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घूस लेते अस्पताल के वरिष्ठ लिपिक धराया
अमर उजाला ब्यूरो मिर्जापुर।
Updated Thu, 05 Nov 2015 12:14 AM IST
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विजिलेंस की टीम ने बुधवार को जिला चिकित्सालय में तैनात वरिष्ठ लिपिक को सेवानिवृत वाहन चालक से पांच हजार रुपया रिश्वत लेने के आरोप में बुधवार की दोपहर एक बजे गिरफ़्तार कर लिया। वरिष्ठ लिपिक पर आरोप है कि चिकित्सालय में तैनात रहे सेवानिवृत वाहन चालक के पेंशन पास कराने के लिए पांच हजार मांगा था। आरोपी के विरुद्घ टीम ने शहर कोतवाली में विभिन्न धाराओं में मुकदमा पंजीकृत करा कर जेल भेज दिया।
शहर कोतवाली क्षेत्र के बह्मचारी कुंआ निवासी मोहनलाल यादव जिला चिकित्सालय में एंबुलेंस चालक के पद पर तैनात थे। 30 जुलाई 2015 को वह सेवानिवृत हो गए। रिटायर होने के बाद पेंशन पाने के लिए प्रक्रिया पूरी कराने में जुट गए। फाइल तैयार होने के बाद उसे पास कराने के लिए विभाग में तैनात वरिष्ठ लिपिक राजकुमार उपाध्याय से कहा तो उसने दस हजार रुपये रिश्वत की मांग की। वरिष्ठ लिपिक ने कहा कि बगैर पैसा दिए फाइल आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। बार बार चालक द्वारा गुहार लगाए जाने के बावजूद लिपिक नहीं माना।
कहा कि दस की बजाय पांच हजार दे सकते हैं लेकिन बगैर पैसा के उसका काम नहीं होगा। इससे क्षुब्ध हुए चालक ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन वाराणसी में विरिष्ठ लिपिक की शिकायत की। जिसे गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों ने विजिलेंस के इंस्पेक्टर प्रेमशंकर दूबे के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम गठित कर आरोपी को दबोचने का निर्देश दिया। बुधवार की दोपहर इंस्पेक्टर प्रेमशंकर दूबे, इंस्पेक्टर सरोज पांडेय, उपनिरीक्षक जीवी जोशी, ओम प्रकाश यादव समेत अन्य कर्मचारियों के साथ जिला चिकित्सालय पहुंचे।
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चालक मोहनलाल को केमिकल लगा पांच हजार रुपया लिपिक को देने के लिए दिया। पैसा मिलने के बाद चालक वरिष्ठ लिपिक के कमरे में पहुंचे और जैसे ही उसके साथ में दिया कि टीम पहुंच गई और उसे दबोच लिया। दोनों का हाथ धुलवाया तो उनके हाथ केमिकल लगने के कारण लाल हो गए। इसके बाद विरिष्ठ लिपिक को गिरफ्तार कर ले जाने लगी तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने उसे छुड़ाने का प्रयास करते हुए टीम से नोकझोंक शुरु कर दी। स्थिति बिगड़ते देख टीम ने शहर कोतवाली पुलिस को तत्काल फोन कर बुलाया। मौके पर पहुंची पुलिस की सहायता से लिपिक को कोतवाली लाया गया। जहां भ्रष्टाचार अधिनियम समेत अन्य धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर जेल भेजा गया।
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शहर कोतवाली क्षेत्र के बह्मचारी कुंआ निवासी मोहनलाल यादव जिला चिकित्सालय में एंबुलेंस चालक के पद पर तैनात थे। 30 जुलाई 2015 को वह सेवानिवृत हो गए। रिटायर होने के बाद पेंशन पाने के लिए प्रक्रिया पूरी कराने में जुट गए। फाइल तैयार होने के बाद उसे पास कराने के लिए विभाग में तैनात वरिष्ठ लिपिक राजकुमार उपाध्याय से कहा तो उसने दस हजार रुपये रिश्वत की मांग की। वरिष्ठ लिपिक ने कहा कि बगैर पैसा दिए फाइल आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। बार बार चालक द्वारा गुहार लगाए जाने के बावजूद लिपिक नहीं माना।
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कहा कि दस की बजाय पांच हजार दे सकते हैं लेकिन बगैर पैसा के उसका काम नहीं होगा। इससे क्षुब्ध हुए चालक ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन वाराणसी में विरिष्ठ लिपिक की शिकायत की। जिसे गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों ने विजिलेंस के इंस्पेक्टर प्रेमशंकर दूबे के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम गठित कर आरोपी को दबोचने का निर्देश दिया। बुधवार की दोपहर इंस्पेक्टर प्रेमशंकर दूबे, इंस्पेक्टर सरोज पांडेय, उपनिरीक्षक जीवी जोशी, ओम प्रकाश यादव समेत अन्य कर्मचारियों के साथ जिला चिकित्सालय पहुंचे।
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चालक मोहनलाल को केमिकल लगा पांच हजार रुपया लिपिक को देने के लिए दिया। पैसा मिलने के बाद चालक वरिष्ठ लिपिक के कमरे में पहुंचे और जैसे ही उसके साथ में दिया कि टीम पहुंच गई और उसे दबोच लिया। दोनों का हाथ धुलवाया तो उनके हाथ केमिकल लगने के कारण लाल हो गए। इसके बाद विरिष्ठ लिपिक को गिरफ्तार कर ले जाने लगी तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने उसे छुड़ाने का प्रयास करते हुए टीम से नोकझोंक शुरु कर दी। स्थिति बिगड़ते देख टीम ने शहर कोतवाली पुलिस को तत्काल फोन कर बुलाया। मौके पर पहुंची पुलिस की सहायता से लिपिक को कोतवाली लाया गया। जहां भ्रष्टाचार अधिनियम समेत अन्य धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर जेल भेजा गया।