{"_id":"5ad116324f1c1b3b0b8b465d","slug":"81523652146-moradabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नगर निगम ने कर लिया पब्लिक को डुबोने का इंतजाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नगर निगम ने कर लिया पब्लिक को डुबोने का इंतजाम
Updated Sat, 14 Apr 2018 02:16 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुरादाबाद।
करुला, जयंतीपुर, सीतापुरी, दस सराय, मियां कालोनी और मैनाठेर की मिलक समेत शहर के बड़े लो लाइन इलाके को बरसात में डुबोने का पक्का इंतजाम हो गया है। मियां कालोनी और मैनाठेर की मिलक से होकर गुजर रहे नगर निगम के नाले को पाटकर यहां बड़े हिस्से पर प्लाटिंग कर दी गई है। प्रापर्टी डीलर और छुटभैय्ये नेता यहां छोटे - छोटे भूखंड बनाकर नाले को बेच रहे हैं। नाले के कलेजे पर कंकरीट का जंगल उग चुका है। नाला पाट दिए जाने की वजह से बरसात में इस इलाके में जलभराव तय है।
मैनाठेर की मिलक, मियां कालोनी होकर संभल रोड तक जाने वाला यह नाला लाइनपार के बड़े इलाके का पानी लेकर गांगन तक जाता है। लेकिन इस कच्चे नाले का ज्यादातर हिस्सा कब्जा लिया गया है। करीब चार साल पहले स्थानीय पार्षद ने इस नाले के बड़े हिस्से को पाटकर उस पर अवैध रूप भूखंड काटकर बेच दिए थे। तत्कालीन नगर विकास मंत्री मोहम्मद आजम खां के आदेश पर नगर निगम ने उन कब्जों को ध्वस्त करके पार्षद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। लेकिन पुलिस कभी भी उस पार्षद को गिरफ्तार नहीं कर सकी। कुछ दिन बाद निगम का ध्यान वहां से हटा तो फिर से नाले पर कब्जे शुरू हो गए। मैनाठेर की पुलिया के दोनों साइड करीब एक - एक किमी तक नाला पूरी तरह से अवैध कब्जों में दफन हो चुका है। मौके पर ही कुर्सी मेज लगाकर नाले के सीने पर भूखंड काटे जा रहे हैं। नगर निगम के अफसर भी इस हकीकत से अंजान नहीं हैं। लेकिन इसके बावजूद निगम की ओर से अभी तक इसे रोकने और अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने की कोई कार्रवाई नहीं की गई है। नाले का वजूद खत्म होता देख स्थानीय लोग भी गुस्से में हैं। इसका खामियाजा स्थानीय लोगों के साथ - साथ उन इलाकों को भी झेलना पड़ेगा जहां से होकर यह नाला गुजरता है। मैनाठेर की मिलक और मियां कालोनी तो बरसात में डूबेंगे ही लाइनपार का बड़ा हिस्सा भी इससे प्रभावित होगा। मियां कालोनी में नाला ठप्प हो जाने की वजह से पीछे से आने वाला पानी लाइनपार की बस्तियों और मोहल्लों में भरेगा। चार साल पहले अवैध कब्जों से बचाने के लिए इस नाले को पक्का बनाने की मुहिम शुरू हुई थी। नगर निगम ने प्रस्ताव भी तैयार किया था। लेकिन इस नाले को आज तक बनाया नहीं जा सका।
अफसरों की सरपरस्ती में मिट रहा नाले का वजूद
मुरादाबाद।
सरकारी जमीनों पर कब्जों के खिलाफ सरकार की सख्त मुहिम के बावजूद शहर में एक बड़े नाले का वजूद करीब - करीब खत्म कर दिया गया है। गांगन नदी की धार पर कब्जे हो चुके हैं और काली मंदिर से लेकर जामा मस्जिद तक रामगंगा में तमाम टाट - टप्पर बस्तियां बस गई हैं। जिगर कालोनी से लेकर दसवां घाट तक गंगा के भीतर तक घर बना लिए गए हैं। अब मियां कालोनी और मैनाठेर की पुलिया के पास नाले का बड़ा हिस्सा गायब कर दिया गया है। इस तरह के कब्जों में निगम अफसरों पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं। निगम के पास लंबा - चौड़ा संपत्ति विभाग है। इसके बावजूद निगम इन कब्जों की भनक नहीं लगने का दावा करता रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार उन्होंने शिकायतें भी कीं लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
