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धन आहरित कर लिया, नहीं हुआ विकास कार्य
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मिर्जापुर। जिले में विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर घोटालों का आरोप लगाया जा रहा है। लोग कार्य के लिए आवंटित धन आहरित कर ले रहे हैं लेकिन विकास कार्य नदारद है। अब तो हालत यह है कि ग्रामीणों की मांग पर जिलाधिकारी के आदेश पर हुई जांच की रिपोर्ट भी दबा दी जा रही है। इससे ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश है।
छानबे विकास खंड के अरंगी सरपत्ती ग्राम सभा में कई विकास कार्यों में जबरदस्त धांधली का आरोप है। जांच भी हुई लेकिन कार्रवाई शून्य है। भाजपा के मंडल मंत्री महेश यादव ने जिलाधिकारी को पत्रक देकर आरोप लगाया था कि ग्राम सभा में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन का गबन किया गया है। ग्राम सभा में इंटरलाकिंग, खड़ंजा व विद्यालयों में शौचालय के नाम पर तकरीबन 20 लाख 87 हजार रुपये के सरकारी धन का गबन कर लिया गया है। पैसा तो निकाल लिया गया लेकिन काम नहीं हुआ। ग्राम प्रधान पर अनियमितता करने का आरोप लगाया गया। इस पर जिलाधिकारी ने जिला विद्यालय निरीक्षक, आरईडी के सहायक अभियंता व अवर अभियंता की एक जांच टीम बनाकर मामले की विस्तृत जांच करने को कहा। इन तीनों अधिकारियों के दल ने जांच पूरी कर छह अप्रैल 2020 को अपनी जांच रिपोर्ट जिला पंचायत राज अधिकारी को सौंप दी लेकिन आरोप है कि डीपीआरओ ने मामले को दबा दिया है। अपनी जांच रिपोर्ट में अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि 19 कार्यों के लिए 28 लाख 25 हजार छह सौ 16 रुपये का बजट आवंटित किया गया था जिसमें 20 लाख 87 हजार सात सौ 26 रुपया निकाल लिया गया लेकिन कार्य नहीं किया गया। इसमें इंटरलाकिंग, खड़ंजा, प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय में शौचालय का निर्माण शामिल था। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि संबंधित अधिकारी से रिपोर्ट मांगकर अतिशीघ्र कार्रवाई कर विकास कार्य कराया जाए।
जांच अधिकारी डीआईओएस देवकी सिंह ने बताया कि मामले की जांच की गई थी। उसमें यह पाया गया कि अधिकांश मदों के लिए आवंटित बजट के सापेक्ष कार्य पूरा नहीं कराया गया। जांच रिपोर्ट डीपीआरओ को सौंप दी गई है।
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छानबे विकास खंड के अरंगी सरपत्ती ग्राम सभा में कई विकास कार्यों में जबरदस्त धांधली का आरोप है। जांच भी हुई लेकिन कार्रवाई शून्य है। भाजपा के मंडल मंत्री महेश यादव ने जिलाधिकारी को पत्रक देकर आरोप लगाया था कि ग्राम सभा में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन का गबन किया गया है। ग्राम सभा में इंटरलाकिंग, खड़ंजा व विद्यालयों में शौचालय के नाम पर तकरीबन 20 लाख 87 हजार रुपये के सरकारी धन का गबन कर लिया गया है। पैसा तो निकाल लिया गया लेकिन काम नहीं हुआ। ग्राम प्रधान पर अनियमितता करने का आरोप लगाया गया। इस पर जिलाधिकारी ने जिला विद्यालय निरीक्षक, आरईडी के सहायक अभियंता व अवर अभियंता की एक जांच टीम बनाकर मामले की विस्तृत जांच करने को कहा। इन तीनों अधिकारियों के दल ने जांच पूरी कर छह अप्रैल 2020 को अपनी जांच रिपोर्ट जिला पंचायत राज अधिकारी को सौंप दी लेकिन आरोप है कि डीपीआरओ ने मामले को दबा दिया है। अपनी जांच रिपोर्ट में अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि 19 कार्यों के लिए 28 लाख 25 हजार छह सौ 16 रुपये का बजट आवंटित किया गया था जिसमें 20 लाख 87 हजार सात सौ 26 रुपया निकाल लिया गया लेकिन कार्य नहीं किया गया। इसमें इंटरलाकिंग, खड़ंजा, प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय में शौचालय का निर्माण शामिल था। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि संबंधित अधिकारी से रिपोर्ट मांगकर अतिशीघ्र कार्रवाई कर विकास कार्य कराया जाए।
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जांच अधिकारी डीआईओएस देवकी सिंह ने बताया कि मामले की जांच की गई थी। उसमें यह पाया गया कि अधिकांश मदों के लिए आवंटित बजट के सापेक्ष कार्य पूरा नहीं कराया गया। जांच रिपोर्ट डीपीआरओ को सौंप दी गई है।
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