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न्याय के लिए हाईकोर्ट जाएंगे
ब्यूरो, अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Wed, 10 Aug 2016 12:54 AM IST
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कोर्ट
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डा. डीडी त्रिपाठी हत्याकांड में निचली अदालत के फैसले को उनके पुत्र नीरज त्रिपाठी उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे। इस मामले में ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्रा तथा उनके भाई को अदालत ने सोमवार को बरी कर दिया था। नीरज का कहना है कि अपने पिता के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए वे जहां तक लड़ना होगा लड़ेंगे। वह चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की भी मांग की है।
विजयपुर कोठी में मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 36 वर्ष पूर्व 25 मई 1980 को हुए डा. डीडी त्रिपाठी हत्याकांड के आरोपी व ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्रा तथा उनके भाई जीत नारायण मिश्रा को सोमवार के दिन संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। इस फैसले से उनके परिवार के लोग मायूस हैं। आरोपियों ने इस मुकदमें को लंबे समय तक उलझाए रखा ताकि कोई गवाह न बचे।
इसका उनको फायदा मिला है। विरोधियों ने मुुकदमे की फाइल गुम करा दी थी। हाईकोर्ट के कड़े रुख के चलते फाइल आठ साल बाद बरामद हुई। उच्च न्यायालय ने फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करके मामले की सुनवाई तेज कराई। मगर तब तक ज्यादातर गवाहों की मौत हो चुकी थी। अब वे इस मामले में न्याय के लिए हाईकोर्ट में अपील करेंगे और अधिक मजबूत तर्क रखेंगे। उन्होंने कहा कि इस मामले के आरोपी विधायक विजय मिश्र के खिलाफ 65 मुकदमे दर्ज हैं। उनसे उनकी जान को खतरा भी हो सकता है।
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विजयपुर कोठी में मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 36 वर्ष पूर्व 25 मई 1980 को हुए डा. डीडी त्रिपाठी हत्याकांड के आरोपी व ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्रा तथा उनके भाई जीत नारायण मिश्रा को सोमवार के दिन संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। इस फैसले से उनके परिवार के लोग मायूस हैं। आरोपियों ने इस मुकदमें को लंबे समय तक उलझाए रखा ताकि कोई गवाह न बचे।
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इसका उनको फायदा मिला है। विरोधियों ने मुुकदमे की फाइल गुम करा दी थी। हाईकोर्ट के कड़े रुख के चलते फाइल आठ साल बाद बरामद हुई। उच्च न्यायालय ने फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करके मामले की सुनवाई तेज कराई। मगर तब तक ज्यादातर गवाहों की मौत हो चुकी थी। अब वे इस मामले में न्याय के लिए हाईकोर्ट में अपील करेंगे और अधिक मजबूत तर्क रखेंगे। उन्होंने कहा कि इस मामले के आरोपी विधायक विजय मिश्र के खिलाफ 65 मुकदमे दर्ज हैं। उनसे उनकी जान को खतरा भी हो सकता है।
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