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दस्तकारों का बीमा स्वास्थ्य कार्ड धरातल से कोसो दूर
Moradabad
Updated Tue, 12 Jun 2012 12:00 PM IST
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मुरादाबाद। दस्तकारों का बीमा स्वास्थ्य कार्ड की सच्चाई अब तक धरातल से कोसो दूर खड़ा है। आलम यह है कि न तो कारीगरों के कार्ड बने हैं और न ही उन्हें किसी प्रकार की सुविधा मुहैया कराई गई है। कारीगर कार्ड बनवाने के लिए कभी स्वयं सेवी संस्थाओं तो एमएचएससी तो कभी डीआईसी का चक्कर काटने को मजबूर हैं।
मालूम हो कि महानगर में निर्यात के लिए तैयार किए जाने वाले मेटल उत्पादों के क्षेत्र में 80 हजार से अधिक कारीगर जुड़े हैं। ये वे कारीगर हैं दैनिक वेेतन भोगी की श्रेणी में आते हैं। इनके उत्थान के लिए भारत सरकार की पहल पर राजीव गांधी स्वास्थ्य बीमा कार्ड योजना लागू की गई। इसके तहत कारीगरों को 15 हजार रुपये के मुफ्त इलाज किए जाने हैं। कार्ड बनाने की जिम्मेदारी एक निजी बीमा कंपनी को सौंपी गई है। इसकी हकीकत यह है कि अब तक 80 हजार में से मात्र 2 हजार कारीगरों के ही बनाए गए हैं वही सिर्फ कागजों पर। जिन कारीगरों के कार्ड बनवाए गए हैं उन्हें अब तक उनका कार्ड मुहैया नहीं कराया गया है। इस मुद्दे पर बीते दिनों जमकर बवाल हुआ। मामला डीसी हैंडीक्राफ्ट के दफ्तर तक गूंजा। लेकिन परिणाम अब तक किसी को कुछ हासिल नहीं हुआ है। प्रदेश और केंद्र सरकार के इस ढुलमुल रवैये परेशान कारीगर खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। उनकी बात कहीं नहीं सुनी जा रही है। उधर ब्रास आर्टीजन सोसाएटी के अध्यक्ष सय्यद गानिम मिंया बताते हैं कि कार्य में तेजी लाने का दबाव लगातार बनाया जा रहा है। पर परिणाम अब तक सामने नहीं आया है। जमीर हुसैन का कहना है कि यही हाल रहा तो दस्तकार आंदोलन का रास्ता अख्तियार करने को मजबूर होंगे।
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