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विरोध प्रदर्शन के बाद 34 घंटे बाद काम पर लौटे कर्मचारी

Tue, 06 Oct 2020 11:57 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 06 Oct 2020 11:57 PM IST
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Employees returned to work after 34 hours after protests
इमामगंज स्थित बरतर के पास हैंडपंप से पानी भरते लोग। - फोटो : MIRZAPUR
मिर्जापुर। विद्युत विभाग के कर्मचारी मंगलवार को फतहां स्थित पावर कारपोरेशन के मुख्य अभियंता कार्यालय परिसर में जुटे और निजीकरण का विरोध किया। कहा कि इस को तत्काल वापस लिया जाए और कर्मचारियों की मांगे पूरी की जाए।शाम तक लखनऊ में प्रदेश समिति के पदाधिकारियों के साथ सरकारी की वार्ता सार्थक रहने के बाद कर्मचारी रात आठ बजे काम पर लौट आए।
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दोपहर में हाईडिल कालोनी में धरना प्रदर्शन् के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यह निजी करण आम जनता के हित में नहीं है। वक्ताओं ने कहा कि मंगलवार की दोपहर तीन बजे से शासन और ऊर्जा मंत्री के साथ संगठन के पदाधिकारियों की वार्ता चल रही थी। कर्मचारियों के विरोध का स्व बुलंद कर रहे थे। शाम तक कर्मचारी धरना स्थल पर डटे रहे। बिजली कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन के दौरान नगर और ग्रामीण क्षेत्र में बिजली व्यवस्था न रहने पर डीएम सुशील कुमार पटेल व एडीएम यू पी सिंह ने नगर के सखौरा,जंगी रोड पथरिया आदि केंद्रों का निरीक्षण किया और वहां तैनात कर्मचारियों को सतर्क रहने को कहा। शाम को शासन और बिजली विभाग के पदाधिकारियों के बीच वार्ता सार्थक रही। अधिशासी अभियंता मनोज कुमार यादव ने बताया कि सरकार से वार्ता के बाद निजीकरण न करने के आश्वासन पर पदाधिकारियों ने धरना समाप्त करने का निर्णय लिया। इसके बाद मिर्जापुर जिलेे में भी धरना समाप्त हो गया। इसके बाद सभी कर्मचारी काम पर वापस लौट आए। रात आठ बजे नगर और ग्रामीण क्षेत्र में बिजली बहाल कर दी गई। जहां परेशानी आई। उसे दुरुस्त कराया गया। अधिशासी अभियंता ने कहाकि अमीर या गरीब सभी बकाएदार अपना बिजली का बिल जमा कर दें। बिल न जमा करने वालों के खिलाफ विभाग अब मुकदमा दर्ज कराएगा।
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इससे पहले मंगलवार की सुबह होते ही बिजली कटौती से रात भर के जागे नागरिक व ग्रामीण पानी के लिए हैंडपंपों के आगे जुट गए। थोड़ी ही देर में पानी के लिए मारपीट की नौबत आ गई। हालांकि मामला मारपीट तक नहीं पहुंचा। सोमवार को तो किसी प्रकार लोगों ने काम चलाया लेकिन शाम होते होते पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो गई। लोग पानी के लिए इधर- उधर दौड़ने लगे। किसी तरह खाना बना लोगों ने कुछ खाया कुछ नहीं खाया। इसी प्रकार रात भ ऊंघते हुए बीती। मच्छरों व भीषण उमस के चलते लोग कमरों में रह नहीं पा रहे थे और बाहर खुले में ओस के चलते कोरोना का भय सता रहा था। इसी प्रकार बिजली के आने की आशा लेकर किसी प्रकार लोगों ने रात काटी। सुबह होते ही पानी के लिए फिर से भाग दौड़ शुरू हो गई। नगर के वासलीगंज, मुकेरी बाजार, इमामबाड़ा, पुरी कटरा, पुरानी दशमी, रमई पट्टी व अन्य मोहल्लों में बुरा हाल रहा।
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इस हड़ताल या कार्य बहिष्कार का सबसे दु:खद या गंदा पहलू यह रहा कि जो उपभोक्ता अपने मेहनत की कमाई से बिजली का बिल भरता है। उसने तो पूरी रात अंधेरे में जागते मच्छरों से लड़ते हुए बिताया लेकिन जो कर्मचारी हड़ताल पर है और कार्य बहिष्कार पर है। वह पूरी रात बिजली के पंखे में चैन से सोया। वह तो जिला प्रशासन को जब इस बात की भनक लगी तो वह सुबह ही सखौरा उपकेंद्र पर पहुंच गया और कालोनी की बिजली कटवा दी। यह बिजली कर्मचारियों की मानसिकता को दर्शाता है। उनको अपने सुख और सुविधा की फिक्र है लेकिन जो इसके लिए भुगतान कर रहा है। उसकी जरूरतों की उनके लिए कोई कीमत नहीं है।
जिले में एक ओर हाहाकार मचा है वहीं दूसरी ओर विद्युत विभाग के अभियंताओं ने अपना मोबाइल आउट ऑफ सर्विस कर लिया है। मुख्य अभियंता फोन ही नहीं रिसीव कर रहे हैं। इसका यह अनुमान लगाया जा रहा है कि विद्युत कर्मियों की हड़ताल अभी जारी रहेगी। हालांकि विद्युत विभाग के इस रवैए के विरोध में कुछ नागरिक संगठन भी आ गए हैं। उन्होंने विरोध प्रदर्शन का निर्णय लिया है। उनका आरोप है कि अपने स्वार्थ के चलते विद्युत विभाग जनता को परेशान कर रहा है। सरकार और विभाग की लड़ाई में निर्दोष जनता नहीं पिसनी चाहिए। बिजली की हड़ताल से पूरे जिले में लोग एक एक बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं । हैंडपंपों पर व जहां कहीं उपलब्ध है, वहां टैंकरों के पास लोगों की भीड़ लगी हुई है। एक एक बाल्टी पानी के लिए तू तू मैं मैं और लड़ाई हो रही है। छोटे-छोटे बच्चे और महिलाएं भी अपने अपने बर्तन लेकर पानी लेने के लिए सड़कों पर निकल पड़े हैं। पूरे जिले में अराजकता की स्थिति है। लेकिन जिला प्रशासन के आला अधिकारी अभी भी चैन की नींद सो रहे हैं।

बिजली के चलते हुई पानी की किल्लत नहाने पर भी पड़ी। हालांकि इसका इलाज लोगों ने ढूंढ लिया और चल दिए गंगा स्नान करने। मंगलवार की सुबह अधिकांश गंगा तटों पर स्नान करने वालों की भीड़ रही। क्या स्त्री क्या पुरुष और बच्चे। सभी गंगा के शीतल जल का आनंद लेने के लिए आ गए। सुबह आठ बजे के समय तो घाटों पर सिर ही सिर दिखाई दे रहे थे। नगर के फतहां घाट, कचहरी घाट, बरियाघाट, सुंदर घाट,ओलियर घाट, बदलीघाट, बाबा घाट, पक्का घाट, संकठा घाट, नारघाट, गऊघाट आदि जगहों पर काफी भीड़ भाड़ रही। लोग दोपहर 12 बजे तक स्नान करते रहे। कई लोग पानी भर कर भी ले जाते दिखायी दिए।
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