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Mirzapur News: गंगा घाटों पर बनाई वेदी, ईख से मंडप सजाकर की छठी मइया की पूजा

Mon, 20 Nov 2023 12:48 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 20 Nov 2023 12:48 AM IST
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Altar built on the Ganga ghats, Chhathi Maiya worshiped by decorating the pavilion with reeds
मिर्जापुर। महापर्व डाला छठ पर रविवार को गंगा घाट शहनाई, शंख व छठी मइया के जयकारे से गूंजते रहे। इस दौरान प्रमुख घाटों पर रंगोली बनाकर वहां पहुंचीं व्रती महिलाओं का स्वागत किया गया।
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नगर में स्थित बरियाघाट श्रद्धालुओं से पटा रहा। दोनों घाटों पर महिलाएं कमर भर पानी में खड़े होकर सूर्य के अस्त होने के इंतजार करने लगीं। जैसे ही सूर्य अस्त होने को हुआ, सूर्य देव व छठ मइया के गीतों से गंगा घाट गुंजायमान हो उठा। महिलाओं ने अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को पहला अर्घ्य देकर पुत्र की लंबी उम्र की कामना की। नगर के बरियाघाट के अलावा कचहरी घाट, पक्काघाट, संकठा घाट, नारघाट, फतहां घाट सहित अन्य घाटों पर छठ पर पूजा-अर्चना की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में सूर्योपासना का महापर्व धूमधाम से मनाया गया। विंध्य धाम क्षेत्र में अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया गया। विंध्याचल स्थित पक्काघाट रंग-बिरंगे गुब्बारों और रोलेक्स से सजाया गया था। बाजे के साथ गंगाघाटों पर पहुंची महिलाओं ने ईख से मंडप तैयार कर घाटों के किनारे वेदी बनाकर छठी मइया का पूजा-अर्चना की। तत्पश्चात घुटने पर पानी में खड़े होकर सूर्य के अस्त होने की इंतजार करने लगीं। जैसे ही सूर्य अस्त होने को हुआ, अर्घ्य देने के लिए महिलाओं में होड़ मच गई। अर्घ्य देने के दौरान जल पुलिस के साथ ही सुरक्षाकर्मी भी गंगाघाटों पर नजर गड़ाए रहे। उधर, डाला छठ महापर्व पर अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए बरियाघाट सहित अन्य घाटों पर दंडवत मुद्रा में महिलाएं जाते हुए दिखीं। इन श्रद्धालुओं के साथ प्रसाद से सजी दउरी व सूप लिए परिजन चल रहे थे। पीछे-पीछे दंडवत मुद्रा में चल रहीं महिलाएं लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं। लोगों का कहना था कि मनौतियां पूर्ण होने पर महिलाएं लिया गया संकल्प पूरा करने में जुटी रहीं।
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उधर, ग्रामीण अंचलों में धूमधाम से मनाया गया। रविवार को शाम डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए विभिन्न गंगाघाटों, जलाशयों, पोखरों के किनारे महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। व्रती महिलाओं ने घुटने भर पानी में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। दोपहर बाद से ही व्रती महिलाएं सूप में रखे कलश पर जलते दीपक के साथ छठ मइया के गीत गाते हुए घाटों पर पहुंचने लगीं। शाम तक घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंच गई। महिलाओं के साथ उनके परिजन भी सूप और प्रसाद से सजी दउरी, गन्ना आदि लिए चल रहे थे। अदलहाट क्षेत्र में अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए महिलाएं पानी में खड़े होकर सूर्य के अस्त होने में लगी रहीं। चने की घुघरी, बताशा, हलवा, पूरी, फल-फूल तथा ईख चढ़ाकर विधिवत छठ मइया को भोग लगाया। डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद महिलाएं कलश पर जलते दीपक व बाजे के साथ घर वापस आईं। रात में जागरण कर माता का भजन करने में जुटी रहीं। तालाब की ओर जाने वाले मार्गों पर जगह-जगह तोरण द्वार बनाए गए थे। जिसे झालर और बत्तियों से सजाया गया था। शाम के वक्त तालाब के किनारे जगमगाती रंग बिरंगी बत्तियां अनुपम छटा बिखेर रही थीं।
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चुनार क्षेत्र में अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए बावन जी घाट, शिवाला घाट, किला घाट, संतोषी माता मंदिर घाट, बालूघाट, रामघाट सहित अन्य गंगाघाटों पर महिला श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ा रहा। दिन ढलते ही अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर महिलाओं ने पुत्र के दीर्घायु होने की कामना की। पालिका प्रशासन द्वारा गंगाघाट पर साफ सफाई, प्रकाश, बैरीकेटिंग आदि व्यवस्थाएं चुस्त दुरुस्त रहीं। राजगढ़ क्षेत्र के नदिहार, धनसीरिया, सेमरा, खटखरिया, बघौड़ा व सक्तेशगढ़ में डाला छठ महापर्व पर अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को महिलाओं ने अर्घ्य दिया। अहरौरा क्षेत्र के विभिन्न तालाबों, पोखरा के पानी में खड़ी होकर महिलाओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। पोखरों पर साफ सफाई, पेयजल,प्रकाश का प्रबंध किया गया। शाम होने से पहले ही व्रती महिला सहित पुरुषों ने तालाब व नदियों पर डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पहुंचने लगे। पोखरा सहुआईन में छठ पर्व को लेकर काफी संख्या में आस्थावान भक्तों की भीड़ जुटी रही। राम सागर, पियरवा पोखरा, मिश्र पोखरा, दुर्गा मंदिर पर स्थित तालाब के घाटों पर डीजे की धुन पर आस्थावान भक्त थिरकते हुए पहुंच रहे थे। अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर महिलाएं हाथों में कलश पर जलते दीपक के साथ छठ गीत गाती हुईं घरों को वापस लौटीं।
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