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समितियों में यूरिया डंप, कर्मी हड़ताल पर

Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
Mirzapur
Mirzapur Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
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मिर्जापुर। जिले में कुल 68 साधन सहकारी समितियां हैं। इनमें से सिर्फ 28 समितियों पर ही कैडेट सचिव की तैनाती है। अन्य सभी समितियों पर इनकी नियुक्ति होनी है। समितियों के कर्मचारियों के पिछले कई दिनों से हड़ताल पर होने के कारण समितियों पर तालाबंदी है। खाद डंप पड़े हैं और हजारों किसान परेशान हैं। यह स्थिति तब है जबकि हाल ही में चुनार के सपा विधायक जगतंबा सिंह पटेल की शिकायत पर मंडलायुक्त पीआर मिश्रा ने डीएम गोविंद राजू, एआर कोआपरेटिव आरके मिश्रा, डीआर कोआपरेटिव को खाद वितरण के लिए तहसील कर्मियों को भी मदद में लगाने को कहा था। आदेश हुए पांच दिन गुजर गए पर उसका अनुपालन नहीं हो पा रहा है। अमर उजाला ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में खाद संकट पर जब पड़ताल की तो हर जगह खाद को लेकर त्राहिमाम दिखा।
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वेतन विसंगतियाें को लेकर 16 अगस्त से हड़ताल और तालाबंदी की वजह से किसानाें को उर्वरक नहीं मिल पा रहा है। किसानाें को तत्काल डीएपी व यूरिया की धान की फसल के लिए जरूरत है। वर्तमान समय में धान की निराई का काम चल रहा है। निराई के तुरंत बाद यूरिया की जरूरत पड़ेगी। किसानाें का आरोप है कि किसानाें के जरूरत के समय उर्वरक नहीं मिलता है और अधिकारी जान बूझकर खेती-किसानी में अड़चन डालने का काम करते हैं। किसानाें का भी आरोप है कि चाहे किसी भी पार्टी की सरकार रहती है, किसानाें के साथ दोहरी नीति अपनाई जाती है। सहकारी समितियाें पर जब यूरिया जरूरत होती है तो वहां डीएपी उपलब्ध रहता है और जब डीएपी की जरूरत होती है तब यूरिया मिलती है। किसान प्रत्येक वर्ष कभी सूखे तो कभी बाढ़ से त्रस्त रहते हैं, बावजूद इसके किसानाें की समस्याआें के समाधान के लिए न तो जनप्रतिनिधि और न ही जिला प्रशासन ध्यान नहीं देता है। किसानाें का आरोप है कि समितियाें से उर्वरक किसानाें को न देकर उसकी कालाबाजारी भी कर दी जाती है और किसानों को समिति से लौटा दिया जाता है। छोटे और मझोले किसानाें का आरोप है जब समितियाें पर खाद उपलब्ध रहती है तो वह बड़े किसानाें को उनके जरूरत से अधिक उर्वरक दे दिया जाता है।
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