विंध्याचल: श्रद्धालुओं को लुभा रहा अत्याधुनिक तकनीक से लैस रोप-वे, पहले सैंकड़ो सीढ़ियां चढ़नी पड़ती थीं
शारदीय नवरात्र मेले में आने वाले भक्तों के लिए रोपवे मनोरंजन के साथ ही कालीखोह से अष्टभुजा मंदिर आने-जाने का सहारा बन गया है। इसके लिए पहले श्रद्धालुओं को सैंकड़ो सीढ़ियां चढ़नी पड़ती थीं।
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प्रकृति की सुंदरता के अद्भुत नजारों के साथ विंध्याचल में बनाया गया रोप-वे श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। मां विंध्यवासिनी के दर्शन साथ-साथ यहां आने वाले पर्यटक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के साथ रोप-वे के के सुहाने सफर का लुत्फ उठा रहे हैं। शारदीय नवरात्र मेला में आने वाले भक्तों के लिए रोपवे मनोरंजन के साथ ही कालीखोह से अष्टभुजा मंदिर आने-जाने का सहारा बन गया है।
इसके लिए पहले श्रद्धालुओं को सैंकड़ो सीढ़ियां चढ़नी पड़ती थीं। शारदीय नवरात्र में दर्शन व पूजन को आए श्रद्धालुओं ने रोपवे का आनंद उठा रहे हैं। मां काली मंदिर के ठीक बगल स्थित सैकड़ों सीढ़ियों पर पैदल चलने के बजाय ज्यादातर श्रद्धालु कुछ ही मिनट में पहाड़ से नीचे और ऊपर कर रहे हैं।
रोप-वे बच्चे व बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए काफी मददगार साबित हो रहा है। गौरतलब है कि बीते एक अगस्त को गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रोप-वे का उद्घाटन किया था। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने 16 करोड़ की लागत से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर इसका निर्माण कराया है।
जिला प्रशासन के नियमों की पहले ही दिन उड़ी धज्जियां
शारदीय नवरात्र में आम श्रद्धालुओं के सुलभ व शांतिपूर्ण दर्शन के लिए जिला प्रशासन के बनाए गए नियमों की पहले ही दिन जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। सख्त निर्देश के बावजूद निकास द्वार से भक्तों को प्रवेश कराने के साथ ही गर्भगृह में दर्शन पूजन कराया गया। इतना ही नहीं मोबाइल से मनमाने तरीके से वीडियो व फोटोग्राफी हुई। आम श्रद्धालु परेशान दिखे तो वहीं मनमानी के सामने जिला प्रशासन लाचार नजर आया। किसी भी दिन यह विवाद का कारण बन सकता है।
नवरात्र के पूर्व जिला प्रशासन व पंडासमाज की संयुक्त बैठक में कड़ाई के साथ यह निर्देश जारी किया गया था कि निकास द्वार से भक्तों को प्रवेश नहीं कराया जाएगा। चरणस्पर्श पर प्रतिबंध रहेगा तथा गर्भगृह में मोबाईल फोन से वीडियो व फोटोग्राफी इत्यादि पर पूर्णतया प्रतिबंध रहेगा।
इन सारे नियमों की धज्जियां नवरात्र के पहले ही दिन उड़ाई गईं। कई दर्शनार्थियों को निकास द्वार से प्रवेश कराया गया। इतना ही नहीं गर्भगृह में प्रवेश कराकर चरणस्पर्श कराया गया। मोबाइल से फोटो व वीडियोग्राफी भी की गई। इस अव्यवस्था के चलते लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं को घंटो मंदिर में प्रवेश के लिए इंतजार करना पड़ा। ऐसे में भक्तों में अव्यवस्था को लेकर जबरदस्त रोष नजर आया।