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जिले में बढ़ा दूध का उत्पादन
ब्यूरो/अमर उजाला, मिर्जापुर।
Updated Wed, 01 Jun 2016 12:41 AM IST
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दूध
- फोटो : getty images
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शासन के प्रयास से जिले में दूध का उत्पादन बढ़ा है। दूध का उत्पादन बढ़ने से लोगों को रोजगार के अवसर भी मिले हैं। भी मिला है। यही प्रयास रहा तो वह दिन दूर नहीं जब जिला दूध उत्पादन में काफी आगे बढ़ जाएगा।
बता दें कि प्रदेश सरकार ने दूध उद्योग को बढ़वा देने के लिए आधा दर्जन से अधिक योजनाएं चलाई हैं। इनमें कामधेनु, मिनी कामधेनु, म्राइको, म्राइक्रो कामधेनु, कुक्कुट, कार्मशियल ब्वायलर समेत अन्य योजनाएं शामिल हैं। योजना के तहत लोगों को एक करोड़ 20 लाख रुपया जमा करने पर कामधेनु योजना के तहत अच्छी नस्ल की सौ गाय व भैंस मिला कर दी जाती है। जिसमें उसको 35 प्रतिशत की छूट है। लगभग 80 लाख रुपये में यह पशु मिल जाते हैं, जो पांच से लेकर 15 लीटर तक दूध देने में सक्षम होते हैं।
इसी प्रकार मिनी कामधेनु योजना के तहत 30 लाख रुपये में 50 गाय व भैंस मिला कर दिये जाते हैं। वहीं माइक्रो समेत अन्य योजनाओं के तहत भी लोगाें ंको पशुपालन कर दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए बढ़ावा दिया जाता है। पिछले एक वर्ष पहले जिले में करीब सात हजार लीटर दूध का उत्पादन होता था लेकिन कामधेनु योजना चलाए जाने के बाद नौ हजार 30 लीटर दूध का उत्पादन किया जा रहा है। जिले में विभिन्न प्रजातियों के पशुओं के छह लाख पशु पालक हैं, जो गाय, भैंस, भेड़, बकरी समेत अन्य पशुओं का पालन कर दूध उत्पादन कर अपनी रोजी रोटी चलाते हैं।
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दूधवालाें को संरक्षण देने के लिए कोई सरकारी संस्था नहीं बनाई गई है। दूध उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए पराग नामक संस्था बनाई गई है, जो लोगों से दूध इकट्ठा कर उसे दूसरे जिले में ब्रिकी कराने का काम करती है। जिले में दूध का बढ़ावा देने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिसका कारण है कि अबतक पांच लोगों को कामधेनु योजना के तहत 100 गाय व भैंस दी गई।
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बता दें कि प्रदेश सरकार ने दूध उद्योग को बढ़वा देने के लिए आधा दर्जन से अधिक योजनाएं चलाई हैं। इनमें कामधेनु, मिनी कामधेनु, म्राइको, म्राइक्रो कामधेनु, कुक्कुट, कार्मशियल ब्वायलर समेत अन्य योजनाएं शामिल हैं। योजना के तहत लोगों को एक करोड़ 20 लाख रुपया जमा करने पर कामधेनु योजना के तहत अच्छी नस्ल की सौ गाय व भैंस मिला कर दी जाती है। जिसमें उसको 35 प्रतिशत की छूट है। लगभग 80 लाख रुपये में यह पशु मिल जाते हैं, जो पांच से लेकर 15 लीटर तक दूध देने में सक्षम होते हैं।
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इसी प्रकार मिनी कामधेनु योजना के तहत 30 लाख रुपये में 50 गाय व भैंस मिला कर दिये जाते हैं। वहीं माइक्रो समेत अन्य योजनाओं के तहत भी लोगाें ंको पशुपालन कर दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए बढ़ावा दिया जाता है। पिछले एक वर्ष पहले जिले में करीब सात हजार लीटर दूध का उत्पादन होता था लेकिन कामधेनु योजना चलाए जाने के बाद नौ हजार 30 लीटर दूध का उत्पादन किया जा रहा है। जिले में विभिन्न प्रजातियों के पशुओं के छह लाख पशु पालक हैं, जो गाय, भैंस, भेड़, बकरी समेत अन्य पशुओं का पालन कर दूध उत्पादन कर अपनी रोजी रोटी चलाते हैं।
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दूधवालाें को संरक्षण देने के लिए कोई सरकारी संस्था नहीं बनाई गई है। दूध उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए पराग नामक संस्था बनाई गई है, जो लोगों से दूध इकट्ठा कर उसे दूसरे जिले में ब्रिकी कराने का काम करती है। जिले में दूध का बढ़ावा देने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिसका कारण है कि अबतक पांच लोगों को कामधेनु योजना के तहत 100 गाय व भैंस दी गई।