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फरियादियों को चैनल के बार रखा, मीडिया को कमरे में कैद किया
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मुरादाबाद। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को दोपहर करीब पौने बारह बजे जिला अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचे तो अफसरों के हाथ पांव फूल गए। सीएम के लिए अस्पताल को रातोंरात चमकाया गया था। फिर भी मुख्यमंत्री के कानों तक कोई शिकायत न पहुंचे इसलिए निरीक्षण के समय तीमारदारों की अस्पताल में एंट्री रोक दी गई थी। सीएम का निरीक्षण कवर कर रहे मीडिया कर्मियों को डीएम ने हास्पिटल इमरजेंसी में बंद कर दिया। हालांकि डीएम का कहना है कि उन्होंने मीडिया को कमरे में बंद नहीं किया बल्कि रोका था, क्योंकि वार्ड में भीड़ के जाने से मरीजों को इंफेक्शन का खतरा था।
अफसर अस्पताल का सिर्फ अच्छा चेहरा ही मुख्यमंत्री के सामने आने देना चाहते थे। शायद यही वजह थी कि जब इमरजेंसी वार्ड का निरीक्षण करने के बाद मुख्यमंत्री महिला अस्पताल की तरफ बढ़े तो डीएम राकेश कुमार सिंह ने सीएम के साथ चल रहे मीडिया कर्मियों को यहीं रोक दिया। वह सभी मीडिया कर्मियों को इमरजेंसी के अंदर ले गए और बाहर से दरवाजा बंद कर दिया। इस पर मीडिया कर्मियों ने हंगामा शुरू कर दिया। हंगामा बढ़ा तो कमरे का दरवाजा खोलकर सभी को बाहर निकाला गया। लेकिन मुख्यमंत्री के पास नहीं जाने दिया गया। मुख्यमंत्री के जिला अस्पताल में पहुंचने से पहले ही पुलिसकर्मियों ने तीमारदारों को भी सभी वार्डों से बाहर कर दिया था। पुलिस कर्मी सभी तीमारदारों को महिला अस्पताल की तरफ ले गए और एक जगह साइड में इकट्ठा कर लिया। तीमारदारों को लगा कि यहीं मुख्यमंत्री के सामने वह अपनी बात रख सकेंगे। लेकिन मुख्यमंत्री के आते ही चैनल बंद कर दिया गया। मीडिया को कमरे में बंद करने के मामले में डीएम का कहना है कि मीडिया कर्मियों को कमरे में बंद नहीं किया गया था। ज्यादा भीड़ होने की वजह से मुख्यमंत्री के निरीक्षण में दिक्कत आ रही थी। मरीजों को भी असुविधा हो रही थी। इसलिए सिर्फ रोका गया था।
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अफसर अस्पताल का सिर्फ अच्छा चेहरा ही मुख्यमंत्री के सामने आने देना चाहते थे। शायद यही वजह थी कि जब इमरजेंसी वार्ड का निरीक्षण करने के बाद मुख्यमंत्री महिला अस्पताल की तरफ बढ़े तो डीएम राकेश कुमार सिंह ने सीएम के साथ चल रहे मीडिया कर्मियों को यहीं रोक दिया। वह सभी मीडिया कर्मियों को इमरजेंसी के अंदर ले गए और बाहर से दरवाजा बंद कर दिया। इस पर मीडिया कर्मियों ने हंगामा शुरू कर दिया। हंगामा बढ़ा तो कमरे का दरवाजा खोलकर सभी को बाहर निकाला गया। लेकिन मुख्यमंत्री के पास नहीं जाने दिया गया। मुख्यमंत्री के जिला अस्पताल में पहुंचने से पहले ही पुलिसकर्मियों ने तीमारदारों को भी सभी वार्डों से बाहर कर दिया था। पुलिस कर्मी सभी तीमारदारों को महिला अस्पताल की तरफ ले गए और एक जगह साइड में इकट्ठा कर लिया। तीमारदारों को लगा कि यहीं मुख्यमंत्री के सामने वह अपनी बात रख सकेंगे। लेकिन मुख्यमंत्री के आते ही चैनल बंद कर दिया गया। मीडिया को कमरे में बंद करने के मामले में डीएम का कहना है कि मीडिया कर्मियों को कमरे में बंद नहीं किया गया था। ज्यादा भीड़ होने की वजह से मुख्यमंत्री के निरीक्षण में दिक्कत आ रही थी। मरीजों को भी असुविधा हो रही थी। इसलिए सिर्फ रोका गया था।
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