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पांच साल में एक हजार हेक्टेयर जंगल खाक

Fri, 20 May 2016 12:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मिर्जापुर।
ब्यूरो/अमर उजाला, मिर्जापुर। Updated Fri, 20 May 2016 12:19 AM IST
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 In five years, around a thousand hectares of forest
अहरौरा जंगल में लगी आग। - फोटो : mirzapur
पारा के चढ़ने के साथ ही हर वर्ष जंगलों के दहकने के कारण वनों का नाश हो रहा है। हालत यह है कि बीते पांच वर्षों में जिले के एक हजार हेक्टेयर जंगल खाक हो गए। इसमें मड़िहान, सिरसी और ड्रमंडगंज के रेंज शामिल हैं जहां अगलगी की घटनाओं में हजारों छायादार वृक्ष और बेशकीमती लकड़ियां स्वाहा हो गईं। इतना ही नहीं वनों की आग के चलते कई छोटे बड़े जंगली जानवर काल कवलित हो गए।
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साधन के अभाव में जंगली आग पर काबू होने में कई दिन लग जाते हैं। वनकर्मियों के पास खुद की रक्षा करने के लिए ही पर्याप्त इंतजाम नहीं है ऐसे में उनसे वनों की आग से रक्षा करना पंगु के पहाड़ चढ़ने जैसा ही है। 
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बीते पांच वर्षों में हर वर्ष अप्रैल से जून के महीनों के बीच मिर्जापुर के जंगलों में आग लगने की कई घटनाएं हुईं। सबसे अधिक घटनाएं मड़िहान, सिरसी और ड्रमंडगंज रेंज में हुईं। बेला, दाढ़ीराम, मड़िहान, कोटवां, सरसो सेमरी, धुरकरी, शेरुआं, राजापुर झरीनगरी, इमलीपोखर, गजरिया, देवरी, सोनौहां, सपहीं, बगाही, ससवां, हरदी, सोनगढ़ा, राजपुर, बंजारी और लहुरियादह के जंगल बीते वर्षों में दहकते रहे हैं।
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इन जंगलों के जलने से कट सागौन, गूलर, गोल्ड मोहर, कंजी, आंवला, चिलबिल, बहेड़ा, नीम,  महुआ, इमली, अरूस, पीपल, पाकड़, सागौन, शीशम के पेड़ नष्ट हो गए। कई कई किलोमीटर तक जले पेड़ों की राख अब भी दिखाई दे रही है। जंगली आग से कई बेशकीमती जड़ी बूटियां भी नष्ट हो चुकी हैं।



जंगली आग से हिरन, भालू के बच्चे, मोर, बंदर, लकड़बग्घे आदि छोटे जानवर भी काल कवलित होते रहे हैं।  मड़िहान रेंजर रमेशचंद्र पाठक ने कहा कि ऊपर से गुजरे हाईटेंशन तारों में होने वाली स्पार्किंग के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाएं होती हैं। 


उधर सिरसी रेंज के रेंजर मनीष कुमार ने कहा कि गर्मी में महुआ बीनने वालों द्वारा भी लगाई गई आग जंगल में फैलती है। इससे काफी नुकसान होता है।
 
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