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अजुध्या शुगर मिल की कटी आरसी
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Sun, 21 Aug 2016 11:26 AM IST
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अपराध
- फोटो : demo
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किसानों का भुगतान करने में मनमानी दिखाने वाली बिलारी की अजुध्या शुगर मिल को आरसी जारी कर दी गई। इसके साथ ही प्रदेश की आठ और मिलें भी इस जद में आ गई हैं। इन सभी मिलों पर किसानों का एक हजार 35 करोड़ बीस लाख रुपये बकाया है। बिलारी की अजुध्या शुगर मिल का 34 करोड़ 72 लाख का भुगतान बाकी है। इन सभी मिलों पर 83.12 करोड़ रुपये का ब्याज भी लगाया गया है।
प्रदेश में चीनी मिलें किसानों का हजारों करोड़ रुपये दबाकर बैठी है। मिल बंद होने के तीन महीने के अंदर पूरा भुगतान करने के आदेश जारी किए गए थे। इस भुगतान को दो किस्तों में किया जाना था। पहली किस्त में मिल बंद होने के 15 दिन के अंदर 230 रुपये प्रति कुंतल की दर से और दूसरी किस्त में मिल बंद होने के तीन महीने के अंदर 50 रुपये प्रति कुंतल की दर से होना था। ये समय सीमा जून में खत्म हो गई। इसके बावजूद अभी तक प्रदेश भर में 65 फीसदी का ही भुगतान हो पाया है।
मुरादाबाद में अभी तक किसानों का मिलों पर 115 करोड़ पहली किस्त का और करीब तीस करोड़ दूसरी किस्त का बकाया है। नौ अगस्त को आयुक्त गन्ना विकास एवं चीनी मिल विपिन कुमार द्विवेदी ने मिल मालिकों के साथ सर्किट हाउस में बैठक की थी।
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इस दौरान उन्होंने बीस अगस्त तक भुगतान करने के आदेश दिए थे और सभी चीनी मिलों ने सहमति थी। इस दौरान राणा ग्रुप की मिलों पर विशेष रूप से नाराजगी जताई थी। बीस अगस्त तक भुगतान का स्तर नहीं बढ़ने पर उनके खिलाफ देर शाम आरसी जारी कर दी गई। इसके साथ ही मोदी गाजियाबाद, मलकपुर बागपत, तितावी मुजफ्फरनगर, चिलवरिया बहराइच, बहेड़ी बरेली, बृजनाथपुर हापुड़, ऊन मुजफ्फरनगर, मवाना मेरठ भी शामिल हैं।
चालीस फीसदी से कम है इन का भुगतान
मुरादाबाद। प्रदेश की जिन नौ मिलों के खिलाफ आरसी जारी की गई है। उनका भुगतान चालीस फीसदी से कम है। शासन की नीति के अनुसार पहले एक निश्चित सीमा के अंदर भुगतान करने वाली मिलों की आरसी जारी की गई है। इसके बाद 75 फीसदी से कम भुगतान करने वालों की आरसी जारी की जाएगी। अगर दूसरी आरसी तक नौबत जाती है तो मुरादाबाद मंडल की कई मिलों की आरसी जारी होना तय है।
कुछ नीलाम हो गईं तो कुछ होगी
मुरादाबाद। बिलारी शुगर मिल गन्ना भुगतान को लेकर सबसे अधिक विवादित रही है। मिल पर सत्र 2015-16 का 34.72 करोड़ बकाया है। जबकि सत्र 2014-15 का भी कुछ भुगतान बाकी है। वहीं नए पेराई सत्र की तैयारी शुरू हो चुकी है और उसके लिए गन्ना क्षेत्र आवंटन की बैठक जल्द होनी है। किसानों का गन्ना भुगतान नहीं करने के कारण मिल की चीनी प्रशासन ने कब्जे में ले ली थी। इसके बावजूद गोदाम से चीनी गायब हो गई। बची हुई चीनी नीलाम कर किसानों का भुगतान किया। बैठक में बिलारी शुगर मिल के प्रबंधक ने बीस तक भुगतान का आश्वासन दिया था। लेकिन मामला जस का तस ही रहा। मिल की करीब चार करोड़ की चीनी प्रशासन की कब्जे में है जिसकी नीलामी होना बाकी है।
सब कुछ मिलाकर हो पाएगा आधा भुगतान
