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जेल से छूटी महिला अपहरणकर्ता, परिवार ने अपनाने से किया इंकार

Thu, 28 May 2020 10:24 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 28 May 2020 10:24 PM IST
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Female kidnapper released from jail, but family refused to adopt
जिगना। चार वर्ष पूर्व गांव से एक बालिका के अपहरण में सजा काट रही महिला अपहरणकर्ता को गुरुवार की सुबह सजा पूरी होने पर जेल से रिहा कर दिया गया। परिवार के न आने पर जेल प्रशासन उसे उसके घर ले गया, पर परिवार ने अपनाने से इंकार कर दिया। घंटो पंचायत के बाद परिजन नहीं माने तो डीएम सुशील कुमार पटेल के आदेश पर जेल प्रशासन ने महिला और उसकी तीन वर्ष की पुत्री को मड़िहान के स्वाधार गृह में भेज दिया।
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जिगना थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने सात मार्च 2016 को गांव निवासी सौखीलाल की तीन वर्षीय पुत्री शालू क अपहरण कर फरार हो गई थी। बालिका के साथ महिला के फरार होने पर सौखी लाल ने आठ मार्च को थाने पर तहरीर दिया। मुकदमा दर्ज करने क बाद पुलिस ने दो माह बाद अहपरण की गई तीन वर्षीय शालू को राजस्थान के जयपुर से बरामद कर महिला को गिरफ्तार किया था। जेल में बंद होने पर महिला गर्भवती थी। जेल में ही उसने बालिका को जन्म दिया। तब से वह जेल में बंद थी। लाकडाउन के दौरान बुधवार को अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम जितेंद्र मिश्रा की अदालत ने पहली सजा सुनाते हुए महिला को चार वर्ष कैद और पांच सौ जुर्माने की सजा सुनाई। महिला की चार वर्ष की सजा पूरी हो चुकी थी तो जेल अधीक्षक अनिल राय ने उसे जेल से रिहा किया। उसे लेने घर का कोई सदस्य नहीं आया तो जेल प्रशासन ने गाड़ी से उसे उसके घर भेजवाया। घर पहुंचने पर महिला के माता-पिता और भाई ने उसे अपनाने से इंकार कर दिया। परिजनों का कहना था कि उसने गांव की बालिका का अपहरण किया, बिना शादी किए गर्भवती होकर बालिका को जन्म दिया। उसके कृत्य से परिवार के लोग आहत है। इस कारण उसे नहीं अपना सकते। जेल अधीक्षक अनिल राय ने बताया कि परिवार के इंकार के बाद डीएम के आदेश पर महिला और उसकी पुत्री को मड़िहान के स्वधार गृह में भेजा गया।
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आठ सप्ताह के लिए फिर बढ़ाई गई 28 बंदियों की पैरोल
मिर्जापुर। जिला कारागार में बंद 28 बंदियों को कोरोना संक्रमण के चलते आठ सप्ताह के पैरोल पर छोड़ा गया था। आठ सप्ताह एक जून को समाप्त हो रहा था। कोरोना का संक्रमण खत्म नहीं हुआ है। इसे देखते हुए इन 28 बंदियों के पैरोल को आठ सप्ताह के लिए बढ़ा दिया गया है।
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कोरोना का संक्रमण बढ़ने के चलते जेल में क्षमता से बंदियों की संख्या अधिक होने के कारण सामाजिक दूरी का पालन कराए जाने के लिए जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से 28 बंदियों को आठ सप्ताह के पैरोल पर छोड़ा गया था। एसपी ने संबंधित थानाध्यक्ष को निर्देश दिया कि वे उन पर नजर रखें। बंदियों को हिरादयत दी थी कि वे पैरोल खत्म होने पर जेल में आ जाएंगे। नहीं तो उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। ोठ सप्ताह का पैरोल एक जून को खत्म हो रहा था। जेल अधीक्षक अनिल राय ने बताया कि कोरोना संक्रमण खत्म नहीं हुआ है। उच्चाधिकारियों के आदेश पर उन सभी 28 बंदियों की पैरोल को आठ सप्ताह के लिए और बढ़ा दिया गया है।
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