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उतम क्षमा के रूप में मनाया पर्यूषण पर्व
Updated Sat, 15 Sep 2018 01:20 AM IST
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बिलारी। नगर के मोहल्ला अब्दुल्ला स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में शुक्रवार की सुबह से जैन समाज का पर्यूषण पर्व शुरू हो गया। पर्व का पहला दिन उत्तम क्षमा के रूप में मनाया गया।
सुबह के समय बड़ी संख्या में जैन समाज के महिलाएं और पुरुष जैन मंदिर में इकट्ठा हुए। सबसे पहले प्रासुक जल से श्री पार्श्वनाथ भगवान और वेदी में विराजमान सभी प्रतिमाओं का अभिषेक हुआ। बाद में प्रासुक जल से श्री शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा की शांतिधारा की गई। उसके बाद देव, गुरू, शास्त्र, पार्श्वनाथ भगवान, चौबीसी भगवान आदि की सामूहिक पूजा की गई।
इस अवसर पर रिटायर्ड शिक्षिका विमला जैन ने पर्यूषण पर्व का महत्व बताते हुए कहा कि संसार में प्राणी को दूध और पानी के समान घुल मिलकर सदैव प्रेम से रहना चाहिए। कभी भी हृदय के आंगन में क्रोध की अग्नि नहीं जलने देनी चाहिए क्योंकि क्रोध महादुखदायी है। उन्होंने कहा कि कमठ का जीव पार्श्वनाथ पर क्रोध करने के कारण नरक का दुख सप्त करता है और क्षमा को धारण कर पार्श्वनाथ अपने भवदुख को समाप्त करते हैं अत: क्रोध को छोड़कर क्षमा को धारण करना चाहिए। कार्यक्रम में राकेश जैन, कौशल जैन, संजय जैन आदि मौजूद रहे।
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सुबह के समय बड़ी संख्या में जैन समाज के महिलाएं और पुरुष जैन मंदिर में इकट्ठा हुए। सबसे पहले प्रासुक जल से श्री पार्श्वनाथ भगवान और वेदी में विराजमान सभी प्रतिमाओं का अभिषेक हुआ। बाद में प्रासुक जल से श्री शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा की शांतिधारा की गई। उसके बाद देव, गुरू, शास्त्र, पार्श्वनाथ भगवान, चौबीसी भगवान आदि की सामूहिक पूजा की गई।
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इस अवसर पर रिटायर्ड शिक्षिका विमला जैन ने पर्यूषण पर्व का महत्व बताते हुए कहा कि संसार में प्राणी को दूध और पानी के समान घुल मिलकर सदैव प्रेम से रहना चाहिए। कभी भी हृदय के आंगन में क्रोध की अग्नि नहीं जलने देनी चाहिए क्योंकि क्रोध महादुखदायी है। उन्होंने कहा कि कमठ का जीव पार्श्वनाथ पर क्रोध करने के कारण नरक का दुख सप्त करता है और क्षमा को धारण कर पार्श्वनाथ अपने भवदुख को समाप्त करते हैं अत: क्रोध को छोड़कर क्षमा को धारण करना चाहिए। कार्यक्रम में राकेश जैन, कौशल जैन, संजय जैन आदि मौजूद रहे।
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