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नागकुंड है पाताललोक जाने का मार्ग
ब्यूरो/ अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Mon, 11 Apr 2016 12:59 AM IST
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विंध्याचल क्षेत्र में कंतित स्थित प्राचीन नागकुंड।
- फोटो : mirzapur
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मां विंध्यवासिनी का धाम विंध्याचल का कण कण दैवीय ऊर्जा से भरा पड़ा हुआ है, इसके रहस्य को जानने के लिए मानव क्या देवता भी लालायित रहते हैं। विश्व प्रसिद्ध विंध्याचल धाम त्रिशक्ति के साथ त्रिकोण पर विद्यमान है। मान्यता है कि त्रिकोण पथ पर आज भी विद्यमान है पाताल लोक जाने का रास्ता।
पाताल यानि नागवंशियों की नगरी। आपको जान कर थोड़ी हैरानी जरूर होगी, कि यहां जाने का रास्ता धरती पर आखिर है कहां। यह पाताल लोक का रास्ता प्राचीन नगरी पंपापुर वर्तमान में विंध्याचल में है।
शास्त्र में वर्णित है कि पंपापुर नागवंशी राजाआें की राजधानी थी। माता विंध्यवासिनी नागवंशी राजाओं की कुल देवी के रूप में पूजीं जाती थीं। कहा जाता है कि पाताल लोक से इसी रास्ते नागवंशी आते-जाते थे। कई युगों से प्राचीन विंध्य धरा पर अवस्थित नागकुंड की बावली पांच कुंड के साथ विद्यमान है और पाताल लोक जाने वाले मार्ग को ही नागकुंड के नाम से जाना जाता है।
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विंध्याचल धाम में मौजूद इस कुंड में पांच कुएं बने हुए हैं, जिसका रास्ता सीधे पाताल लोक जाता है। इस कुंड को बावन घाट की बावली भी कहा जाता है। बावन घाट की बावली यानि चारों दिशाओं से कुंड में जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई हैं, जिसे नागवंशियों ने बनवाया है। जल स्तर बढ़ने पर 52 घाटों की शक्ल में नागकुंड दिखाई देता है।
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पाताल यानि नागवंशियों की नगरी। आपको जान कर थोड़ी हैरानी जरूर होगी, कि यहां जाने का रास्ता धरती पर आखिर है कहां। यह पाताल लोक का रास्ता प्राचीन नगरी पंपापुर वर्तमान में विंध्याचल में है।
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शास्त्र में वर्णित है कि पंपापुर नागवंशी राजाआें की राजधानी थी। माता विंध्यवासिनी नागवंशी राजाओं की कुल देवी के रूप में पूजीं जाती थीं। कहा जाता है कि पाताल लोक से इसी रास्ते नागवंशी आते-जाते थे। कई युगों से प्राचीन विंध्य धरा पर अवस्थित नागकुंड की बावली पांच कुंड के साथ विद्यमान है और पाताल लोक जाने वाले मार्ग को ही नागकुंड के नाम से जाना जाता है।
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विंध्याचल धाम में मौजूद इस कुंड में पांच कुएं बने हुए हैं, जिसका रास्ता सीधे पाताल लोक जाता है। इस कुंड को बावन घाट की बावली भी कहा जाता है। बावन घाट की बावली यानि चारों दिशाओं से कुंड में जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई हैं, जिसे नागवंशियों ने बनवाया है। जल स्तर बढ़ने पर 52 घाटों की शक्ल में नागकुंड दिखाई देता है।