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सिंचाई के लिए जल दोहन से गहराने लगा पेयजल संकट
Updated Sat, 30 Dec 2017 12:41 AM IST
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पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड में ही जल संकट
सिंचाई के लिए जल दोहन से गहराने लगा पेयजल संकट
मानक से कम बोर होने के कारण सार्वजनिक हैंडपंप छोड़ रहे पानी
अमर उजाला ब्यूरो
मिर्जापुर। जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में भीषण ठंड में ही पेयजल की किल्लत गहराने लगी है। सिंचाई के लिए लगातार निजी नलकूपों से पानी का दोहन होने चलते जल स्तर जमीन के निचेे खिसकने लगा है। भूगर्भ में जलस्तर नीचे चले जाने से अधिकांश हैंडपंप पानी छोड़ रहे हैं। जहां पानी आ भी रहा है तो वह इस कदर गंदा और कीचड़युक्त है कि उसे पीया नहीं जा सकता। ग्रामीणों को पानी के लिए इधर उधर भटकना पड़ रहा है।
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि मड़िहान तहसील क्षेत्र में साढ़े आठ हजार सार्वजनिक हैंडपंप स्थापित किये गए, किन्तु मानक के विपरीत बोर किये जाने से हैंडपंप पानी देना बंद कर रहे हैं। जलनिगम विभाग की मिलीभगत से ठेकेदार का गोरखधंधा फलफूल रहा है। जैसे जैसे जलस्तर जमीन के नीचे खिसक रहा है वैसे वैसे हैंडपंप पानी छोड़ रहे हैं। क्षेत्र में स्थापित तीन चौथाई हैंडपंप से पानी निकलना बंद हो चुका है।कुछ तो मरम्मत के अभाव में हैंडपंप शोपीस बन कर रह गए हैं। इस संबंध में ग्राम प्रधान बजट का अभाव दिखा कर पल्ला झाड़ ले रहे हैं। क्षेत्र के दो हजार कूप एक दशक से हाथी के दांत साबित हो रहे हैं। कूपों की गहराई पचास से साठ फीट ही हो सकती है। बारिश के समय तक कुओं में पानी दिखाई पड़ता है। कुएं का पानी सिंचाई तक सिमट कर रह गया है। राजगढ़ विकास खंड के अंतर्गत आने वाले पहाड़ी क्षेत्रों में अभी से पेयजल की समस्या उत्तपन्न होने लगी है। प्रधानों पर पुराने हेंडपंपो के मरम्मत के लिये ग्रामीणों का दबाव बढ़ने लगा है। क्षेत्र के राजगढ़, सलैया, भवानीपुर, रामपुर 38, दारानगर, लहाश, रामपुर 33, कुड़ी, दरवान, निकरिका, जौगढ़, पतार, गंगोदरा, नुनौटी, शक्तेशगढ़, खमहवा जमुति, सेमरी, सरसों, आदि गांवों में पेयजल का संकट उत्तपन्न हो गया है। ग्रामीण पांच-पांच सौ मीटर दूर से पानी लेकर पीने को मजबूर हैं। इस इलाको में हैंडपंप कीचड़ युक्त पानी देने लगे हैं। कुछ तो पानी ही नही दे रहे हैं, विकल्प भी कुछ नही दिख रहा है, क्योंकि पहाड़ी बंधिया सूख जाने की वजह से पहाड़ी क्षेत्रों में नहरों में पानी छोड़ कर पानी का लेयर भी नही बढ़ाया जा सकता। विधायक निधि से पहाड़ी क्षेत्रों में नये हैंडपंप लगाए जा रहे हैं उनमें सिंचाई विभाग द्वारा कम बोर पर ही पानी मिलने पर गहराई तक बोरिंग नहीं किया जाता है। इससे गर्मी आते ही हैंडपंप पानी छोड़ देते हैं। अगस्त माह के बाद लालगंज तहसील क्षेत्र में बरसात नहीं होने के कारण पेयजल संकट गहराने लगा है। जिसके कारण आधा दर्जन इलाके डेंजर जोन के नाम से जाने जाने लगे हैं। इसकी जानकारी शासन प्रशासन के साथ जनप्रतिनिधियों तक को है। तहसील क्षेत्र पर नजर डालें तो आइने की तरह पेयजल समस्या का सच दिखाई देने लगेगी । कई डेंजर जोन के नाम से प्रसिद्ध गांव मानिकपुर; रानीबारी, सहिरा,खजुरी,पंजरा,लालगंज,भैसोड़ बलाय पहाड़,लहुरियादह,कुशियरा,बेलाही,मतवार,नौडिहवा,नदना आदि स्थान तो लाइलाज पेयजल संकट का सामना प्रतिवर्ष कर रहे हैं ।लहुरियादह और भैसोड़ में तो जनवरी माह से टैंकर चलाकर जलापूर्ति की जाती है। तहसील के मानिकपुर,सहिरा, रानीबारी, भैसोड़, लहुरियादह, बेलाही में पेयजल की व्यवस्था पूरी तरह फेल हो जाती है।
