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लोगों में राष्ट्र धर्म का दिख रहा है अभाव

Sun, 28 Feb 2016 12:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/ मिर्जापुर
ब्यूरो/अमर उजाला/ मिर्जापुर Updated Sun, 28 Feb 2016 12:51 AM IST
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Lack of state religion is visible in people
भारतीय संत समिति के अध्यक्ष और कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने शनिवार को कहा कि राष्ट्र का भी एक अलग धर्म होता है, जो सबसे ऊपर है। आज राष्ट्र धर्म का थोड़ा अभाव दिख रहा है। लोग जातियों और संप्रदाय में बंट गए हैं।
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कोई जातियों के नाम पर आरक्षण के लिए देश का नुकसान कर रहा है तो कोई स्वार्थ के लिए गलत बयानबाजी कर रहा है।
 
 नगर के लालडिग्गी स्थित एक होटल में प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि अगर देश कमजोर हुआ तो धर्म मजबूत नहीं हो सकता है। अगर देश नहीं रहा तो धर्म कैसे रहेगा।
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उन्होंने कहा कि जिन उम्मीदों के साथ जनता ने नरेंद्र मोदी का साथ दिया और देश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनी, उनको भाजपा  भूल चुकी है।

सरकार ना राम मंदिर पर कोई बात करती है न अनुच्छेद 370 हटाने की बात करती है, ना काले धन पर कोई चर्चा है और ना ही गो वध पर प्रतिबंध के लिए राष्ट्रीय कानून बनाने की बात करती है।
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आचार्य ने कहा कि जो आस भारत के संतों ने मोदी सरकार से की थी, वह पूरी होने की उम्मीद नहीं है। कहा कि गंगा की निर्मलता और अविरलता पर पिछले दो सालों में बयानबाजी के अलावा कुछ नहीं हुआ।

गौमुख से लेकर गंगा सागर तक दो साल में दो इंच भी काम नहीं हुआ है। धर्म की यह यात्रा धंधे में परिवर्तित हो रही है। भारत में संताें, साधुआें के प्रति हमेशा श्रद्धा का भाव रहा है, लेकिन पिछले कुछ दिनों में कुछ ऐसी घटनाएं हुई, जिससे संताें की मर्यादा गिरी है।


कुछ लोग प्रवचन तो कुछ लोग भजन बेच रहे हैं। धर्म की यात्रा धंधे तक आ पहुंची है। राष्ट्र हित में सोचने वाले   संतों को इसपर चिंतन करने की जरूरत है। 
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