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Mirzapur News: जलापूर्ति के लिए 35000 घरों को दिए जाएंगे नए कनेक्शन
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मिर्जापुर। नगर पालिका क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर है। शुद्ध पेयजल के लिए अब शीघ्र ही नए कनेक्शन किए जाएंगे। इसके लिए शासन को अमृत योजना - दो के तहत 35 करोड़ की कार्ययोजना प्रस्तावित की गई है।
नगर क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति के लिए 193 करोड़ रुपये की लागत वाली अमृत योजना पहले से ही संचालित है। इसके तहत शास्त्री सेतु के पास एक इनटेक वेल बनाया गया है। इसमें गंगा से पानी लेकर पाइप लाइन के जरिए लालडिग्गी स्थित जल शोधन संयंत्र में भेजा जाता है। इस 60 एमएलडी क्षमता वाले संयंत्र में पानी शोधित कर पाइप लाइन के जरिए ओवरहेड टैंकों तक भेजा जाएगा। इसके लिए नगर में पांच ओवरहेड टैंक बनाए गए हैं। इन ओवरहेड टैंकों के माध्यम से सभी जगह जलापूर्ति की जाएगी। नगर में पानी की दैनिक मांग 35 एमएलडी है, जबकि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर 60 एमएलडी क्षमता का जल शोधन संयंत्र लगाया गया है। योजना के तहत लगे सभी संयंत्र काम तो करने लगे हैं, लेकिन जलापूर्ति के लिए नए कनेक्शन नहीं होने अभी तमाम लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा है। हालांकि पुरानी अमृत योजना के तहत 13 हजार कनेक्शन किए गए हैं, जहां इस नए संयंत्र के जरिए जलापूर्ति की जा रही है।
अमृत योजना के तहत इनटेक वेल व अन्य कार्य किए जाने थे, लेकिन उसमें नगर में 35000 लोगों के यहां जलापूर्ति के लिए कनेक्शन जोड़ने की व्यवस्था नहीं थी। इसलिए अमृत योजना - दो के तहत इस कार्य को कराने के लिए कार्ययोजना प्रस्तावित की गई है। कार्यदायी संस्था गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के परियोजना प्रबंधक संजय कुमार ने बताया कि शासन से हरी झंडी मिलते ही टेंडर जारी किया जाएगा। इसकी प्रक्रिया पूरी होते ही काम शुरू करा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि एक बार सारे कार्य पूरा हो जाने पर अगले 50 वर्षों तक नगर में पेयजल आपूर्ति की कोई समस्या नहीं होगी। नागरिकों को शुद्ध जल मिलता रहेगा।
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नगर क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति के लिए 193 करोड़ रुपये की लागत वाली अमृत योजना पहले से ही संचालित है। इसके तहत शास्त्री सेतु के पास एक इनटेक वेल बनाया गया है। इसमें गंगा से पानी लेकर पाइप लाइन के जरिए लालडिग्गी स्थित जल शोधन संयंत्र में भेजा जाता है। इस 60 एमएलडी क्षमता वाले संयंत्र में पानी शोधित कर पाइप लाइन के जरिए ओवरहेड टैंकों तक भेजा जाएगा। इसके लिए नगर में पांच ओवरहेड टैंक बनाए गए हैं। इन ओवरहेड टैंकों के माध्यम से सभी जगह जलापूर्ति की जाएगी। नगर में पानी की दैनिक मांग 35 एमएलडी है, जबकि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर 60 एमएलडी क्षमता का जल शोधन संयंत्र लगाया गया है। योजना के तहत लगे सभी संयंत्र काम तो करने लगे हैं, लेकिन जलापूर्ति के लिए नए कनेक्शन नहीं होने अभी तमाम लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा है। हालांकि पुरानी अमृत योजना के तहत 13 हजार कनेक्शन किए गए हैं, जहां इस नए संयंत्र के जरिए जलापूर्ति की जा रही है।
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अमृत योजना के तहत इनटेक वेल व अन्य कार्य किए जाने थे, लेकिन उसमें नगर में 35000 लोगों के यहां जलापूर्ति के लिए कनेक्शन जोड़ने की व्यवस्था नहीं थी। इसलिए अमृत योजना - दो के तहत इस कार्य को कराने के लिए कार्ययोजना प्रस्तावित की गई है। कार्यदायी संस्था गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के परियोजना प्रबंधक संजय कुमार ने बताया कि शासन से हरी झंडी मिलते ही टेंडर जारी किया जाएगा। इसकी प्रक्रिया पूरी होते ही काम शुरू करा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि एक बार सारे कार्य पूरा हो जाने पर अगले 50 वर्षों तक नगर में पेयजल आपूर्ति की कोई समस्या नहीं होगी। नागरिकों को शुद्ध जल मिलता रहेगा।
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