विज्ञापन
बरसात में मुश्किल होता है घर से निकलना
मुरादाबाद।
स्थानीय निवासी शकील अहमद का कहना है कि बरसात के दिनों में घर से निकलना भी मुश्किल होता है। क्योंकि बारिश की वजह से पूरे इलाके में दो से तीन फुट तक जलभराव होता है। नाला कच्चा है। रही सही कसर कब्जा करने वालों ने पूरी कर दी है। निगम ने नाला बनवाने का वादा किया था जो अभी तक पूरा नहीं हुआ।
चुनाव के साथ खत्म हुई नाले की बात
मुरादाबाद।
मैनाठेर की पुलिया पर रहने वाले जीशान अहमद कहते हैं कि चुनावों में यहां पक्का नाला बनवाने की बात हुई थी तो चुनावों के साथ खत्म हो गई। पक्का नाला बन जाता तो यहां अवैध कब्जे भी नहीं होते। नाले पर कब्जे को जाएंगे तो बरसात का पानी कहां से निकलेगा। खामियाजा तो हमीं लोगों को भुगतना पड़ेगा।
पहले कब्जा तुड़वाया फिर से हो गया
मुरादाबाद।
मियां कालोनी निवासी अशरफ का कहना है कि नाले पर पहले कब्जा हुआ था जिसे चार साल पहले तुड़वा दिया गया था। लेकिन फिर से पूरा नाला दफन कर दिया गया। निगम ने कभी इसे पक्का बनाने की कोशिश नहीं की। बरसात में यहां पानी भरेगा और लोग घरों से निकलने को भी तरस जाएंगे। घरों में भी पानी भर जाता है।
सबकुछ जानकर भी अंजान क्यों हैं अफसर
मुरादाबाद।
इंतजार का कहना है कि नाले पर कब्जे की कहानी अफसरों से छुपी तो नहीं है। फिर अधिकारी खामोश क्यों हैं। बोले, कई जगह नाला सिर्फ नाली बनकर रह गया है। अब भी अफसर चेतें और पक्का नाला बनवा दें तो गनीमत है। नहीं तो एक इंच जमीन नहीं बचेगी नाले की। बारिश में पूरा इलाका तालाब बन जाएगा।
विज्ञापन
करुला, जयंतीपुर, सीतापुरी, दस सराय, मियां कालोनी और मैनाठेर की मिलक समेत शहर के बड़े लो लाइन इलाके को बरसात में डुबोने का पक्का इंतजाम हो गया है। मियां कालोनी और मैनाठेर की मिलक से होकर गुजर रहे नगर निगम के नाले को पाटकर यहां बड़े हिस्से पर प्लाटिंग कर दी गई है। प्रापर्टी डीलर और छुटभैय्ये नेता यहां छोटे - छोटे भूखंड बनाकर नाले को बेच रहे हैं। नाले के कलेजे पर कंकरीट का जंगल उग चुका है। नाला पाट दिए जाने की वजह से बरसात में इस इलाके में जलभराव तय है।
मैनाठेर की मिलक, मियां कालोनी होकर संभल रोड तक जाने वाला यह नाला लाइनपार के बड़े इलाके का पानी लेकर गांगन तक जाता है। लेकिन इस कच्चे नाले का ज्यादातर हिस्सा कब्जा लिया गया है। करीब चार साल पहले स्थानीय पार्षद ने इस नाले के बड़े हिस्से को पाटकर उस पर अवैध रूप भूखंड काटकर बेच दिए थे। तत्कालीन नगर विकास मंत्री मोहम्मद आजम खां के आदेश पर नगर निगम ने उन कब्जों को ध्वस्त करके पार्षद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। लेकिन पुलिस कभी भी उस पार्षद को गिरफ्तार नहीं कर सकी। कुछ दिन बाद निगम का ध्यान वहां से हटा तो फिर से नाले पर कब्जे शुरू हो गए। मैनाठेर की पुलिया के दोनों साइड करीब एक - एक किमी तक नाला पूरी तरह से अवैध कब्जों में दफन हो चुका है। मौके पर ही कुर्सी मेज लगाकर नाले के सीने पर भूखंड काटे जा रहे हैं। नगर निगम के अफसर भी इस हकीकत से अंजान