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वित्तीय नियमों को ताक पर रख खर्च किया 48 लाख
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मुरादाबाद। प्रशासकों के कार्यकाल के दौरान आनन-फानन विकास कार्य के नाम पर खर्च की गई धनराशि मामले की जांच को शासन से पहुंची टीम को दूसरे दिन भी कुंदरकी विकास खंड की ग्राम पंचायत रतनपुर कलां में भारी अनियमितताएं मिलीं। कहीं टेंडर प्रक्रिया में झोल मिला तो कहीं सामानों की खरीद में गड़बड़ी। न तो विकास कार्यों का प्रस्ताव पास मिला न ही नियमानुसार वित्तीय स्वीकृति। इसके चलते इस ग्राम पंचायत में प्रशासकों के कार्यकाल में खर्च दिखाए गए 48 लाख रुपये पर ही सवालिया निशान लग गया है।
प्रशासकों के कार्यकाल के दौैरान कराए गए विकास कार्यों की जांच के लिए शासन से गठित पांच सदस्यीय टीम के मुखिया एवं विशेष सचिव पंचायतीराज शाहिद मंजर अब्बास रिजवी मंगलवार सुबह को ही गांव पहुंच गए। प्राथमिक स्कूल पूर्वी में कायाकल्प के नाम पर 200 वर्ग मीटर टायल्स पर लाखों रुपये खर्च दिखाए गए हैं। विशेष सचिव के साथ टीम में शामिल रामपुर जिला पंचायत के इंजीनियर मोहम्मद गुलफाम ने जब कराए गए कार्य की नपत कराई तो वह 148 वर्ग मीटर ही निकला। अभिलेखों की जांच की गई तो इस कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया भी पूर्ण नहीं मिली। फाइल में तीन टेंडर तो मिले, लेकिन उनमें से सिर्फ एक पर ही सचिव के हस्ताक्षर मिले। फाइल में एडीओ की स्वीकृति भी नहीं मिली। विशेष सचिव के पूछने पर ग्राम पंचायत सचिव ने बताया कि वह बाद में उपलब्ध करा दिया जाएगा। दो लाख रुपये तक के विकास कार्यों की वित्तीय स्वीकृति की पत्रावली विशेष सचिव ने मांगी तो ग्राम पंचायत सचिव ने उन्हें ग्राम सभा के प्रस्ताव रजिस्टर के चंद फोटो स्टेट पन्ने पकड़ा दिए। उसमें पूर्व प्रधान समेत कुल 17 लोगों के हस्ताक्षर थे। इस पर विशेष सचिव ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने प्रधान से ग्राम सभा की मतदाता संख्या पूछी फिर बताया कि इसके अनुसार प्रस्ताव पर करीब 22 सौ ग्रामीणों के हस्ताक्षर होने चाहिए। वित्तीय स्वीकृति से संबंधित भी कोई अभिलेख सचिव जितेंद्र और एडीओ पंचयत द्विजेंद्र नहीं दिखा सके। इस पर विशेष सचिव ने ग्रामीणों के सामने ही पूरी कार्ययोजना को ही अवैध बता दिया। इससे इस ग्राम पंचायत में प्रशासकों के कार्यकाल में कराए गए करीब 48 लाख रुपये के विकास कार्यों पर ही सवालिया निशान लग गया है। मौके पर विशेष सचिव ने ग्राम पंचायत सचिव का इस आशय का लिखित बयान भी दर्ज कर लिया। साथ ही जिन कार्यों की टेंडर, वित्तीय स्वीकृति और एमबी नहीं मिली उन अभिलेखों को पड़ताल के लिए कब्जे में लिया है। इस दौरान डीपीआरओ आलोक कुमार प्रियदर्शी ग्राम प्रधान प्रतिनिधि समेत कई ग्रामीण भी मौैजूद रहे।
टीम में शामिल इंजीनियर ने पकड़ी कार्ययोजना में बैक डेटिंग
रतनपुर कलां में जांच के दौरान ग्राम सभा की कार्ययोजना के प्रस्तावों की जांच की गई। इसके लिए सचिव जितेंद्र ने जो अभिलेख उपलब्ध कराए उसमें प्रस्ताव तो 2020 का था लेकिन प्रस्ताव के अंत में जो हस्ताक्षर सचिव ने किए थे उसके नीचे वर्ष 2021 लिखा मिला। इस पर टीम में शामिल रामपुर जिला पंचायत के इंजीनियर मोहम्मद गुलफाम ने इस कमी को तुरंत पकड़ लिया और इसकी जानकारी विशेष सचिव को दे दी। इस पर विशेष सचिव ने ग्राम पंचायत सचिव व एडीओ की फटकार लगाई और इसे बैक डेट में अभिलेख तैयार करना बताया।
