{"_id":"59c951604f1c1bf3538b464e","slug":"center-of-ganga-mother-and-temple-energy","type":"story","status":"publish","title_hn":"गंगा, मां और मंदिर ऊर्जा के केंद्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गंगा, मां और मंदिर ऊर्जा के केंद्र
mirzapur news
Updated Tue, 26 Sep 2017 12:26 AM IST
विज्ञापन
संत मोरारी बापू ।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मोरारी बापू ने सोमवार को कथा में मन की सुंदरता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वह चित्रकार कितना महान होगा जिसने संसार की रचना की है। सोमवार की कथा में उन्होंने कहा कि प्रेम नहीं होता तो इंसान के अंत:करण में द्वेष खुद ही उत्पन्न हो जाता है। अहंकार ने ही मनुष्य को सबसे ज्यादा परेशान किया है। गंगा, मां और मंदिर ऊर्जा के केंद्र हैं।
उन्होंने पांचवें दिन कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि आध्यात्मिक व्यक्ति निर्भय होता है। कहा कि रामकृष्ण परमहंस एक गणिका के रूप को अपलक देखते रहे तो लोगों ने उनके बारे में गलत धारणा बना ली मगर वह तो संसार के बहाने ईश्वर के सौंदर्य को देख रहे थे। कहा कि जब कृष्ण ने तुझे इतना सुंदर बनाया है तो सोचो वह कितना सुंदर होगा। चित्रकार जिसकी आंख में मां की उपासना होगी वह जिसको देखेगा वह सुंदर होगा। कहा कि परमात्मा ने यदि तुम्हे रूप दिया तो प्रेमभाव से लोगों को देखो। किसी का सौंदर्य देख कर यह मत सोचो कि यह मेरे घर आये बल्कि यह सोचो की यह मेरे घट आए। कहा कि मां से मांगते हैं कि रूपम देही, जयम देही इसका अर्थ है कि मां हमें तन सुंदर दीजिये, मन सुंदर दीजिये आत्मा की आवरण को हटा कर मुझे आत्म स्वरूप दीजिये। जयम देही का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मै जय नहीं मांगता दूसरों की पराजय कर मुझे जय नहीं चाहिए। हमको मन की शक्ति देना मन विजय करें दूसरों की जय से पहले खुद की जय करें, लेकिन मैं मां से जय नहीं मांगूगा, मां देती हैं तो अकेला नहीं रखूंगा, बांट दूंगा। विजय की खुशी अकेला नहीं बांटना चाहिए। एक भक्त ने जब उनसे पूछा कि स्वर्ग नरक होता है कि नहीं तो उन्होंने कहा स्वर्ग तो मां विन्ध्यवासिनी के आंगन में है, यदि नरक है तो मै वहां जाना चाहूंगा क्योंकि वहां के लोग कष्ट में होंगे मै उन्हें रामकथा सुनाऊंगा ताकि उनका कष्ट दूर हो सके। कहा कि गालिब ने कहा था कि स्वर्ग है तो खबर नहीं लेकिन ख्याल अच्छा है।
धोनी मिला तो पीठ थपथपाऊंगा
विन्ध्याचल। भले ही इंदौर में खेले गए तीसरे वन डे में धोनी ने बल्ले से कोई कमाल न किया हो लेेकिन मोरारी बापू ने पांचवें दिन की कथा में पूर्व भारतीय कप्तान की जमकर सराहना की। कहा कि सुबह पता चला कि भारत ने तीसरा वनडे भी जीत लिया। कहा कि हर बैट्समैन हर मैच में शतक नहीं जमा सकता, उसे पराजय पचाना आना चाहिए। धोनी ने विराट और नीचे के खिलाड़ियों को सिखा कर आगे बढ़ाया है और अब शांतचित्त हो कर विराट के नीचे ही खेल रहा है। कहीं मिला तो उसकी पीठ थपथपाऊंगा। इस पर रांची से आए भक्तों ने उन्हें रांची आने को कहा।