नहीं हैं। लेकिन इसके बावजूद निगम की ओर से अभी तक इसे रोकने और अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने की कोई कार्रवाई नहीं की गई है। नाले का वजूद खत्म होता देख स्थानीय लोग भी गुस्से में हैं। इसका खामियाजा स्थानीय लोगों के साथ - साथ उन इलाकों को भी झेलना पड़ेगा जहां से होकर यह नाला गुजरता है। मैनाठेर की मिलक और मियां कालोनी तो बरसात में डूबेंगे ही लाइनपार का बड़ा हिस्सा भी इससे प्रभावित होगा। मियां कालोनी में नाला ठप्प हो जाने की वजह से पीछे से आने वाला पानी लाइनपार की बस्तियों और मोहल्लों में भरेगा। चार साल पहले अवैध कब्जों से बचाने के लिए इस नाले को पक्का बनाने की मुहिम शुरू हुई थी। नगर निगम ने प्रस्ताव भी तैयार किया था। लेकिन इस नाले को आज तक बनाया नहीं जा सका।
विज्ञापन
अफसरों की सरपरस्ती में मिट रहा नाले का वजूद
मुरादाबाद।
सरकारी जमीनों पर कब्जों के खिलाफ सरकार की सख्त मुहिम के बावजूद शहर में एक बड़े नाले का वजूद करीब - करीब खत्म कर दिया गया है। गांगन नदी की धार पर कब्जे हो चुके हैं और काली मंदिर से लेकर जामा मस्जिद तक रामगंगा में तमाम टाट - टप्पर बस्तियां बस गई हैं। जिगर कालोनी से लेकर दसवां घाट तक गंगा के भीतर तक घर बना लिए गए हैं। अब मियां कालोनी और मैनाठेर की पुलिया के पास नाले का बड़ा हिस्सा गायब कर दिया गया है। इस तरह के कब्जों में निगम अफसरों पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं। निगम के पास लंबा - चौड़ा संपत्ति विभाग है। इसके बावजूद निगम इन कब्जों की भनक नहीं लगने का दावा करता रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार उन्होंने शिकायतें भी कीं लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
विज्ञापन
बरसात में मुश्किल होता है घर से निकलना
मुरादाबाद।
स्थानीय निवासी शकील अहमद का कहना है कि बरसात के दिनों में घर से निकलना भी मुश्किल होता है। क्योंकि बारिश की वजह से पूरे इलाके में दो से तीन फुट तक जलभराव होता है। नाला कच्चा है। रही सही कसर कब्जा करने वालों ने पूरी कर दी है। निगम ने नाला बनवाने का वादा किया था जो अभी तक पूरा नहीं हुआ।
चुनाव के साथ खत्म हुई नाले की बात
मुरादाबाद।
मैनाठेर की पुलिया पर रहने वाले जीशान अहमद कहते हैं कि चुनावों में यहां पक्का नाला बनवाने की बात हुई थी तो चुनावों के साथ खत्म हो गई। पक्का नाला बन जाता तो यहां अवैध कब्जे भी नहीं होते। नाले पर कब्जे को जाएंगे तो बरसात का पानी कहां से निकलेगा। खामियाजा तो हमीं लोगों को भुगतना पड़ेगा।
पहले कब्जा तुड़वाया फिर से हो गया
मुरादाबाद।
मियां कालोनी निवासी अशरफ का कहना है कि नाले पर पहले कब्जा हुआ था जिसे चार साल पहले तुड़वा दिया गया था। लेकिन फिर से पूरा नाला दफन कर दिया गया। निगम ने कभी इसे पक्का बनाने की कोशिश नहीं की। बरसात में यहां पानी भरेगा और लोग घरों से निकलने को भी तरस जाएंगे। घरों में भी पानी भर जाता है।
सबकुछ जानकर भी अंजान क्यों हैं अफसर
मुरादाबाद।
इंतजार का कहना है कि नाले पर कब्जे की कहानी अफसरों से छुपी तो नहीं है। फिर अधिकारी खामोश क्यों हैं। बोले, कई जगह नाला सिर्फ नाली बनकर रह गया है। अब भी अफसर चेतें और पक्का नाला बनवा दें तो गनीमत है। नहीं तो एक इंच जमीन नहीं बचेगी नाले की। बारिश में पूरा इलाका तालाब बन जाएगा।