मुरादाबाद। मिल का कुल बकाया 34.72 करोड़ रुपये है। इस पर 2.27 करोड़ की ब्याज लगाया गया है। जिससे कुल मिलाकर 37 करोड़ रुपये हो जाते हैं। बीस तक भुगतान करने पर इनका ब्याज बच जाता और वसूली प्रमाण पत्र भी जारी नहीं होता। लेकिन मिल अपनी हठधर्मिता के कारण भुगतान ही नहीं कर रही है। मिल के पास करीब चार करोड़ की चीनी बची है। इसके साथ ही शीरा और कबाड़ और बिजली का सभी कुछ मिलाकर कुल 19 करोड़ की रकम बनती है। बाकी 18 करोड़ रुपये का भुगतान उसे दूसरे स्रोतों से करना पड़ेगा।
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प्रदेश में चीनी मिलें किसानों का हजारों करोड़ रुपये दबाकर बैठी है। मिल बंद होने के तीन महीने के अंदर पूरा भुगतान करने के आदेश जारी किए गए थे। इस भुगतान को दो किस्तों में किया जाना था। पहली किस्त में मिल बंद होने के 15 दिन के अंदर 230 रुपये प्रति कुंतल की दर से और दूसरी किस्त में मिल बंद होने के तीन महीने के अंदर 50 रुपये प्रति कुंतल की दर से होना था। ये समय सीमा जून में खत्म हो गई। इसके बावजूद अभी तक प्रदेश भर में 65 फीसदी का ही भुगतान हो पाया है।
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मुरादाबाद में अभी तक किसानों का मिलों पर 115 करोड़ पहली किस्त का और करीब तीस करोड़ दूसरी किस्त का बकाया है। नौ अगस्त को आयुक्त गन्ना विकास एवं चीनी मिल विपिन कुमार द्विवेदी ने मिल मालिकों के साथ सर्किट हाउस में बैठक की थी।
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इस दौरान उन्होंने बीस अगस्त तक भुगतान करने के आदेश दिए थे और सभी चीनी मिलों ने सहमति थी। इस दौरान राणा ग्रुप की मिलों पर विशेष रूप से नाराजगी जताई थी। बीस अगस्त तक भुगतान का स्तर नहीं बढ़ने पर उनके खिलाफ देर शाम आरसी जारी कर दी गई। इसके साथ ही मोदी गाजियाबाद, मलकपुर बागपत, तितावी मुजफ्फरनगर, चिलवरिया बहराइच, बहेड़ी बरेली, बृजनाथपुर हापुड़, ऊन मुजफ्फरनगर, मवाना मेरठ भी शामिल हैं।
चालीस फीसदी से कम है इन का भुगतान
मुरादाबाद। प्रदेश की जिन नौ मिलों के खिलाफ आरसी जारी की गई है। उनका भुगतान चालीस फीसदी से कम है। शासन की नीति के अनुसार पहले एक निश्चित सीमा के अंदर भुगतान करने वाली मिलों की आरसी जारी की गई है। इसके बाद 75 फीसदी से कम भुगतान करने वालों की आरसी जारी की जाएगी। अगर दूसरी आरसी तक नौबत जाती है तो मुरादाबाद मंडल की कई मिलों की आरसी जारी होना तय है।
कुछ नीलाम हो गईं तो कुछ होगी
मुरादाबाद। बिलारी शुगर मिल गन्ना भुगतान को लेकर सबसे अधिक विवादित रही है। मिल पर सत्र 2015-16 का 34.72 करोड़ बकाया है। जबकि सत्र 2014-15 का भी कुछ भुगतान बाकी है। वहीं नए पेराई सत्र की तैयारी शुरू हो चुकी है और उसके लिए गन्ना क्षेत्र आवंटन की बैठक जल्द होनी है। किसानों का गन्ना भुगतान नहीं करने के कारण मिल की चीनी प्रशासन ने कब्जे में ले ली थी। इसके बावजूद गोदाम से चीनी गायब हो गई। बची हुई चीनी नीलाम कर किसानों का भुगतान किया। बैठक में बिलारी शुगर मिल के प्रबंधक ने बीस तक भुगतान का आश्वासन दिया था। लेकिन मामला जस का तस ही रहा। मिल की करीब चार करोड़ की चीनी प्रशासन की कब्जे में है जिसकी नीलामी होना बाकी है।
सब कुछ मिलाकर हो पाएगा आधा भुगतान
मुरादाबाद। मिल का कुल बकाया 34.72 करोड़ रुपये है। इस पर 2.27 करोड़ की ब्याज लगाया गया है। जिससे कुल मिलाकर 37 करोड़ रुपये हो जाते हैं। बीस तक भुगतान करने पर इनका ब्याज बच जाता और वसूली प्रमाण पत्र भी जारी नहीं होता। लेकिन मिल अपनी हठधर्मिता के कारण भुगतान ही नहीं कर रही है। मिल के पास करीब चार करोड़ की चीनी बची है। इसके साथ ही शीरा और कबाड़ और बिजली का सभी कुछ मिलाकर कुल 19 करोड़ की रकम बनती है। बाकी 18 करोड़ रुपये का भुगतान उसे दूसरे स्रोतों से करना पड़ेगा।