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प्रशासकों के कार्यकाल के दौैरान कराए गए विकास कार्यों की जांच के लिए शासन से गठित पांच सदस्यीय टीम के मुखिया एवं विशेष सचिव पंचायतीराज शाहिद मंजर अब्बास रिजवी मंगलवार सुबह को ही गांव पहुंच गए। प्राथमिक स्कूल पूर्वी में कायाकल्प के नाम पर 200 वर्ग मीटर टायल्स पर लाखों रुपये खर्च दिखाए गए हैं। विशेष सचिव के साथ टीम में शामिल रामपुर जिला पंचायत के इंजीनियर मोहम्मद गुलफाम ने जब कराए गए कार्य की नपत कराई तो वह 148 वर्ग मीटर ही निकला। अभिलेखों की जांच की गई तो इस कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया भी पूर्ण नहीं मिली। फाइल में तीन टेंडर तो मिले, लेकिन उनमें से सिर्फ एक पर ही सचिव के हस्ताक्षर मिले। फाइल में एडीओ की स्वीकृति भी नहीं मिली। विशेष सचिव के पूछने पर ग्राम पंचायत सचिव ने बताया कि वह बाद में उपलब्ध करा दिया जाएगा। दो लाख रुपये तक के विकास कार्यों की वित्तीय स्वीकृति की पत्रावली विशेष सचिव ने मांगी तो ग्राम पंचायत सचिव ने उन्हें ग्राम सभा के प्रस्ताव रजिस्टर के चंद फोटो स्टेट पन्ने पकड़ा दिए। उसमें पूर्व प्रधान समेत कुल 17 लोगों के हस्ताक्षर थे। इस पर विशेष सचिव ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने प्रधान से ग्राम सभा की मतदाता संख्या पूछी फिर बताया कि इसके अनुसार प्रस्ताव पर करीब 22 सौ ग्रामीणों के हस्ताक्षर होने चाहिए। वित्तीय स्वीकृति से संबंधित भी कोई अभिलेख सचिव जितेंद्र और एडीओ पंचयत द्विजेंद्र नहीं दिखा सके। इस पर विशेष सचिव ने ग्रामीणों के सामने ही पूरी कार्ययोजना को ही अवैध बता दिया। इससे इस ग्राम पंचायत में प्रशासकों के कार्यकाल में कराए गए करीब 48 लाख रुपये के विकास कार्यों पर ही सवालिया निशान लग गया है। मौके पर विशेष सचिव ने ग्राम पंचायत सचिव का इस आशय का लिखित बयान भी दर्ज कर लिया। साथ ही जिन कार्यों की टेंडर, वित्तीय स्वीकृति और एमबी नहीं मिली उन अभिलेखों को पड़ताल के लिए कब्जे में लिया है। इस दौरान डीपीआरओ आलोक कुमार प्रियदर्शी ग्राम प्रधान प्रतिनिधि समेत कई ग्रामीण भी मौैजूद रहे।
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टीम में शामिल इंजीनियर ने पकड़ी कार्ययोजना में बैक डेटिंग
रतनपुर कलां में जांच के दौरान ग्राम सभा की कार्ययोजना के प्रस्तावों की जांच की गई। इसके लिए सचिव जितेंद्र ने जो अभिलेख उपलब्ध कराए उसमें प्रस्ताव तो 2020 का था लेकिन प्रस्ताव के अंत में जो हस्ताक्षर सचिव ने किए थे उसके नीचे वर्ष 2021 लिखा मिला। इस पर टीम में शामिल रामपुर जिला पंचायत के इंजीनियर मोहम्मद गुलफाम ने इस कमी को तुरंत पकड़ लिया और इसकी जानकारी विशेष सचिव को दे दी। इस पर विशेष सचिव ने ग्राम पंचायत सचिव व एडीओ की फटकार लगाई और इसे बैक डेट में अभिलेख तैयार करना बताया।
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