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दवाएं फेंकी, बाद में किया आग के हवाले
मिर्जापुर
Updated Sun, 07 May 2017 12:29 AM IST
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जमालपुर के शिवकली इंटर कालेज के मैदान में फेंकी दवाएं
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थाना क्षेत्र के देवकली इंटर कॉलेज के मैदान में सरकारी दवाएं फेंके जाने की खबर लगते ही शनिवार को जमालपुर में हड़कंप मच गया। कालेज के ग्राउंड में दवा फेंकने की जानकारी होते ही स्वास्थ्य कर्मचारी वहां पहुंचे। आनन फानन में दवाओं को इकट्ठा कराकर उसे अस्पताल ले आए और परिसर रखकर जलवा दिया। वहीं कुछ दवाएं मार्च में ही एक्सपायर हो चुकी थी बाकी दवाएं जुलाई 2017 में एक्सपायर होनी थी। बताया जाता है कि फेंकी गई दवाओं में जीवनरक्षक सहित अन्य जरूरी मेडिसीन थी।
बता दें कि जमालपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मरीजों को मुक्त में दवाएं वितरण करने के लिए आया था। जिसे कर्मचारी वितरण करने की बजाय उसे देवकली इंटर कालेज के मैदान में फेंक दिया। शनिवार की सुबह इलाके के कुछ ग्रामीण कालेज के मैदान में मार्निंग वाक करने गए तो देखा कि भारी मात्रा में सरकारी दवाएं फेंकी है। दवा फेंकने की खबर लगते ही ग्रामीण इकटठा हो गए। खबर लगते ही आनन फानन कर्मचारी वहां पहुंचे और सारी दवाओं को इकटठा कराकर उठवा ले आए और अस्पताल के परिसर में रखकर जलवा दिया।
ग्रामीणों के अनुसार फेंकी गई दवाओं को डायरिया रोग में दिए जाने वाला ओआरएस पाउडर, पैराशिटा माल, दर्द की दवाएं, ब्लडप्रेशर की सूई, सिपटाकासिन इंजेक्शन, एर्लजी की दवा समेत अन्य दवाएं शामिल थी। जिसकी कीमत बाजार में सैकड़ों रुपये है। ग्रामीणों का कहना था कि मुक्त में दी जाने वाली दवाएं कर्मचारी कभी मरीज को नहीं देते है बल्कि उसे बाजार की दूकानों को बेच देते हैं। जबकि सरकार की मंशा है मरीजों को अस्पताल से दवाएं दी जाए। निजी चिकित्सक भी सस्ती दवाएं मरीजों को लिखे लेकिन सरकारी कर्मचारी सरकार की इस मंशा पर पानी फेरने में लगे हुए है।
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बता दें कि जमालपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मरीजों को मुक्त में दवाएं वितरण करने के लिए आया था। जिसे कर्मचारी वितरण करने की बजाय उसे देवकली इंटर कालेज के मैदान में फेंक दिया। शनिवार की सुबह इलाके के कुछ ग्रामीण कालेज के मैदान में मार्निंग वाक करने गए तो देखा कि भारी मात्रा में सरकारी दवाएं फेंकी है। दवा फेंकने की खबर लगते ही ग्रामीण इकटठा हो गए। खबर लगते ही आनन फानन कर्मचारी वहां पहुंचे और सारी दवाओं को इकटठा कराकर उठवा ले आए और अस्पताल के परिसर में रखकर जलवा दिया।
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ग्रामीणों के अनुसार फेंकी गई दवाओं को डायरिया रोग में दिए जाने वाला ओआरएस पाउडर, पैराशिटा माल, दर्द की दवाएं, ब्लडप्रेशर की सूई, सिपटाकासिन इंजेक्शन, एर्लजी की दवा समेत अन्य दवाएं शामिल थी। जिसकी कीमत बाजार में सैकड़ों रुपये है। ग्रामीणों का कहना था कि मुक्त में दी जाने वाली दवाएं कर्मचारी कभी मरीज को नहीं देते है बल्कि उसे बाजार की दूकानों को बेच देते हैं। जबकि सरकार की मंशा है मरीजों को अस्पताल से दवाएं दी जाए। निजी चिकित्सक भी सस्ती दवाएं मरीजों को लिखे लेकिन सरकारी कर्मचारी सरकार की इस मंशा पर पानी फेरने में लगे हुए है।
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