भविष्य ज्योति सम्मान समारोह में अतिथियों ने मेधावियों को दिया संदेश, सम्मान पाकर खिले चेहरे
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श्रीकृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड साइंस (सिम्स) चंदौसी में शुक्रवार की सुबह कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सुबह दस बजे से मेधावियों का आना शुरू हो गया था। अपने अभिभावकों के साथ पहुंचकर उन्होंने पंजीकरण कराया। शुभारंभ मुख्य अतिथि जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, जिला विद्यालय निरीक्षक, सिम्स के चेयरमैन और अभिनव अग्रवाल ने दीप जलाकर किया। इसके बाद मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित करने का सिलसिला शुरू हुआ।
छात्र-छात्राओं से अतिथियों ने बातचीत कर उनका हौसला बढ़ाया। सिम्स चेयरमैन श्रीराम अग्रवाल ने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि प्रत्येक परिस्थिति में उच्च शिक्षित होना है, जीवन की दिशा और लक्ष्य तय करना है। मेधावियों को जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह, पुलिस अधीक्षक यमुना प्रसाद, डीआईओएस मनोज कुमार आर्य, एसडीएम महेश प्रसाद दीक्षित, सिम्स के चेयरमैन श्रीराम अग्रवाल ने प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न प्रदान किया।
सिम्स निदेशक प्रफुल्ल अग्रवाल ने व्यवस्था संभाली। पंजीकरण में डा. वीके गुप्ता ने सहयोग किया। कार्यक्रम में नृत्य प्रशिक्षक डा. कविता गुप्ता के निर्देशन में लवकुश एकेडमी की छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। इसके अलावा गीतों पर मनमोहक नृत्य किया। कार्यक्रम का संचालन सौरभकांत शर्मा ने किया।
'शिक्षित-ज्ञानी व्यक्ति ही समृद्ध और सुरक्षित होता है'
जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह ने कहा कि विद्यार्थी के लिए शिक्षा ही सबसे बड़ा श्रृंगार है। शिक्षा सबसे बड़ी संपत्ति है। जिसके पास ज्ञान है वह समृद्ध और सुरक्षित है। अच्छी शादी, विदेश घूमने, कमाई करने, अच्छी पोस्टिंग जैसी खतरनाक सोच को लेकर शिक्षा पाना उद्देश्य नहीं होना चाहिए।
शिक्षा से ऊंचे मुकाम पर पहुंचकर लोगों को ध्यान रखना आवश्यक है। छात्र जीवन सबसे महत्वपूर्ण है। इसके हर घंटे का सदुपयोग करना चाहिए। क्योंकि अभी यदि मनोरंजन को छोड़कर कापी किताबों से नाता जोड़ लिया, मेहनत करके माता-पिता को खुशी दी तो जीवन की हर राह आसान हो जाएगी। देश व समाज की भी अहम जिम्मेदारी आप पर आएगी।
'शिक्षा का उद्देश्य धन कमाना नहीं बल्कि सामाजिक उत्थान हो'
पुलिस अधीक्षक यमुना प्रसाद ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों में मेधावियों का सम्मानित होना, दूसरे बच्चों के लिए प्रेरणा बनेगा। विद्या ज्ञान धन कमाने के लिए नहीं बल्कि दबे कुचले लोगों के उत्थान के लिए हो। क्योंकि आप किसी भी पद पर हों लेकिन पहले आप इंसान हैं। संकल्प लें, जो बच्चा किन्हीं कारणों से नहीं पढ़ रहा है, कम से कम ऐसे एक बच्चे को जरूर चयनित कर उसके घर जाएं।
उसे और उसके अभिभावकों को प्रेरित करें, अफसरों व एनजीओ से समस्या निस्तारित कराएं। उसे शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ें। अन्यथा वह दिशा भटक सकता है। जो समाज के लिए घातक भी हो सकता है।
'अभी परिश्रम किया तो जीवन की हर राह आसान होगी'
जिला विद्यालय निरीक्षक मनोज कुमार आर्य ने मेधावियों से कहा कि यह जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं है। यह समय जीवन का लक्ष्य निर्धारित करने का समय है। जिसका मूलमंत्र यह है कि यदि अभी कठिन परिश्रम संघर्ष करेंगे तो जीवनभर आनंद उठाएंगे और यदि अभी आनंद उठाया तो जीवनभर संघर्ष करना होगा। पहले क्या चुनना है, यह अभी तय करना होगा।
यह मेधावी हुए सम्मानित
हर्षित अग्रवाल, दिग्विजय सिंह, सौभाग्य अग्रवाल, उत्कर्ष अग्रवाल, प्रियंका, गोविंद वार्ष्णेय, ममता, सोना, अनामिता परवीन, अरिंतना उपाध्याय, प्रिया यादव, नेहा शर्मा, गुंजन महार, विष्णु देयोल, शिवानी कलेर, केशव वार्ष्णेय, तनु कुमारी, विष्णु, क्षितिज वार्ष्णेय, सृष्टि गौतम, स्नेहा जौहरी, आकाश अग्रवाल, सुंदर बाबू, अवनीश, शिखा अग्रवाल, उज्ज्वल यादव, विधि अग्रवाल, गुरुमीत सिंह, चिराग कुमार, आदित्य शर्मा, आशी महाजन, शिवानी चौधरी, सुष्मिता सिरोही, शिल्पा, तान्या रस्तोगी, अंश शंकर, शिवम वार्ष्णेय, मोहित कुमार, शिखर शर्मा, आयुष अग्रवाल, मितु वार्ष्णेय, तोषिका वार्ष्णेय, आशी पाठक, पवनी गुप्ता, शैलजा वार्ष्णेय, दिव्या वार्ष्णेय आदि।