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विशेषज्ञों की कमी, एक डाक्टर के भरोसे एसएनसीयू

Mon, 20 Jan 2020 12:15 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 20 Jan 2020 12:15 AM IST
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महिला अस्पताल में नवजात बच्चों के उपचार के लिए बना एसएनसीयू वार्ड। - फोटो : MIRZAPUR
मिर्जापुर। महिला अस्पताल में नवजातों के उपचार के लिए एसएनसीयू कक्ष बना है, पर डाक्टर और स्टाफ की कमी से बच्चों की संख्या बढ़ने पर व्यवस्थाएं बिगड़ जाती है। एसएनसीयू कक्ष एक डाक्टर के भरोसे चल रहा है। रात के समय आकस्मिक चिकित्सा के समय या तो डाक्टर को बुलाना पड़ता है या फिर मजबूरी में परिवार को नवजात को दूसरे स्थान पर ले जाना पड़ता है। यही हाल मंडलीय अस्पताल का है। मंडलीय अस्पताल में चिल्ड्रेन वार्ड एक डाक्टर के भरोसे है। जिसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ता है।
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महिला अस्पताल के एसएनसीयू में एक माह तक के बच्चे और मंडलीय अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में एक माह से लेकर 15 वर्ष तक के बच्चों का इलाज होता है, पर उपचार पर नवजात और बच्चों के उपचार के लिए विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी है। महिला अस्पताल के 12 रेडियंट वार्मर का एसएनसीयू (सिक न्यू बार्न केयर यूनिट) कक्ष 2007 में बना है। इसमें बच्चो को गर्म रखने के लिए वार्मर, ज्वांडिश इलाज के लिए फोटो थेरेपी, पल्स आक्सीमीटर, आक्सीजन कंसनटेटर मशीन रखा है। उपचार का पूरा प्रबंध है, पर डाक्टर से लेकर अन्य स्टाफ की कमी है। एसएनसीयू एक डा. आशुतोष शुक्ला के भरोसे है। अस्पताल के दूसरे डा. एलएस सिंह ओपीडी देखते है। इसके अलावा दो स्टाफ नर्स है। एसएनसीयू में दो डाक्टर और दो स्टाफ नर्स की कर्मी है। तीन डाक्टर होने पर आठ घंटे की शिफ्ट बदली जा सकती है, डाक्टर न होने से रात के समय परेशानी होती है। यही हाल मंडलीय अस्पताल का है। मंडलीय अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ डा. आरके सिंह और डा. तरुण सिंह है, पर चिल्ड्रेन वार्ड में सिर्फ डा. आरके सिंह को ही जिम्मेदारी दी गई है। इससे पूरा भार आरके सिंह पर आ जाता है। अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ के तीन पद है। दो वर्ष पूर्व मंडलीय अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञों की भरमार थी। इस समय कमी हो गई है।
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डाक्टर के छुट्टी पर जाने पर बढ़ती है परेशानी
मिर्जापुर। बच्चों की देखभाल के लिए वैसे ही डाक्टर की कमी है, रात के बच्चों की हालत बिगड़ने पर फोन कर डाक्टर को बुलाना पड़ता है या फिर परिजन बच्चे को लेकर अंयत्र जाते है। बड़ी समस्या तब खड़ी हो जाती है। जब डाक्टर छुट्टी पर चले जाते है। डाक्टर के छुट्टी पर जाने पर उपचार में परेशानी बढ़ जाती है। स्टाफ नर्स के भरोसे ही उपचार होता है।
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एनएससीयू में नहीं मर्ज हुए बेड
मिर्जापुर। महिला अस्पताल में नवजात के उपचार के 2017 में एसएनसीयू कक्ष बनाया गया है। जहां 12 बेड है। मंडलीय अस्पताल में भी एसएनसीयू कक्ष था। जिसे 2017 में बंद कर दिया गया। कारण यह बताया गया कि नवजात का उपचार महिला अस्पताल के एसएनसीयू में होता है। तो सारे बेड वहां पर मर्ज किए जाएंगे, पर वे बेड मर्ज नहीं हुए। सीएमएस डा. संजय पांडेय ने बताया कि एसएनसीयू कक्ष में जगह नहीं है। मंडलीय अस्पताल के एसएनसीयू के मर्ज होने के बारे में जानकारी नहीं है।

एसएनसीयू के लिए सिर्फ एक डाक्टर है। इसके अलावा स्टाफ नर्स की भी कमी है। इससे परेशानी तो होती ही है, पर कम स्टाफ में बेहतर व्यवस्था देने का कार्य किया जा रहा है।
डा. संजय पांडेय, सीएमएस
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