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आधुनिक नवयुवतियों का इस्तेमाल कर होता था यह धंधा
लखनऊ/ब्यूरो
Updated Thu, 01 Aug 2013 12:37 AM IST
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नेपाल सीमा पर नवयुवतियों को जाली नोटों के धंधे से जोड़कर उन्हें बतौर कूरियर इस्तेमाल किया जाता था। इन युवतियों के जरिए ट्रेनों और बसों के अलावा विभिन्न बाजारों व अन्य जगहों पर नोटों की खेप पहुंचाई जाती थी।
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आतंकियों के सहयोगी और जाली नोटों के बड़े कारोबारी इमरान तेली से पूछताछ में एटीएस को इसके अलावा अपने धंधे से जुड़े कई और राज बताए हैं। पूछताछ में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि इमरान ने मुंबई में जाली नोटों की कई खेप पहुंचाई है।
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इमरान से पूछताछ करने के लिए डीआरआई (केंद्रीय राजस्व अभिसूचना निदेशालय) के अलावा आईबी व रॉ की के सदस्यों ने भी उससे पूछताछ की।
एटीएस के अधिकारियों के मुताबिक इमरान ने बताया है कि उसे जाली मुद्रा की सप्लाई पाकिस्तान में इकबाल काना और उससे जुड़े परवेज व अरशद नाम के लोगों से होती थी।
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परवेज व अरशद के उत्तर प्रदेश से भी कनेक्शन सामने आ रहे हैं, जिसके बारे में एटीएस जानकारी जुटा रही है। जाली नोटों के कारोबार से जुड़े कई और लोगों की जानकारी इमरान ने एटीएस अधिकारियों को दी है।
एटीएस अफसरों के मुताबिक इमरान ने जानकारी दी है कि कूरियर के काम में आधुनिक पहनावे वाली शिक्षित युवतियों को इस्तेमाल में लाया जाता था। कोशिश यह होती थी कि कूरियर का काम करने वाली युवती अंग्रेजी भाषा का फर्राटे से प्रयोग कर सके।
रकम की अधिकता को देखते हुए युवतियों की संख्या बढ़ा दी जाती थी और कई बार दो से अधिक युवतियों को समूह बनाकर नोटों की खेप पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
इमरान ने इस बात की भी जानकारी दी है कि वह नेपाल स्थित पाक दूतावास के कुछ लोगों से लगातार जुड़ा हुआ था। एटीएस के सूत्रों का कहना है कि नेपाल में पाकिस्तान के दूतावास में मसूद की भूमिका आईएसआई अधिकारी होने के तौर पर सामने आई है।
मसूद से पहले अरशद चीमा भी आईएसआई का अधिकारी होने के साथ ही यहां दूतावास में रह कर जाली नोटों के भारत में होने वाले कारोबार पर नियंत्रण रखता था। चीमा को काठमांडू में नेपाल पुलिस ने 23 सितंबर 2003 में 16 किलोग्राम आरडीएक्स के साथ दबोचा था।
नेपाल में जाली मुद्रा का कारोबार बंद था
जाली भारतीय मुद्रा का बाजार में अधिक प्रचलन होने पर कुछ अरसा पहले नेपाल में भारतीय मुद्रा के पांच सौ व एक हजार के नोटों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके बाद से ही वहां जाली नोटों के कारोबार में खासी कमी आ गई।
इमरान ने एटीएस को बताया है कि सौ-सौ के जाली नोटों की सप्लाई में अधिक लाभ न होने की वजह से नेपाल में जाली नोटों का कारोबार लगभग बंद हो गया था। इसी वजह से उसने पिछले एक अरसे से भारत में जाली मुद्रा की खेप पहुंचाने के लिए नेपाल रूट का इस्तेमाल बंद कर दिया था।