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राज्य कर्मचारी बनाने को भरी हुंकार
अमर उजाला ब्यूरो मिर्जापुर।
Updated Fri, 14 Aug 2015 12:46 AM IST
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राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग को लेकर पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ के सदस्यों ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार के विरोध में जमकर नारेबाजी की। नगर मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपने के बाद प्रदर्शनकारी लौट गए।
उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ के सदस्य गुरुवार को सुबह 10 बजे सिटी क्लब पहुंच गए। यहां सभी ने एक दूसरे के हाथों पर काली पट्टी बांधी और जुलूस निकाल कर रमई पट्टी तिराहा होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। रास्ते भर प्रदर्शनकारी राज्य सरकार की वादाखिलाफी के विरोध में नारेबाजी करते रहे। कलेक्ट्रेट के समक्ष समाजवादी पार्टी के कार्यालय के समक्ष रुक कर सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारियों ने अपना विरोध प्रदर्शित किया। कलेक्ट्रेट पहुंच कर प्रदर्शनकारियों ने सभा की। सभा में वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश की ग्राम पंचायतों में लगभग 40 हजार ग्राम पंचायतों में नौ वर्षों से ग्राम रोजगार सेवक प्रशासनिक सहायक के रूप में संविदा पर कार्यरत हैँं। मनरेगा योजना के तहत चयनित ग्राम रोजगार सेवकों के संबंध में केंद्र सरकार द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि इनके ऊपर सरकारों का पूर्ण नियंत्रण होगा और वह राज्य कर्मचारी कहे जाएंगे।
इससे स्पष्ट है कि राज्य सरकारें अपने संसाधनों से पूर्णकालिक कर्मचारी बना सकती हैं, लेकिन राज्य सरकारें ऐसा नहीं कर रही हैं। वक्ताओं ने कहा कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने पिछले विधानसभा चुनाव में रोजगार सेवकों को विनियमितिकरण करने का आश्वासन दिया था लेकिन विनयमितिकरण नहीं किया गया। ग्राम रोजगार सेवकों ने ग्राम पंचायत अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारी की भर्ती पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा कर पहले रोजगार सेवकों को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिलाने की मांग की। कहा कि ग्राम पंचायतों द्वारा फर्जी प्रस्ताव के आधार पर अपने पदों से हटाये गए ग्राम रोजगार सेवकों को पुन: उसके पद पर बहाल करके योगदान लिया जाय। प्रदर्शन करने वालों में सर्वेश दूबे, संजय सोनकर, जयशंकर, अनुपम, पूनम पटेल, अनीता गुप्ता, अनीता सिंह, सीमा जायसवाल, दीपक सिंह, सुनील यादव, राकेश सरोज आदि
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शामिल रहे।
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उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ के सदस्य गुरुवार को सुबह 10 बजे सिटी क्लब पहुंच गए। यहां सभी ने एक दूसरे के हाथों पर काली पट्टी बांधी और जुलूस निकाल कर रमई पट्टी तिराहा होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। रास्ते भर प्रदर्शनकारी राज्य सरकार की वादाखिलाफी के विरोध में नारेबाजी करते रहे। कलेक्ट्रेट के समक्ष समाजवादी पार्टी के कार्यालय के समक्ष रुक कर सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारियों ने अपना विरोध प्रदर्शित किया। कलेक्ट्रेट पहुंच कर प्रदर्शनकारियों ने सभा की। सभा में वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश की ग्राम पंचायतों में लगभग 40 हजार ग्राम पंचायतों में नौ वर्षों से ग्राम रोजगार सेवक प्रशासनिक सहायक के रूप में संविदा पर कार्यरत हैँं। मनरेगा योजना के तहत चयनित ग्राम रोजगार सेवकों के संबंध में केंद्र सरकार द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि इनके ऊपर सरकारों का पूर्ण नियंत्रण होगा और वह राज्य कर्मचारी कहे जाएंगे।
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इससे स्पष्ट है कि राज्य सरकारें अपने संसाधनों से पूर्णकालिक कर्मचारी बना सकती हैं, लेकिन राज्य सरकारें ऐसा नहीं कर रही हैं। वक्ताओं ने कहा कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने पिछले विधानसभा चुनाव में रोजगार सेवकों को विनियमितिकरण करने का आश्वासन दिया था लेकिन विनयमितिकरण नहीं किया गया। ग्राम रोजगार सेवकों ने ग्राम पंचायत अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारी की भर्ती पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा कर पहले रोजगार सेवकों को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिलाने की मांग की। कहा कि ग्राम पंचायतों द्वारा फर्जी प्रस्ताव के आधार पर अपने पदों से हटाये गए ग्राम रोजगार सेवकों को पुन: उसके पद पर बहाल करके योगदान लिया जाय। प्रदर्शन करने वालों में सर्वेश दूबे, संजय सोनकर, जयशंकर, अनुपम, पूनम पटेल, अनीता गुप्ता, अनीता सिंह, सीमा जायसवाल, दीपक सिंह, सुनील यादव, राकेश सरोज आदि
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