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Mirzapur News: आईआईवीआर की उन्नत किस्मों और तकनीकों से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
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सीखड़ भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के संबोधित करते निदेशक डॉ राजेश कुमार। -सोशल मीडिया।
सब्जी अनुसंधान संस्थान ने मनाया 36वां स्थापना दिवस
सीखड़। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर), अदलपुरा में सोमवार को 36वां स्थापना दिवस मनाया गया। समारोह में देशभर से वैज्ञानिक, प्रगतिशील किसान, छात्र-छात्राएं और संस्थान के कार्मिक शामिल हुए।
मुख्य अतिथि डॉ. पीएस पांडेय, कुलपति, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा ने कहा कि सब्जियां पोषण और स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का माध्यम हैं। आईआईवीआर की उन्नत किस्में और तकनीकें किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने जलवायु स्मार्ट फसलों, पोषक तत्वों से भरपूर किस्मों और शहरी खेती पर जोर दिया। अध्यक्षता कर रहे डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि आईआईवीआर ने देश की सब्जी क्रांति को नई दिशा दी है। निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि संस्थान अब तक 150 से अधिक उन्नत किस्में और संकर विकसित कर चुका है।
इस दौरान उत्कृष्ट कार्य के लिए डॉ. धनंजय प्रताप सिंह, एसके सिंह, बोबी कुमार और अरुण कुमार को सम्मानित किया गया। तकनीक हस्तांतरण के लिए तीन संस्थानों के साथ एमओयू भी हुआ। संचालन डॉ. नीरज सिंह ने किया।
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सीखड़। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर), अदलपुरा में सोमवार को 36वां स्थापना दिवस मनाया गया। समारोह में देशभर से वैज्ञानिक, प्रगतिशील किसान, छात्र-छात्राएं और संस्थान के कार्मिक शामिल हुए।
मुख्य अतिथि डॉ. पीएस पांडेय, कुलपति, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा ने कहा कि सब्जियां पोषण और स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का माध्यम हैं। आईआईवीआर की उन्नत किस्में और तकनीकें किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने जलवायु स्मार्ट फसलों, पोषक तत्वों से भरपूर किस्मों और शहरी खेती पर जोर दिया। अध्यक्षता कर रहे डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि आईआईवीआर ने देश की सब्जी क्रांति को नई दिशा दी है। निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि संस्थान अब तक 150 से अधिक उन्नत किस्में और संकर विकसित कर चुका है।
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इस दौरान उत्कृष्ट कार्य के लिए डॉ. धनंजय प्रताप सिंह, एसके सिंह, बोबी कुमार और अरुण कुमार को सम्मानित किया गया। तकनीक हस्तांतरण के लिए तीन संस्थानों के साथ एमओयू भी हुआ। संचालन डॉ. नीरज सिंह ने किया।
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