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अभिषेक को नहीं मिली बेल, काटनी पड़ेगी जेल
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Fri, 03 Feb 2017 02:43 AM IST
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jail shimla
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करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी में फंसे व्यापारी अभिषेक अग्रवाल को फिलहाल जेल में ही रहना पड़ेगा। लोअर कोर्ट के बाद गुरुवार को सेशन कोर्ट ने भी अभिषेक की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अभिषेक को अब जमानत के लिए हाईकोर्ट जाना होगा। अभिषेक की मुश्किलें यहीं तक नहीं सिमटी हैं।
जेल जाने के बाद उसके खिलाफ धोखाधड़ी के तीन मामले और दर्ज हो चुके हैं। जबकि पहले से भी उस पर छह से अधिक मामले दर्ज हैं। आर्यंस इंटरनेशनल और गोल्डन गेट समेत कई बड़े स्कूलों की नींव डालने वाला अभिषेक अक्तूबर 2015 में रातोंरात शहर से परिवार समेत गायब हो गया था।
इसके बाद बैंकों ने उसे प्रतिष्ठान और मानसरोवर स्थित कोठी को नीलाम कर दिया था। अभिषेक के शहर से गायब होने के बाद खुलासा हुआ था कि उसने एक ही प्रापर्टी को कई - कई बैंकों में गिरवीं रखकर करोड़ों रुपये का लोन गलत ढंग से ले रखा था।
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इतना ही नहीं बैंकों में बंधक प्रापर्टी को भी उसने शहर में अलग - अलग लोगों को धोखे से बेच दिया था। गायब होने के बाद अभिषेक के खिलाफ सिविल लाइंस और मझोला थाने में छह मुकदमे दर्ज हए थे। चेक बाउंस के तीन मामले सीधे अदालत में उसके खिलाफ दर्ज हुए।
लेकिन पुलिस से सेटिंग करके अभिषेक ने अपने खिलाफ दर्ज सभी मामलों में एफआर लगवा ली थी। लेकिन इन्हीं में से एक मुकदमे के वादी मोहम्मद शमीम ने एफआर के खिलाफ कोर्ट में प्रोटेस्ट दाखिल कर दिया था। जिस पर सुनवाई के बाद अदालत ने एफआर रिजेक्ट कर दी और अभिषेक के खिलाफ वारंट जारी कर दिया।
कोर्ट के वारंट पर 14 जनवरी को पुलिस ने अभिषेक को विशाल मेगा मार्ट स्थित उसके आफिस से गिरफ्तार कर लिया था। तभी से वह जेल में बंद है। रामगंगा विहार निवासी व्यापारी सुमित गोयल ने भी अभिषेक के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
जेल में बंद अभिषेक को इस मामले में भी वारंट तामील करा दिए गए थे। लोअर कोर्ट ने पहले ही अभिषेक की अर्जी इस मामले में खारिज कर दी थी। सुमित के अधिवक्ता अनुज कुमार विश्नोई का कहना है कि अभिषेक से सेशन कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की थी। सुनवाई के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश - 11 कल्पना ने अभिषेक की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया।
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जेल जाने के बाद उसके खिलाफ धोखाधड़ी के तीन मामले और दर्ज हो चुके हैं। जबकि पहले से भी उस पर छह से अधिक मामले दर्ज हैं। आर्यंस इंटरनेशनल और गोल्डन गेट समेत कई बड़े स्कूलों की नींव डालने वाला अभिषेक अक्तूबर 2015 में रातोंरात शहर से परिवार समेत गायब हो गया था।
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इसके बाद बैंकों ने उसे प्रतिष्ठान और मानसरोवर स्थित कोठी को नीलाम कर दिया था। अभिषेक के शहर से गायब होने के बाद खुलासा हुआ था कि उसने एक ही प्रापर्टी को कई - कई बैंकों में गिरवीं रखकर करोड़ों रुपये का लोन गलत ढंग से ले रखा था।
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इतना ही नहीं बैंकों में बंधक प्रापर्टी को भी उसने शहर में अलग - अलग लोगों को धोखे से बेच दिया था। गायब होने के बाद अभिषेक के खिलाफ सिविल लाइंस और मझोला थाने में छह मुकदमे दर्ज हए थे। चेक बाउंस के तीन मामले सीधे अदालत में उसके खिलाफ दर्ज हुए।
लेकिन पुलिस से सेटिंग करके अभिषेक ने अपने खिलाफ दर्ज सभी मामलों में एफआर लगवा ली थी। लेकिन इन्हीं में से एक मुकदमे के वादी मोहम्मद शमीम ने एफआर के खिलाफ कोर्ट में प्रोटेस्ट दाखिल कर दिया था। जिस पर सुनवाई के बाद अदालत ने एफआर रिजेक्ट कर दी और अभिषेक के खिलाफ वारंट जारी कर दिया।
कोर्ट के वारंट पर 14 जनवरी को पुलिस ने अभिषेक को विशाल मेगा मार्ट स्थित उसके आफिस से गिरफ्तार कर लिया था। तभी से वह जेल में बंद है। रामगंगा विहार निवासी व्यापारी सुमित गोयल ने भी अभिषेक के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
जेल में बंद अभिषेक को इस मामले में भी वारंट तामील करा दिए गए थे। लोअर कोर्ट ने पहले ही अभिषेक की अर्जी इस मामले में खारिज कर दी थी। सुमित के अधिवक्ता अनुज कुमार विश्नोई का कहना है कि अभिषेक से सेशन कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की थी। सुनवाई के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश - 11 कल्पना ने अभिषेक की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया।