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मेले की तैयारियां अंतिम दौर में पहुंची
ब्यूरो/ अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Wed, 06 Apr 2016 11:43 PM IST
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मेले की तैयारियां अंतिम दौर में पहुंची
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विंध्यधाम में नवरात्र मेले की तैयारियां अंतिम चरण में हैं लेकिन अब भी कई जगह खामियां देखने को मिल रही हैं। शुक्रवार से चैत्र नवरात्र शुरू हो रहा है। मेले में आने वाली अनुमानित भीड़ को देखते हुए तय समय में तैयारियां पूरी हो पाएंगी यह कहना मुश्किल है।
अष्टभुजा और कालीखोह मंदिर परिसर क्षेत्र में मेले तैयारियों को पूर्ण कराने में अधिकारी रात दिन एक किए हुए हैं, बावजूद इसके काफी काम अधूरा है। मेला क्षेत्र में पेयजल के लिए कहीं भी अस्थाई प्याऊ की व्यवस्था नहीं हो पाई है। बुधवार को गंगा घाट पर नाला से गिर रहे पानी को रोकने वाले गड्ढे पर बैरिकेडिंग की जा रही थी।
पक्काघाट पर स्टील की रेलिंग लगाने का काम होता रहा। बिजली विभाग द्वारा गंगा घाटों पर प्रकाश व्यवस्था कराया जा रहा था। गंगा घाटों पर स्नान के लिए बैरिकेडिंग का काम पूरा हो चुका है, वहीं अस्थायी शौचालय एवं रैन बसेरा एवं महिलाआें के वस्त्र बदलने के लिए टेंट लगवा दिए गए हैं। बुधवार को विंध्याचल मंदिर में पूरे दिन रंगाई-पुताई का कार्य चलता रहा। क्षतिग्रस्त सड़काें को दुरुस्त कराने का काम जारी रहा, वहीं मंदिर के सामने कंट्रोल रूम के पास खोया पाया केंद्र की स्थापना हो गई है। रोडवेज परिसर एवं प्राइवेट बस स्टैंडों पर यात्रियों के हितों को ध्यान में रखते हुए अभी तक व्यवस्थाएं आधी-अधूरी हैं।
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अष्टभुजा और कालीखोह मंदिर परिसर क्षेत्र में मेले तैयारियों को पूर्ण कराने में अधिकारी रात दिन एक किए हुए हैं, बावजूद इसके काफी काम अधूरा है। मेला क्षेत्र में पेयजल के लिए कहीं भी अस्थाई प्याऊ की व्यवस्था नहीं हो पाई है। बुधवार को गंगा घाट पर नाला से गिर रहे पानी को रोकने वाले गड्ढे पर बैरिकेडिंग की जा रही थी।
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पक्काघाट पर स्टील की रेलिंग लगाने का काम होता रहा। बिजली विभाग द्वारा गंगा घाटों पर प्रकाश व्यवस्था कराया जा रहा था। गंगा घाटों पर स्नान के लिए बैरिकेडिंग का काम पूरा हो चुका है, वहीं अस्थायी शौचालय एवं रैन बसेरा एवं महिलाआें के वस्त्र बदलने के लिए टेंट लगवा दिए गए हैं। बुधवार को विंध्याचल मंदिर में पूरे दिन रंगाई-पुताई का कार्य चलता रहा। क्षतिग्रस्त सड़काें को दुरुस्त कराने का काम जारी रहा, वहीं मंदिर के सामने कंट्रोल रूम के पास खोया पाया केंद्र की स्थापना हो गई है। रोडवेज परिसर एवं प्राइवेट बस स्टैंडों पर यात्रियों के हितों को ध्यान में रखते हुए अभी तक व्यवस्थाएं आधी-अधूरी हैं।
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