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इंदिरा गांधी से लेकर जुकरबर्ग तक की जुड़ी है आस्था

Thu, 14 Apr 2016 12:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मिर्जापुर
ब्यूरो/अमर उजाला, मिर्जापुर Updated Thu, 14 Apr 2016 12:40 AM IST
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Featuring mountain Ashtabhuja
भगवान अवधूत का आश्रम
विंध्य धरा धाम पर मां भगवती का साक्षात आशीर्वाद बरसता है। यही वजह है कि यहां कई ख्यातिलब्ध साधकों ने अपने आश्रम स्थापित किए हैं। अधिकांश आश्रम अष्टभुजा पहाड़ी के सुरम्य वातावरण में बनाए गए हैं, जहां माना जाता है कि पुण्यात्माएं सदा ही विचरती रहती हैं। माता आनंदमयी, देवरहा हंस बाबा और फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग के गुरु नीम करौली बाबा के आश्रम अपने आप में इतिहास को समेटे हुए हैं।
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इन आश्रमों की पहाड़ के ऊपर स्थापना के बाद से पहाड़ की हालत भी सुधरी है और लोगों का आवागमन आसान हुआ है। सबसे पहले बात करते हैं अष्टभुजा पहाड़ी पर स्थित मार्क जुकरबर्ग के गुरु नीम करौली बाबा के आश्रम का, जो रहस्यों से भरा है। बताया जाता है कि मिर्जापुर के  प्रमुख व्यवसायी बसंत लाल अग्रहरि ने वर्ष 1924 में अष्टभुजा पहाड़ी पर लाखों रुपये की लागत से भवन का निर्माण कराया था। बताया जाता है कि उनके भाई हीरालाल अग्रवाल ने यहां वैभव का प्रदर्शन शुरू कर दिया। इससे उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
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इस भवन की व्यवस्था जिसने भी देखा, उसका व्यक्तिगत नुकसान हुआ। बाद में इसे नीम करौली बाबा को दे दिया गया, जिसमें उन्होंने आश्रम खोल दिया। इसी प्रकार वर्ष 1970 के दशक में माता आनंदमयी ने अष्टभुजा पहाड़ पर आश्रम खोला। उनकी शिष्या तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं।
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वह कई बार माता आनंदमयी के आश्रम में पहुंचीं। प्रधानमंत्री के आने के बाद से ही अष्टभुजा पहाड़ पर सड़कों का निर्माण हुआ और अन्य सुविधाएं मिलीं। कहा जाता है कि माता आनंदमयी को मां भगवती ने साक्षात दर्शन दिया था। अष्टभुजा पहाड़ पर ही अवधूत भगवान राम ने सिद्धी प्राप्त की थी।


 सिद्धी स्थल के पास ही अवधूत भगवान राम का आश्रम है, जिसके संचालक विशाल बाबा हैं। सीता कुंड के पास बंगाल से आई बंगाली माता का आश्रम है, जहां हजारों भक्तों का आना जाना लगा रहता है। पास में ही देवराहा हंस बाबा का भी आश्रम है लेकिन उनका मुख्य आश्रम महुवरिया के पास स्थित है, जहां बाबा के सानिध्य में पांच हजार गायें पाली जाती हैं। यह क्षेत्र वृंदावन की तरह दिखता है, जहां गायें विचरती रहती हैं।
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