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Mirzapur News: आसमान निहारती रहीं सुहागिनें, चांद को साक्षी मान पति का किया दीदार
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मिर्जापुर। दिनभर की भूख-प्यास, हाथों में रची मेहंदी, सोलह शृंगार और मन में पति की लंबी उम्र की कामना। करवा चौथ पर बृहस्पतिवार को सुहागिन महिलाओं ने इसी आस्था और उत्साह के साथ निर्जला व्रत रखा। शाम ढली तो निगाहें आसमान पर टिक गईं। किसी ने घर की छत से चांद को तलाशा, तो कोई गंगा घाट पर उसके निकलने का इंतजार करती रही। लेकिन इस बार चांद और सुहागिनों के बीच बादलों के कारण इंतजार लंबा होता चला गया।
चक्रवात अर्नब के प्रभाव से छाए बादलों ने चंद्र दर्शन के लिए इंतजार करना पड़ा। शाम होते ही घरों की छतों और गंगा घाटों पर चहल-पहल बढ़ने लगी। सजी-धजी महिलाएं पूजन की थाली लेकर चंद्रमा के निकलने की राह देखने लगीं। किसी की निगाह आसमान के एक कोने पर टिकी थी, तो कोई बादलों के छंटने की उम्मीद लगाए बैठी थी। दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद हर किसी को उस पल का इंतजार था, जब छलनी से चांद और फिर पति का चेहरा देखकर व्रत पूरा किया जा सके। समय बीतने के साथ चंद्र दर्शन की उत्सुकता भी बढ़ती रही। कहीं महिलाएं आपस में बातचीत कर समय बिताती रहीं, तो कहीं संगीत और अन्य कार्यक्रमों के बीच चांद निकलने की चर्चा होती रही। मोबाइल कैमरों में इस खास शाम को कैद करने की तैयारियां भी थीं। हर किसी की नजर आसमान पर थी। बादलों के बीच चांद की एक झलक पाने की उम्मीद बनी हुई थी।
आखिरकार चंद्र दर्शन के बाद महिलाओं ने परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार पूजन-अर्चन किया। छलनी में दीपक रखकर चंद्रमा और फिर पति के दर्शन किए। पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत का पारण किया। दिनभर की तपस्या और शाम के लंबे इंतजार के बाद व्रत पूरा होने पर महिलाओं के चेहरे पर संतोष और खुशी दिखाई दी।
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चक्रवात अर्नब के प्रभाव से छाए बादलों ने चंद्र दर्शन के लिए इंतजार करना पड़ा। शाम होते ही घरों की छतों और गंगा घाटों पर चहल-पहल बढ़ने लगी। सजी-धजी महिलाएं पूजन की थाली लेकर चंद्रमा के निकलने की राह देखने लगीं। किसी की निगाह आसमान के एक कोने पर टिकी थी, तो कोई बादलों के छंटने की उम्मीद लगाए बैठी थी। दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद हर किसी को उस पल का इंतजार था, जब छलनी से चांद और फिर पति का चेहरा देखकर व्रत पूरा किया जा सके। समय बीतने के साथ चंद्र दर्शन की उत्सुकता भी बढ़ती रही। कहीं महिलाएं आपस में बातचीत कर समय बिताती रहीं, तो कहीं संगीत और अन्य कार्यक्रमों के बीच चांद निकलने की चर्चा होती रही। मोबाइल कैमरों में इस खास शाम को कैद करने की तैयारियां भी थीं। हर किसी की नजर आसमान पर थी। बादलों के बीच चांद की एक झलक पाने की उम्मीद बनी हुई थी।
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आखिरकार चंद्र दर्शन के बाद महिलाओं ने परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार पूजन-अर्चन किया। छलनी में दीपक रखकर चंद्रमा और फिर पति के दर्शन किए। पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत का पारण किया। दिनभर की तपस्या और शाम के लंबे इंतजार के बाद व्रत पूरा होने पर महिलाओं के चेहरे पर संतोष और खुशी दिखाई दी।
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