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विंध्य धाम में दर्शन के लिए उमड़े
ब्यूरो/ अमर उजाला/ मिर्जापुर
Updated Sat, 12 Nov 2016 12:44 AM IST
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मां विंध्याचल
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देवोत्थान एकादशी पर विंध्य दरबार में मां विंध्यवासिनी के भव्य स्वरूप का दर्शन पूजन करने को श्रद्घालुओं का तांता लगा रहा। घंटा-घड़ियाल, शंख एवं पहाड़ावाली मईया के जयकारे से पूरा परिसर गुंजायमान हो रहा था। दर्शन-पूजन करने के पूर्व भक्तों ने गंगा घाटों पर स्नान करने वालों का रेला लगा रहा। पर्व पर मंदिर की तरह-तरह के पुष्पों व जलते दीपों सहित झालर, चुनरी व गुब्बारे से की गई सजावट अलौकिक छटा बिखेर रही थी।
प्रबोधिनी एकादशी पर्व पर आदिशक्ति जगत जननी मां विंध्यवासिनी के पावन धाम में दर्शन-पूजन करने के लिए सुबह से देर रात तक भक्तों का रेला लगा रहा। विंध्याचल के गंगा घाटों पर स्नान-ध्यान करने के बाद विंध्य दरबार पहुंचे आस्थावानों ने श्रद्घाभाव से मां का दर्शन-पूजन कर सुख-समृद्घि की कामना की। भोर में मां की मंगला आरती के उपरांत शुरू हुआ दर्शन-पूजन करने का दौर देर रात तक अनवरत चलता रहा। क्या छोटे और क्या बड़े सभी भक्तजन मां विंध्यवासिनी की भक्ति में तल्लीन दिखाई दिए। गुड़हल, कमल, गुलाब के पुष्पों से मां का किया गया भव्य श्रृंगार का दर्शन पाकर भक्त निहाल हो उठे।
विंध्यधाम परिसर में विराजमान सभी देवी-देवताओं के मंदिरों में भी दर्शन-पूजन का दौर अनवरत चलता रहा। मंदिर की सीढ़ियों, रेलिंग व छत पर जलते दीपों की श्रृंखला एवं मंदिर के घंटा, गुंबद की तरह-तरह के पुष्पों, चुनरी, गुब्बारों सहित झालरों से की गई आकर्षक सजावट की छटा देखते ही बन रही थी। मां का दर्शन-पूजन करने के बाद बड़ी संख्या में भक्तों ने त्रिकोण परिक्रमा कर पुण्य के भागी बने।
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मंदिर में उमड़ी श्रद्घालुओं की भीड़ के चलते सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। विंध्याचल के पक्काघाट, दीवानघाट एवं अखाड़ाघाट पर दैनिक मां गंगा आरती पूजन समिति एवं मोक्षदायिनी मां गंगा सेवा समिति एवं कल्याणकारी मां गंगा सेवा समिति की ओर से विधिवत पूजन अर्चन व भव्य आरती की गई।
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प्रबोधिनी एकादशी पर्व पर आदिशक्ति जगत जननी मां विंध्यवासिनी के पावन धाम में दर्शन-पूजन करने के लिए सुबह से देर रात तक भक्तों का रेला लगा रहा। विंध्याचल के गंगा घाटों पर स्नान-ध्यान करने के बाद विंध्य दरबार पहुंचे आस्थावानों ने श्रद्घाभाव से मां का दर्शन-पूजन कर सुख-समृद्घि की कामना की। भोर में मां की मंगला आरती के उपरांत शुरू हुआ दर्शन-पूजन करने का दौर देर रात तक अनवरत चलता रहा। क्या छोटे और क्या बड़े सभी भक्तजन मां विंध्यवासिनी की भक्ति में तल्लीन दिखाई दिए। गुड़हल, कमल, गुलाब के पुष्पों से मां का किया गया भव्य श्रृंगार का दर्शन पाकर भक्त निहाल हो उठे।
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विंध्यधाम परिसर में विराजमान सभी देवी-देवताओं के मंदिरों में भी दर्शन-पूजन का दौर अनवरत चलता रहा। मंदिर की सीढ़ियों, रेलिंग व छत पर जलते दीपों की श्रृंखला एवं मंदिर के घंटा, गुंबद की तरह-तरह के पुष्पों, चुनरी, गुब्बारों सहित झालरों से की गई आकर्षक सजावट की छटा देखते ही बन रही थी। मां का दर्शन-पूजन करने के बाद बड़ी संख्या में भक्तों ने त्रिकोण परिक्रमा कर पुण्य के भागी बने।
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मंदिर में उमड़ी श्रद्घालुओं की भीड़ के चलते सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। विंध्याचल के पक्काघाट, दीवानघाट एवं अखाड़ाघाट पर दैनिक मां गंगा आरती पूजन समिति एवं मोक्षदायिनी मां गंगा सेवा समिति एवं कल्याणकारी मां गंगा सेवा समिति की ओर से विधिवत पूजन अर्चन व भव्य आरती की गई।