{"_id":"56f982064f1c1bfa02f007a2","slug":"animal-waste-in-the-sewer-shed","type":"story","status":"publish","title_hn":"नाले में बहाया जा रहा पशुओं का अपशिष्ट ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नाले में बहाया जा रहा पशुओं का अपशिष्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, मिर्जापुर।
Updated Tue, 29 Mar 2016 12:42 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नगर के मध्य तरकापुर मुहल्ले में पशु वधशाला संचालित होने के कारण जनमानस परेशान है। कभी नलों से लाल पानी आता है तो कभी नालियों में पशुओं का मांस बहते हुए देखा जाता है। रोजाना पशुओं के काटे जाने से उसका अपशिष्ट नालियों में बहाया जा रहा है, जिससे मुहल्ले के लोग संक्रामक बीमारियों की चपेट में आते जा रहे हैं, वहीं संबंधित विभाग के अधिकारी सब जानकर भी अनजान बने हुए हैं।
नगर के तरकापुर मुहल्ले में चल रहे पशु वधशाला के कारण लोगों को तमाम प्रकार की दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। विभिन्न संगठनों द्वारा शहर के मध्य स्थित स्लाटर हाउस को शहर से दूर अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने की कई बार मांग की गई, लेकिन संबंधित विभाग उदासीन बना हुआ है।
नगर के बीचो-बीच तरकापुर मुहल्ले में धड़ल्ले से पशुआें का वध किया जा रहा है और उसका अपशिष्ट नालियों में बहाया जा रहा है, जिससे लोगाें का जीना दुश्वार हो गया है। मार्ग पर खुले में मांस की बिक्री होने से हमेशा दुर्गंध बनी रहती है, जिससे उधर से लोगों का गुजरना काफी मुश्किल होता है।
विज्ञापन
कभी-कभी तो लोगों के घरों में लगे नलों से लाल पानी भी आने लगता है, जिससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
पशु वधशाला के चंद कदम की दूरी पर जिला अस्पताल, मदरसा, कचहरी सहित कई प्राचीन मंदिर भी हैं, बावजूद इसके रोकथाम के लिए महकमा कोई कारगर कदम नहीं उठा रहा है। धड़ल्ले से स्लाटर हाउस संचालित होने और खुले में मांस की बिक्री किए जाने से जनजीवन का बुरा हाल है।
आक्रोशित लोगों का आरोप है कि स्लाटर हाउस के चलते नलों से निकलने वाला पानी दूषित हो गया है, जिससे बच्चों के साथ बड़ाें को भी तमाम प्रकार की संक्रमक बीमारियों के होने का खतरा बना हुआ है।
विज्ञापन
नगर के तरकापुर मुहल्ले में चल रहे पशु वधशाला के कारण लोगों को तमाम प्रकार की दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। विभिन्न संगठनों द्वारा शहर के मध्य स्थित स्लाटर हाउस को शहर से दूर अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने की कई बार मांग की गई, लेकिन संबंधित विभाग उदासीन बना हुआ है।
विज्ञापन
नगर के बीचो-बीच तरकापुर मुहल्ले में धड़ल्ले से पशुआें का वध किया जा रहा है और उसका अपशिष्ट नालियों में बहाया जा रहा है, जिससे लोगाें का जीना दुश्वार हो गया है। मार्ग पर खुले में मांस की बिक्री होने से हमेशा दुर्गंध बनी रहती है, जिससे उधर से लोगों का गुजरना काफी मुश्किल होता है।
विज्ञापन
कभी-कभी तो लोगों के घरों में लगे नलों से लाल पानी भी आने लगता है, जिससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
पशु वधशाला के चंद कदम की दूरी पर जिला अस्पताल, मदरसा, कचहरी सहित कई प्राचीन मंदिर भी हैं, बावजूद इसके रोकथाम के लिए महकमा कोई कारगर कदम नहीं उठा रहा है। धड़ल्ले से स्लाटर हाउस संचालित होने और खुले में मांस की बिक्री किए जाने से जनजीवन का बुरा हाल है।
आक्रोशित लोगों का आरोप है कि स्लाटर हाउस के चलते नलों से निकलने वाला पानी दूषित हो गया है, जिससे बच्चों के साथ बड़ाें को भी तमाम प्रकार की संक्रमक बीमारियों के होने का खतरा बना हुआ है।