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टैंकर देखते ही डिब्बा लेकर दौड़ रहे लोग
mirzapur
Updated Thu, 20 Apr 2017 12:17 AM IST
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टैंकर से पानी भरते लोग
- फोटो : अमर उजाला
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पहाड़ के उपर मिर्जापुर-रीवां मार्ग के एमपी बार्डर पर स्थित ग्राम सभा में भूमिगत जलस्तर करीब 300 फीट नीचे चले जाने से पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। करीब एक हजार से उपर की आबादी वाले गांव में वर्तमान जल निगम द्वारा मात्र दो पानी के टैंकर से पेयजल आपूर्ति की जा रही है। इंसानों सहित पशुओं के हलक की प्यास नहीं बुझ पा रही है।
ब्लाक हलिया के देवहट ग्राम सभा में स्थित लहुरिया दह राजस्व गांव में पेयजल संकट विकराल रूप धारण करती जा रही है। पेयजल समस्या से निजात कराने लेकर गांव के ग्रामीणों ने विधानसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार तक किया, लेकिन उनकी समस्या को सुनने वाला कोई नहीं है। गांव में लगे पांच हैंडपंप जलस्तर काफी नीचे खिसकने से शो-पीस बनकर रह गए है, वहीं गांव में स्थित एक कूप भी सूखा पड़ा हुआ है।
गांव में रोजाना सुबह सात बजे एक पानी का टैंकर आ जाता है। पानी का टैंकर आते देख बच्चे, बूढ़े, जवान बाल्टी-डिब्बा लेकर दौड़ पड़ते हैं और देखते ही देखते टैंकर का सारा पानी समाप्त हो जाता है। दूसरा पानी का टैंकर कुछ देर बाद गांव के दूसरे बस्ती में पहुंचता है और वहां भी पानी लेने के लिए लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
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नदी-नाले व तालाबों के सूखने से पशुओं की भी प्यास नहीं बुझ पा रही है, वहीं लोगाें को कपड़े साफ करने व नहाने की भी दिक्कत खड़ी हो गई है। इस संबंध में गांव की प्रधान शांति देवी ने बताया कि गांव में और पानी के टैंकर की मांग को लेकर उच्चाधिकारियों के यहां चक्कर लगाया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो पाई, जिससे पेयजल समस्या कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
ब्लाक हलिया के देवहट ग्राम सभा में स्थित लहुरिया दह राजस्व गांव में पेयजल संकट विकराल रूप धारण करती जा रही है। पेयजल समस्या से निजात कराने लेकर गांव के ग्रामीणों ने विधानसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार तक किया, लेकिन उनकी समस्या को सुनने वाला कोई नहीं है। गांव में लगे पांच हैंडपंप जलस्तर काफी नीचे खिसकने से शो-पीस बनकर रह गए है, वहीं गांव में स्थित एक कूप भी सूखा पड़ा हुआ है।
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गांव में रोजाना सुबह सात बजे एक पानी का टैंकर आ जाता है। पानी का टैंकर आते देख बच्चे, बूढ़े, जवान बाल्टी-डिब्बा लेकर दौड़ पड़ते हैं और देखते ही देखते टैंकर का सारा पानी समाप्त हो जाता है। दूसरा पानी का टैंकर कुछ देर बाद गांव के दूसरे बस्ती में पहुंचता है और वहां भी पानी लेने के लिए लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
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नदी-नाले व तालाबों के सूखने से पशुओं की भी प्यास नहीं बुझ पा रही है, वहीं लोगाें को कपड़े साफ करने व नहाने की भी दिक्कत खड़ी हो गई है। इस संबंध में गांव की प्रधान शांति देवी ने बताया कि गांव में और पानी के टैंकर की मांग को लेकर उच्चाधिकारियों के यहां चक्कर लगाया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो पाई, जिससे पेयजल समस्या कम होने का नाम नहीं ले रहा है।