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नींद में बिजली का झटका

Thu, 22 Sep 2016 12:35 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, मिर्जापुर
ब्यूरो, अमर उजाला, मिर्जापुर Updated Thu, 22 Sep 2016 12:35 AM IST
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Sleep electric shock
बिजली - फोटो : amar ujala
उमस बढ़ी हुई है और मच्छरों का प्रकोप भी। इसके बावजूद शहर में आधी रात को ही बिजली झटका दे रही है। शाम को ट्रिपिंग का दौर चलता है और जैसे ही लोग सोते हैं। आधी रात को बिजली कच्ची नींद में उठा देती है। लगातार अनिद्रा के चलते लोगों की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है। बिजली कटते ही मच्छर भी अपना जोर दिखाने लगते हैं। ग्रामीण इलाकों में तो हाल बदतर हैं।
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शहर में 20 घंटे की विद्युत आपूर्ति का शेड्यूल है। मगर आपूर्ति की हकीकत कुछ और ही है। बमुश्किल से लोगों को 12 घंटे बिजली मिल पा रही है और वह भी टुकड़ों में। कटौती कब होगी और बिजली कब आएगी कोई नहीं जानता। इस अनिश्चय के चलते कोई सोने-जागने या बिजली से जुड़े काम करने की कार्ययोजना तैयार नहीं कर पा रहा है। सुबह होते ही बिजली की कटौती शुरू हो जाती है। दस बजते बजते तीन बार बिजली आ-जा चुकी होती है। इसके बाद दोपहर 12 से तीन बजे कटौती होती है। शाम को तो बिजली कितनी बार आएगी और जाएगी यह कोई नहीं जानता।
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रात 10 बजे के करीब कटौती ह ोजाती है और आधी रात के बाद आती है। भोेर में तीन बजे होने वाली कटौती लोगों को फिर से उठा देती है। इस तरह की मनमानी कटौती से लोग त्रस्त हैं। न दिन में आराम मिल रहा है और न रात में। बुधवार को तो दिन भर बिजली गुल रही। शाम को आपूर्ति बहाल होने के बाद भी मरम्मत के लिए कर्मचारी शट डाउन लेते रहे। देर रात जाकर आपूर्ति सामान्य हुई। कुछ मुहल्लों में तो उसके बाद भी बिजली नहीं आई।
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अघोषित बिजली कटौती से लोग परेशान हैं। अधिकांश विद्यालयों में अर्ध वार्षिक परीक्षाएं शुरू हो गई हैं और बिजली की आवाजाही पढ़ाई में खलल डाल रही है। रोजी-रोजगार पर भी इसका असर पड़ा है। अधिशासी अभियंता नगर दूधनाथ राम भी मानते हैं कि छह घंटे की कटौती की बात मानते हैं। उनका कहना है कि चार घंटे की रोस्टरिंग के अलावा लोकल फाल्ट और मरम्मत के चलते दो घंटे की औसत कटौती हो रही है। लोगों को 18 घंटे आपूर्ति मिल रही है।

सबसे खराब हालत ग्रामीण इलाकों की है, जहां ट्रांसफार्मर जलने के बाद 72 घंटे तो क्या हफ्तों नहीं बदला जा रहा है। आपूर्ति कीस्थिति यह है कि बमुश्किल से लोगों को 10 से 12 घंटे ही बिजली मिल रही है। उसका भी कोई तय समय नहीं है। इस पर लोगों ने नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि जानबूझ कर कर्मचारी फाल्ट दुरुस्त करने में देर करते हैं।
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