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शनिवार को भी नहीं मिली प्रदूषण से राहत, शहर की हवा सांस लेने लायक नहीं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरादाबाद
Updated Sun, 11 Nov 2018 01:58 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : PTI
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महानगर की हवा में शनिवार को भी खास सुधार नहीं हुआ। धूल, धुआं और जहरीली गैसों से विषाक्त हुई हवा सांस लेने लायक नहीं है। दोपहर को धूप खिलने पर थोड़ी राहत मिली, लेकिन सुबह-शाम हवा फिर से जानलेवा रूप में आ गई। फिलहाल हवा की स्थिति में जल्द सुधार की कोई उम्मीद नहीं है। महानगर में जगह-जगह जलाए जा रहे कबाड़ और पालीथिन के ढ़ेर हवा को और जहरीला बना रहे हैं।
दीपावली के पहले से ही महानगर की हवा में धूल-धुआं के कणों की भरमार थी और जहरीली गैस मानक से कई गुना ज्यादा हो गई थी। पटाखे चलने से हवा की गुणवत्ता और ज्यादा खराब हो गई। दो दिन बीतने पर शनिवार को भी इसमें खास सुधार नहीं हुआ। प्रदूषण जांच केंद्र की प्रभारी डा. अनामिका त्रिपाठी ने बताया कि अभी खुली हवा सीधे सांस लेने लायक नहीं है। इससे सांस नली और फेफड़ों की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। मास्क पहनकर या मुंह पर कपड़ा बांधकर ही घरों से बाहर निकले।
शहर में खुलेआम जलाए जा रहे कबाड़ और पालीथिन ने हवा में जहरीले रसायनों की मात्रा और बढ़ा दी है। यही कारण रहा कि शनिवार को एनओ-2 और एसओ-2 की मात्रा शुक्रवार के मुकाबले ज्यादा रही।
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महानगर में प्रदूषण का स्तर
एसपीएम-2.5 361
एसपीएम-10 246
एनओ-2 80
एनएच-3 13
एसओ-2 41
सीओ 121
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दीपावली के पहले से ही महानगर की हवा में धूल-धुआं के कणों की भरमार थी और जहरीली गैस मानक से कई गुना ज्यादा हो गई थी। पटाखे चलने से हवा की गुणवत्ता और ज्यादा खराब हो गई। दो दिन बीतने पर शनिवार को भी इसमें खास सुधार नहीं हुआ। प्रदूषण जांच केंद्र की प्रभारी डा. अनामिका त्रिपाठी ने बताया कि अभी खुली हवा सीधे सांस लेने लायक नहीं है। इससे सांस नली और फेफड़ों की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। मास्क पहनकर या मुंह पर कपड़ा बांधकर ही घरों से बाहर निकले।
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शहर में खुलेआम जलाए जा रहे कबाड़ और पालीथिन ने हवा में जहरीले रसायनों की मात्रा और बढ़ा दी है। यही कारण रहा कि शनिवार को एनओ-2 और एसओ-2 की मात्रा शुक्रवार के मुकाबले ज्यादा रही।
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महानगर में प्रदूषण का स्तर
एसपीएम-2.5 361
एसपीएम-10 246
एनओ-2 80
एनएच-3 13
एसओ-2 41
सीओ 121
एयर क्वालिटी इनडेक्स का स्तर व मानक
एक्यूआई 380
0 से 50 अच्छी
51 से 100 खतरनाक
101 से 150 सेहत को खतरा (सेंसेटिव ग्रुप)
151 से 200 सेहत को खतरा (आल ग्रुप)
201 से 300 स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक
300 से 500 सेहत व जिंदगी को खतरा- सांस लेने लायक नहीं।
‘शहर की हवा की गुणवत्ता अभी खराब है। लोगों को संभलकर रहने और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने की पहल में योगदान करने की जरूरत है। जिम्मेदार अफसरों को कबाड़ के जलने पर तत्काल रोक लगानी चाहिए। जरा सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। ’
- वीके राजपूत, पर्यावरण वैज्ञानिक- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
0 से 50 अच्छी
51 से 100 खतरनाक
101 से 150 सेहत को खतरा (सेंसेटिव ग्रुप)
151 से 200 सेहत को खतरा (आल ग्रुप)
201 से 300 स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक
300 से 500 सेहत व जिंदगी को खतरा- सांस लेने लायक नहीं।
‘शहर की हवा की गुणवत्ता अभी खराब है। लोगों को संभलकर रहने और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने की पहल में योगदान करने की जरूरत है। जिम्मेदार अफसरों को कबाड़ के जलने पर तत्काल रोक लगानी चाहिए। जरा सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। ’
- वीके राजपूत, पर्यावरण वैज्ञानिक- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।