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संभलकर खरीदें दाल, हो सकता है लकवा

Tue, 11 Sep 2018 02:21 AM IST
Updated Tue, 11 Sep 2018 02:21 AM IST
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संभलकर खरीदें दाल, हो सकता है लकवा
मुरादाबाद।
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अरहर और चने की दाल में खेसारी की मिलावट से लकवे की आशंका व्यक्त की जा रही है। जिसे सरकार ने गंभीरता से लेते हुए अलर्ट जारी किया है। यह भी बताया कि दाल के नाम पर बाजारी में मिल रही खेसारी से कैसे निपटेंगे। खाद्य एवं औषधि प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वह मिलावट को रोकने के लिए छापामारी का विशेष अभियान चलाएं।
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी महेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि खेसारी तराई क्षेत्रों में धान की कटाई के बाद स्वत: उग आता है। इसकी पैदावार को दाल बनाकर बेचा जाता है। खेसारी की दाल 12-15 रुपये किलो बाजार में आसानी से मिल जाती थी, जिसे अरहर और चने की दाल में मिलाकर बेचा जा रहा है। चिकित्सकीय परीक्षणों में पाया गया है कि खेसारी की दाल का प्रयोग करने से लकवा रोग हो जाता है। यह दाल तंत्रिका तंत्र और दिमाग को नुकसान पहुंचाती है। शासन ने 2011 में इसकी बिक्री, भंडारण और ट्रांसपोर्टेशन को प्रतिबंधित कर दिया था। अब दालों में खेसारी मिलाने की शिकायतें आ रही हैं। जिसको देखते हुए दालों के सैंपल लेने को अभियान शुरू किया गया है।
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एफएसडीए की टीम ने सोमवार को अगवानपुर में शेरुआ चौराहे से अनिल कुमार गुप्ता की दुकान से चने व अरहर की दाल के नमूने लिए थे। मुकेश कुमार व प्रियांशु की दुकान से अरहर की दाल का सैंपल लिया गया। छजलैट में फय्यूम की दुकान से अरहर व मटर की दाल। इस्लामुद्दीन की दुकान से अरहर की दाल और इंतजार की दुकान से उड़द की दाल का सैंपल लेकर जांच को भेजा गया है।
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संभलकर खरीदें दाल
मुरादाबाद। खाद्य विभाग के अफसरों के अनुसार खेसारी की दाल का दाना देखने में अरहर व चने की दाल जैसा लगता हे। इससे आसानी से उसमें मिलाया जा सकता है। दाल खरीदते समय यदि थोड़ा ध्यान दिया जाए तो खेसारी को पहचाना जा सकता है। चने व अरहर का दाना पीछे की ओर से गोल होता है, जबकि खेसारी का दाना चपटा होता है। इसको चपरी या मटरी की दाल भी कहा जाता है। यदि चने व अरहर की दाल में चपटा दाना मिला हो तो उसको कतई न खरीदें। इसका दूसरा उपाय यह है कि दाल का पक्का बिल अवश्य लें। बिना बिल के दाल न खरीदें।
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