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Mirzapur News: वेंटिलेटर पर अस्पताल की लिफ्ट, गर्भवती और गंभीर मरीजों को परेशानी
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इमरजेंसी के वपास की बंद पड़ी लिफ्ट। स्रोत- संवाद
- एक वर्ष पहले लगी नई लिफ्ट दो-तीन महीने बाद ही हुई बंद, पुराने भवन की दोनों लिफ्टें पहले से खराब
मिर्जापुर। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध मंडलीय अस्पताल और जिला महिला अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए लगाई गई लिफ्टें लंबे समय से बंद हैं। लाखों की लागत से बने नए भवन में करीब एक वर्ष पहले लगाई गई आधुनिक लिफ्ट महज दो-तीन महीने तक चलने के बाद खराब हो गई। तब से वह बंद हैं। मरीजों की सुविधा के लिए लगाया गया यह उपकरण अब उपयोग में नहीं आ रहा है।
अस्पताल के पुराने भवन की दोनों लिफ्टें भी वर्षों पहले खराब हो चुकी हैं। समय पर मरम्मत और रखरखाव नहीं होने से उनकी स्थिति जर्जर हो गई है। अब तक वहां नई लिफ्ट नहीं लगाई गई है। दूसरी ओर, नए भवन में लगी नई लिफ्ट भी लंबे समय से बंद है। यदि इसे जल्द चालू नहीं कराया गया तो इसकी स्थिति भी पुराने भवन की लिफ्टों जैसी हो सकती है। लिफ्ट बंद रहने का सबसे अधिक असर गंभीर मरीजों, बुजुर्गों, दिव्यांगों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है। जिला महिला अस्पताल में प्रसव और जांच के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को सीढ़ियां चढ़कर ऊपर जाना पड़ता है। वहीं मंडलीय अस्पताल में स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर आने वाले मरीजों को भी सीढ़ियों के सहारे ऊपर ले जाना पड़ता है, जिससे मरीजों और तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में आधुनिक सुविधाओं का दावा तो किया जाता है, लेकिन बुनियादी व्यवस्था ठप है। कई बार शिकायत करने के बावजूद लिफ्ट चालू नहीं कराई गई।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से नई लिफ्ट के संचालन और रखरखाव पर लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन समय पर मरम्मत नहीं होने से मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। यदि जल्द व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई तो नई लिफ्ट के भी पूरी तरह अनुपयोगी होने की आशंका बनी रहेगी।
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वर्जन
लिफ्ट के संचालन में समस्या आई है। इसे दिखवाया जाएगा। मरम्मत कराकर लिफ्ट को चालू कराया जाएगा।
डॉ. सचिन किशोर, सीएमएस, मंडलीय अस्पताल
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मिर्जापुर। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध मंडलीय अस्पताल और जिला महिला अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए लगाई गई लिफ्टें लंबे समय से बंद हैं। लाखों की लागत से बने नए भवन में करीब एक वर्ष पहले लगाई गई आधुनिक लिफ्ट महज दो-तीन महीने तक चलने के बाद खराब हो गई। तब से वह बंद हैं। मरीजों की सुविधा के लिए लगाया गया यह उपकरण अब उपयोग में नहीं आ रहा है।
अस्पताल के पुराने भवन की दोनों लिफ्टें भी वर्षों पहले खराब हो चुकी हैं। समय पर मरम्मत और रखरखाव नहीं होने से उनकी स्थिति जर्जर हो गई है। अब तक वहां नई लिफ्ट नहीं लगाई गई है। दूसरी ओर, नए भवन में लगी नई लिफ्ट भी लंबे समय से बंद है। यदि इसे जल्द चालू नहीं कराया गया तो इसकी स्थिति भी पुराने भवन की लिफ्टों जैसी हो सकती है। लिफ्ट बंद रहने का सबसे अधिक असर गंभीर मरीजों, बुजुर्गों, दिव्यांगों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है। जिला महिला अस्पताल में प्रसव और जांच के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को सीढ़ियां चढ़कर ऊपर जाना पड़ता है। वहीं मंडलीय अस्पताल में स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर आने वाले मरीजों को भी सीढ़ियों के सहारे ऊपर ले जाना पड़ता है, जिससे मरीजों और तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में आधुनिक सुविधाओं का दावा तो किया जाता है, लेकिन बुनियादी व्यवस्था ठप है। कई बार शिकायत करने के बावजूद लिफ्ट चालू नहीं कराई गई।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से नई लिफ्ट के संचालन और रखरखाव पर लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन समय पर मरम्मत नहीं होने से मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। यदि जल्द व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई तो नई लिफ्ट के भी पूरी तरह अनुपयोगी होने की आशंका बनी रहेगी।
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लिफ्ट के संचालन में समस्या आई है। इसे दिखवाया जाएगा। मरम्मत कराकर लिफ्ट को चालू कराया जाएगा।
डॉ. सचिन किशोर, सीएमएस, मंडलीय अस्पताल