विज्ञापन
गंगा की तरह बहता हूं
विन्ध्याचल। एक भक्त के सवाल कि आप किस भाव में रामकथा कहते हैं के जवाब में मोरारी बापू ने कहा कि मै गंगा की तरह बहता हूं सागर में मिलना मेरा उद्देश्य नही है। मुक्ति का तो सवाल ही नहीं। मै तुझे गाऊं तू मुझे श्रोता के रूप में आ कर सुन भगवान यही कामना है।
विज्ञापन
उन्होंने पांचवें दिन कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि आध्यात्मिक व्यक्ति निर्भय होता है। कहा कि रामकृष्ण परमहंस एक गणिका के रूप को अपलक देखते रहे तो लोगों ने उनके बारे में गलत धारणा बना ली मगर वह तो संसार के बहाने ईश्वर के सौंदर्य को देख रहे थे। कहा कि जब कृष्ण ने तुझे इतना सुंदर बनाया है तो सोचो वह कितना सुंदर होगा। चित्रकार जिसकी आंख में मां की उपासना होगी वह जिसको देखेगा वह सुंदर होगा। कहा कि परमात्मा ने यदि तुम्हे रूप दिया तो प्रेमभाव से लोगों को देखो। किसी का सौंदर्य देख कर यह मत सोचो कि यह मेरे घर आये बल्कि यह सोचो की यह मेरे घट आए। कहा कि मां से मांगते हैं कि रूपम देही, जयम देही इसका अर्थ है कि मां हमें तन सुंदर दीजिये, मन सुंदर दीजिये आत्मा की आवरण को हटा कर मुझे आत्म स्वरूप दीजिये। जयम देही का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मै जय नहीं मांगता दूसरों की पराजय कर मुझे जय नहीं चाहिए। हमको मन की शक्ति देना मन विजय करें दूसरों की जय से पहले खुद की जय करें, लेकिन मैं मां से जय नहीं मांगूगा, मां देती हैं तो अकेला नहीं रखूंगा, बांट दूंगा। विजय की खुशी अकेला नहीं बांटना चाहिए। एक भक्त ने जब उनसे पूछा कि स्वर्ग नरक होता है कि नहीं तो उन्होंने कहा स्वर्ग तो मां विन्ध्यवासिनी के आंगन में है, यदि नरक है तो मै वहां जाना चाहूंगा क्योंकि वहां के लोग कष्ट में होंगे मै उन्हें रामकथा सुनाऊंगा ताकि उनका कष्ट दूर हो सके। कहा कि गालिब ने कहा था कि स्वर्ग है तो खबर नहीं लेकिन ख्याल अच्छा है।
विज्ञापन
धोनी मिला तो पीठ थपथपाऊंगा
विन्ध्याचल। भले ही इंदौर में खेले गए तीसरे वन डे में धोनी ने बल्ले से कोई कमाल न किया हो लेेकिन मोरारी बापू ने पांचवें दिन की कथा में पूर्व भारतीय कप्तान की जमकर सराहना की। कहा कि सुबह पता चला कि भारत ने तीसरा वनडे भी जीत लिया। कहा कि हर बैट्समैन हर मैच में शतक नहीं जमा सकता, उसे पराजय पचाना आना चाहिए। धोनी ने विराट और नीचे के खिलाड़ियों को सिखा कर आगे बढ़ाया है और अब शांतचित्त हो कर विराट के नीचे ही खेल रहा है। कहीं मिला तो उसकी पीठ थपथपाऊंगा। इस पर रांची से आए भक्तों ने उन्हें रांची आने को कहा।
विज्ञापन
गंगा की तरह बहता हूं
विन्ध्याचल। एक भक्त के सवाल कि आप किस भाव में रामकथा कहते हैं के जवाब में मोरारी बापू ने कहा कि मै गंगा की तरह बहता हूं सागर में मिलना मेरा उद्देश्य नही है। मुक्ति का तो सवाल ही नहीं। मै तुझे गाऊं तू मुझे श्रोता के रूप में आ कर सुन भगवान यही कामना है।