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सीएमओ का किया घेराव, हंगामा
ब्यूरो/अमर उजाला/ मिर्जापुर
Updated Fri, 19 Feb 2016 12:31 AM IST
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उत्तर प्रदेश सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता आशा संघ के तत्वावधान में आशाओं ने गुरुवार को आठ सूत्री मांगें पूरी न होने पर जमकर हंगामा किया।
सीएमओ का घेराव करते हुए आशाएं जिला मुख्यालय पहुंची और वहां मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी तथा सीएमओ मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए धरना प्रदर्शन किया। कहा कि उनकी मांग पूरी नहीं की गई तो समस्त आशाएं कार्य बहिष्कार करने को बाध्य हो जाएंगी।
राज्य कर्मचारी संघ एवं आशा संघ के तत्वावधान में जनपद के समस्त पीएचसी, सीएचसी, नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से संबंधित लगभग हजारों आशाएं उत्पीड़न, शोषण एवं मानसिक दबाव के विरोध में मोर्चा खोलते हुए गुरुवार को मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय पहुंची।
जिलाध्यक्ष माहताब बेगम ने कहा कि महिला चिकित्सालय में 11 महिला डाक्टर हैं फिर भी पुरुष डाक्टर संजय पांडेय महिलाओं की डिलेवरी कराते हैं।
अगर पुरुष डाक्टर ही महिलाओं की डिलेवरी कराने के लिए रखे जा रहे हैं तो वहां की सारी महिला डाक्टरों को हटाकर पुरुष डाक्टर रखे जाएं। बताया कि पुरुष डाक्टर द्वारा डिलवेरी कराने पर महिलाएं चिकित्सालय में नहीं जा रही हैं, इसलिए इसे तत्काल बंद किया जाए।
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बताया कि लगभग दस वर्ष से आशाओं को मानदेय नहीं मिला है। एक डिलवेरी कराने पर उन्हें 300 रुपया दिया जाता है जिसमें डेढ़ सौ रुपया डाक्टर व कर्मचारी कमीशन ले लेते हैं। इससे उनको कुछ नहीं बचता है। उन्होंने तत्काल कमीशनखोरी को बंद कर आशाओं को दस हजार रुपये प्रतिमाह वेतन देने की मांग की।
आशाओं का प्रमोशन कर उन्हें एएनएम बनाते हुए राज्य कर्मचारी का दर्जा दिलाने को कहा। आशा बहुओं एवं आशा संगिनी को चिकित्सालयों में एक कमरा देने की मांग की। जिससे वह सुचारु रूप से कार्य कर सकें।
पीएचसी में जो सुविधा मांगी जाती है उसे तत्काल बंद किया जाए। आशा वं संगिनी जो दूरदराज से पीड़ित महिलाओं एवं गर्भवती महिलाएं सीजर कराने एवं नसबंदी कराने के लिए वह लोग ले आती हैं तो उसे डाक्टर अपने नाम कर लेते हैं। जिसे तत्काल बंद किया जाए। आशा कार्यकर्ताओं ने आशाओं का दस लाख का बीमा कराने की मांग की।
गांव तथा दूर अंचलों में जो हैं उन्हें यातायात भत्ता दिया जाए। धरना प्रदर्शन के दौरान कर्मचारी संघ के अध्यक्ष मोहन लाल यादव, पूनम सिंह, ज्ञान शीला, विद्या सिंह, आशा सिंह, कुसुम, गीता, निशा सिंह, आरती, उर्मिला चौबे, गीता सिंह आदि मौजूद रहीं।
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सीएमओ का घेराव करते हुए आशाएं जिला मुख्यालय पहुंची और वहां मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी तथा सीएमओ मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए धरना प्रदर्शन किया। कहा कि उनकी मांग पूरी नहीं की गई तो समस्त आशाएं कार्य बहिष्कार करने को बाध्य हो जाएंगी।
राज्य कर्मचारी संघ एवं आशा संघ के तत्वावधान में जनपद के समस्त पीएचसी, सीएचसी, नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से संबंधित लगभग हजारों आशाएं उत्पीड़न, शोषण एवं मानसिक दबाव के विरोध में मोर्चा खोलते हुए गुरुवार को मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय पहुंची।
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जिलाध्यक्ष माहताब बेगम ने कहा कि महिला चिकित्सालय में 11 महिला डाक्टर हैं फिर भी पुरुष डाक्टर संजय पांडेय महिलाओं की डिलेवरी कराते हैं।
अगर पुरुष डाक्टर ही महिलाओं की डिलेवरी कराने के लिए रखे जा रहे हैं तो वहां की सारी महिला डाक्टरों को हटाकर पुरुष डाक्टर रखे जाएं। बताया कि पुरुष डाक्टर द्वारा डिलवेरी कराने पर महिलाएं चिकित्सालय में नहीं जा रही हैं, इसलिए इसे तत्काल बंद किया जाए।
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बताया कि लगभग दस वर्ष से आशाओं को मानदेय नहीं मिला है। एक डिलवेरी कराने पर उन्हें 300 रुपया दिया जाता है जिसमें डेढ़ सौ रुपया डाक्टर व कर्मचारी कमीशन ले लेते हैं। इससे उनको कुछ नहीं बचता है। उन्होंने तत्काल कमीशनखोरी को बंद कर आशाओं को दस हजार रुपये प्रतिमाह वेतन देने की मांग की।
आशाओं का प्रमोशन कर उन्हें एएनएम बनाते हुए राज्य कर्मचारी का दर्जा दिलाने को कहा। आशा बहुओं एवं आशा संगिनी को चिकित्सालयों में एक कमरा देने की मांग की। जिससे वह सुचारु रूप से कार्य कर सकें।
पीएचसी में जो सुविधा मांगी जाती है उसे तत्काल बंद किया जाए। आशा वं संगिनी जो दूरदराज से पीड़ित महिलाओं एवं गर्भवती महिलाएं सीजर कराने एवं नसबंदी कराने के लिए वह लोग ले आती हैं तो उसे डाक्टर अपने नाम कर लेते हैं। जिसे तत्काल बंद किया जाए। आशा कार्यकर्ताओं ने आशाओं का दस लाख का बीमा कराने की मांग की।
गांव तथा दूर अंचलों में जो हैं उन्हें यातायात भत्ता दिया जाए। धरना प्रदर्शन के दौरान कर्मचारी संघ के अध्यक्ष मोहन लाल यादव, पूनम सिंह, ज्ञान शीला, विद्या सिंह, आशा सिंह, कुसुम, गीता, निशा सिंह, आरती, उर्मिला चौबे, गीता सिंह आदि मौजूद रहीं।