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Mirzapur News: अभिभावक किताब के साथ कॉपी खरीदने के लिए विवश
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निजी विद्यालय प्रबंधन और स्टेशनरी दुकानदारों की मिलीभगत से अभिभावक परेशान है। निजी स्कूल वाले अभिभावकों को स्कूल और निर्धारित पुस्तक की दुकानों से किताब खरीदने का भावनात्मक दबाव बना रहे हैं।
स्टेशनरी वाले कॉपी खरीदने पर ही अभिभावकों को किताब दे रहे हैं। इससे अभिभावकों पर दोहरी मार पड़ रही है। जिले में 1809 परिषदीय विद्यालय, 833 निजी मान्यता प्राप्त विद्यालय और 299 माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। परिषदीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को किताबें शासन की ओर से प्रदान की जाती हैं।
निजी और मान्यता प्राप्त विद्यालयों के बच्चों को किताबें खरीदनी पड़ती है। निजी स्कूल वाले किसी भी प्रकाशक की पुस्तक पाठ्यक्रम में शामिल कर सकते हैं। निजी स्कूल वाले इसी का फायदा उठा रहे हैं। बच्चों से विद्यालय और निर्धारित पुस्तक केंद्र से ही पुस्तकें खरीदने को कहते हैं। जब अभिभावक पुस्तक खरीदने जाते हैं तो पुस्तक विक्रेता किताब के साथ कॉपी भी देते हैं।
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अभिभावकों के मना करने पर दुकानदार किताब वापस ले लेते हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के पास भी इस मनमानी को रोकने का कोई उपाय नहीं है। अधिकारियों का उनका कहना है कि शिकायत आने पर कार्रवाई की जाती है। घंटाघर निवासी एक अभिभावक ने कहा कि शिकायत करेंगे तो स्कूल वाले बच्चे का नाम काट देंगे। बीएसए अनिल कुमार वर्मा ने कहा कि इस प्रकार की कोई शिकायत आएगी तो कार्रवाई की जाएगी। दुकानदार किताब-कॉपी खरीदने अभिभावकों को पक्की रसीद भी दे रहे हैं। वे शिकायत कैसे करें। राज्यकर विभाग में शिकायत करने के लिए पक्की रसीद होनी चाहिए।
राज्यकर विभाग में स्टेशनरी की 82 दुकानें पंजीकृत हैं। विभाग के संयुक्त आयुक्त दिनेश कुमार दुबे ने कहा कि यदि कोई भी सामान लेते हैं तो पक्की रसीद अवश्य लें। यदि रसीद नहीं मिलती है तो उसकी शिकायत करें।
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स्टेशनरी वाले कॉपी खरीदने पर ही अभिभावकों को किताब दे रहे हैं। इससे अभिभावकों पर दोहरी मार पड़ रही है। जिले में 1809 परिषदीय विद्यालय, 833 निजी मान्यता प्राप्त विद्यालय और 299 माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। परिषदीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को किताबें शासन की ओर से प्रदान की जाती हैं।
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निजी और मान्यता प्राप्त विद्यालयों के बच्चों को किताबें खरीदनी पड़ती है। निजी स्कूल वाले किसी भी प्रकाशक की पुस्तक पाठ्यक्रम में शामिल कर सकते हैं। निजी स्कूल वाले इसी का फायदा उठा रहे हैं। बच्चों से विद्यालय और निर्धारित पुस्तक केंद्र से ही पुस्तकें खरीदने को कहते हैं। जब अभिभावक पुस्तक खरीदने जाते हैं तो पुस्तक विक्रेता किताब के साथ कॉपी भी देते हैं।
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अभिभावकों के मना करने पर दुकानदार किताब वापस ले लेते हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के पास भी इस मनमानी को रोकने का कोई उपाय नहीं है। अधिकारियों का उनका कहना है कि शिकायत आने पर कार्रवाई की जाती है। घंटाघर निवासी एक अभिभावक ने कहा कि शिकायत करेंगे तो स्कूल वाले बच्चे का नाम काट देंगे। बीएसए अनिल कुमार वर्मा ने कहा कि इस प्रकार की कोई शिकायत आएगी तो कार्रवाई की जाएगी। दुकानदार किताब-कॉपी खरीदने अभिभावकों को पक्की रसीद भी दे रहे हैं। वे शिकायत कैसे करें। राज्यकर विभाग में शिकायत करने के लिए पक्की रसीद होनी चाहिए।
राज्यकर विभाग में स्टेशनरी की 82 दुकानें पंजीकृत हैं। विभाग के संयुक्त आयुक्त दिनेश कुमार दुबे ने कहा कि यदि कोई भी सामान लेते हैं तो पक्की रसीद अवश्य लें। यदि रसीद नहीं मिलती है तो उसकी शिकायत करें।