की मौत से डिप्रेशन में था..साले न कहा-मैं संभालता हूं नौकरी
सिपाही अनिल कुमार ने पूछताछ में बताया कि पुलिस विभाग में उसकी भर्ती होने के बाद पत्नी ने एक बेटी को जन्म दिया था। बेटी की कुछ दिन बाद ही मृत्यु हो गई थी। बेटी की मौत के बाद वह डिप्रेशन में आकर बीमार रहने लगा था। उसे इंफेक्शन भी हो गया था। नौकरी करने का मन नहीं करता था। उसने नौकरी छोड़ने का इरादा बना लिया था। तभी साले ने कहा कि मैं आपकी जगह ड्यूटी कर लूंगा। इसके बाद ही उसने साले को ट्रेंड करके ड्यूटी पर भेजने का निर्णय लिया था। 

आरोपी बीएड, टीईटी उत्तीर्ण, साला इंटर पास
पुलिस पूछताछ में अनिल ने साले को अपने स्थान पर सिपाही की नौकरी कराने के पीछे खुद कहीं शिक्षक के रूप में काम करने की जानकारी दी है। हालांकि एक बयान में वह डिप्रेशन के कारण खुद को पुलिस की नौकरी से अलग करने का इरादा बनाया था। इसी लिए अभी पुलिस अधिकारी अनिल के शिक्षक के रूप में काम करने की बात को पूरा सच नहीं मान रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच करके स्थिति स्पष्ट की जाएगी। इस बीच अनिल ने खुद को बीएड के साथ टीईटी उत्तीर्ण और साले सुनील कुमार को इंटर पास बताया है। 

उठा सवाल, आंखों में धूल झोंकते रहे जीजा-साले या जिम्मेदार बंद करे रहे आंखें

दूसरे विभागों का फर्जीवाड़ा पकड़ने वाले, इंटेलीजेंस, विजिलेंस जैसी टीमों से परदों के पीछे के रहस्य उजागर करने वाला पुलिस महकमा खुद के घर में चल रहे फर्जी नौकरी के खेल का राजफाश क्यों नहीं कर सका-यह सवाल इस वक्त हर आम और खास की जुबान पर और जेहन में है। सवाल उठाने वाले कटाक्ष भी कर रहे हैं कि बंटी-बबली की तरह जीजा-साले (अनिल-सुनील) की जोड़ी महकमे की आंखों में धूल झोंकती रही या जिम्मेदार आंखें मूंदे रहे।

ठाकुरद्वारा थाने में पांच साल फर्जी सिपाही के नौकरी करने का राज खुलने के बाद से हो  रही किरकिरी बचाने के लिए पुलिस भले कह रही है कि स्थानांतरण आदेश पर फोटो नहीं होता। इसका लाभ लेकर अनिल ने बिलारी से तबादले के वक्त अपना स्थानांतरण आदेश साले सुनील को थमाकर ठाकुरद्वारा में आमद दर्ज करवा थी। लेकिन महकमे के ही जानकार बता रहे  हैं कि आमद के वक्त हस्ताक्षर भी होते हैं। वही हस्ताक्षर, जो पुलिस रिकॉर्ड में किसी कर्मचारी की नौकरी शुरू होने के वक्त कराए जाते हैं और कदम-कदम पर इस्तेमाल होते हैं।

इसके अलावा इसके अलावा सर्विस बुक और सीआर (कैरेक्टर रोल) बुक जैसे अहम दस्तावेजों पर हस्ताक्षर के साथ फोटो का भी प्रयोग होता है। वेतन की शीट तैयार करके बैंक या कोषागार भेजी जाती है। समय-समय पर सीओ से लेकर जिले के पुलिस कप्तान तक के अफसर थानों के मुआयने भी करते हैं। चाल-ढाल और बातचीत के लहजे से अपराधी और बेकसूर को पकड़ लेने वाली अफसरों
की निगाहें इस मामले में कैसे चूक गईं।

पांच साल बाद फर्जीवाड़े का खुलासा एसएसपी दफ्तर पहुंचे शिकायती पत्र से होना यह दर्शा रहा है कि कहीं न कहीं जीजा-साले के खेल में पुलिस विभाग के कुछ और लोगों की भी मिलीभगत
है। देखना होगा कि फर्जी सिपाही की पांच साल ड्यूटी करके फरार हुए सुनील तथा इस खेल में शामिल अन्य वर्दीधारियों तक पुलिस कब तक पहुंचती है।

शिकायत मिलने पर जांच कराई गई थी। जांच में आरोप सही पाए गए हैं। सिपाही अनिल कुमार और उसके साले सुनील के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। अनिल को गिरफ्तार कर लिया गया
है। सुनील की तलाश की जा रही है। 
- पवन कमार, एसएसपी मुरादाबाद

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed