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Mirzapur News: अब प्रशासक के रूप में काम करेंगे प्रधान, प्रतिनिधियों ने किया स्वागत
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मिर्जापुर। जनपद की ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो गया। राज्य सरकार के निर्देश पर अब निवर्तमान ग्राम प्रधान ही प्रशासक के रूप में ग्राम पंचायतों का कार्यभार संभालेंगे। यह नई व्यवस्था बुधवार 27 मई से लागू होगी।
नई व्यवस्था का ग्राम प्रधानों ने स्वागत किया है। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश सरकार ने यह निर्णय लिया है कि नई ग्राम पंचायतों के गठन तक वर्तमान प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया जाएगा। इसके लिए डीएम को अधिकृत किया गया है। जिला पंचायत राज अधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि प्रशासक के रूप में कार्य करते हुए प्रधान केवल सामान्य और नियमित कार्यों का ही संचालन कर सकेंगे। किसी भी प्रकार के नीतिगत निर्णय लेने की अनुमति नहीं होगी।
उन्होंने बताया कि यदि किसी विशेष परिस्थिति में नीतिगत निर्णय लेना आवश्यक हो, तो प्रस्ताव जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी को भेजा जाएगा।
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जिलाधिकारी की स्वीकृति मिलने के बाद ही उस पर निर्णय लिया जा सकेगा। सरकार के निर्देशानुसार निवर्तमान प्रधान अधिकतम छह माह या नई पंचायतों के गठन तक प्रशासक के रूप में कार्य करेंगे।
गौरतलब है कि ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष का निर्धारित होता है। कार्यकाल समाप्त होने के बाद नई पंचायतों के गठन तक राज्य सरकार को प्रशासक नियुक्त करने का अधिकार होता है।
इधर, पंचायत चुनाव समय से न होने और कार्यकाल बढ़ाने की मांग को लेकर जिले में ग्राम प्रधान संगठन लगातार सक्रिय रहा। कई विकास खंडों में प्रधानों ने ब्लॉक मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन भी किया था।
सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए उत्तर प्रदेश पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन सिटी ब्लॉक अध्यक्ष जवाहरलाल मौर्य, प्रधान प्रतिनिधि सुजीत कुमार सिंह, हिरन सोनकर , पूनम प्रजापति आशा मौर्य, सविता सिंह दीपक बिंद, अवधश नारायण विश्वकर्मा, राकेश बिंद आदि प्रधान समेत अन्य प्रधानों ने इसे सकारात्मक फैसला बताया है।
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नई व्यवस्था का ग्राम प्रधानों ने स्वागत किया है। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश सरकार ने यह निर्णय लिया है कि नई ग्राम पंचायतों के गठन तक वर्तमान प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया जाएगा। इसके लिए डीएम को अधिकृत किया गया है। जिला पंचायत राज अधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि प्रशासक के रूप में कार्य करते हुए प्रधान केवल सामान्य और नियमित कार्यों का ही संचालन कर सकेंगे। किसी भी प्रकार के नीतिगत निर्णय लेने की अनुमति नहीं होगी।
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उन्होंने बताया कि यदि किसी विशेष परिस्थिति में नीतिगत निर्णय लेना आवश्यक हो, तो प्रस्ताव जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी को भेजा जाएगा।
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जिलाधिकारी की स्वीकृति मिलने के बाद ही उस पर निर्णय लिया जा सकेगा। सरकार के निर्देशानुसार निवर्तमान प्रधान अधिकतम छह माह या नई पंचायतों के गठन तक प्रशासक के रूप में कार्य करेंगे।
गौरतलब है कि ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष का निर्धारित होता है। कार्यकाल समाप्त होने के बाद नई पंचायतों के गठन तक राज्य सरकार को प्रशासक नियुक्त करने का अधिकार होता है।
इधर, पंचायत चुनाव समय से न होने और कार्यकाल बढ़ाने की मांग को लेकर जिले में ग्राम प्रधान संगठन लगातार सक्रिय रहा। कई विकास खंडों में प्रधानों ने ब्लॉक मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन भी किया था।
सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए उत्तर प्रदेश पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन सिटी ब्लॉक अध्यक्ष जवाहरलाल मौर्य, प्रधान प्रतिनिधि सुजीत कुमार सिंह, हिरन सोनकर , पूनम प्रजापति आशा मौर्य, सविता सिंह दीपक बिंद, अवधश नारायण विश्वकर्मा, राकेश बिंद आदि प्रधान समेत अन्य प्रधानों ने इसे सकारात्मक फैसला बताया है।