इनसेट
पेयजल की समस्या से निपटने के लिए सरकार की योजना तैयार हो चुकी है। एक वर्ष के भीतर पहाड़ी क्षेत्रों से पेयजल संकट का निराकरण करा लिया जाएगा।-रमाशंकर सिंह पटेल, विधायक, मड़िहान
पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड में ही जल संकट
सिंचाई के लिए जल दोहन से गहराने लगा पेयजल संकट
मानक से कम बोर होने के कारण सार्वजनिक हैंडपंप छोड़ रहे पानी
अमर उजाला ब्यूरो
मिर्जापुर। जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में भीषण ठंड में ही पेयजल की किल्लत गहराने लगी है। सिंचाई के लिए लगातार निजी नलकूपों से पानी का दोहन होने चलते जल स्तर जमीन के निचेे खिसकने लगा है। भूगर्भ में जलस्तर नीचे चले जाने से अधिकांश हैंडपंप पानी छोड़ रहे हैं। जहां पानी आ भी रहा है तो वह इस कदर गंदा और कीचड़युक्त है कि उसे पीया नहीं जा सकता। ग्रामीणों को पानी के लिए इधर उधर भटकना पड़ रहा है।
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि मड़िहान तहसील क्षेत्र में साढ़े आठ हजार सार्वजनिक हैंडपंप स्थापित किये गए, किन्तु मानक के विपरीत बोर किये जाने से हैंडपंप पानी देना बंद कर रहे हैं। जलनिगम विभाग की मिलीभगत से ठेकेदार का गोरखधंधा फलफूल रहा है। जैसे जैसे जलस्तर जमीन के नीचे खिसक रहा है वैसे वैसे हैंडपंप पानी छोड़ रहे हैं। क्षेत्र में स्थापित तीन चौथाई हैंडपंप से पानी निकलना बंद हो चुका है।कुछ तो मरम्मत के अभाव में हैंडपंप शोपीस बन कर रह गए हैं। इस संबंध में ग्राम प्रधान बजट का अभाव दिखा कर पल्ला झाड़ ले रहे हैं। क्षेत्र के दो हजार कूप एक दशक से हाथी के दांत साबित हो रहे हैं। कूपों की गहराई पचास से साठ फीट ही हो सकती है। बारिश के समय तक कुओं में पानी दिखाई पड़ता है। कुएं का पानी सिंचाई तक सिमट कर रह गया है। राजगढ़ विकास खंड के अंतर्गत आने वाले पहाड़ी क्षेत्रों में अभी से पेयजल की समस्या उत्तपन्न होने लगी है। प्रधानों पर पुराने हेंडपंपो के मरम्मत के लिये ग्रामीणों का दबाव बढ़ने लगा है। क्षेत्र के राजगढ़, सलैया, भवानीपुर, रामपुर 38, दारानगर, लहाश, रामपुर 33, कुड़ी, दरवान, निकरिका, जौगढ़, पतार, गंगोदरा, नुनौटी, शक्तेशगढ़, खमहवा जमुति, सेमरी, सरसों, आदि गांवों में पेयजल का संकट उत्तपन्न हो गया है। ग्रामीण पांच-पांच सौ मीटर दूर से पानी लेकर पीने को मजबूर हैं। इस इलाको में हैंडपंप कीचड़ युक्त पानी देने लगे हैं। कुछ तो पानी ही नही दे रहे हैं, विकल्प भी कुछ नही दिख रहा है, क्योंकि पहाड़ी बंधिया सूख जाने की वजह से पहाड़ी क्षेत्रों में नहरों में पानी छोड़ कर पानी का लेयर भी नही बढ़ाया जा सकता। विधायक निधि से पहाड़ी क्षेत्रों में नये हैंडपंप लगाए जा रहे हैं उनमें सिंचाई विभाग द्वारा कम बोर पर ही पानी मिलने पर गहराई तक बोरिंग नहीं किया जाता है। इससे गर्मी आते ही हैंडपंप पानी छोड़ देते हैं। अगस्त माह के बाद लालगंज तहसील क्षेत्र में बरसात नहीं होने के कारण पेयजल संकट गहराने लगा है। जिसके कारण आधा दर्जन इलाके डेंजर जोन के नाम से जाने जाने लगे हैं। इसकी जानकारी शासन प्रशासन के साथ जनप्रतिनिधियों तक को है। तहसील क्षेत्र पर नजर डालें तो आइने की तरह पेयजल समस्या का सच दिखाई देने लगेगी । कई डेंजर जोन के नाम से प्रसिद्ध गांव मानिकपुर; रानीबारी, सहिरा,खजुरी,पंजरा,लालगंज,भैसोड़ बलाय पहाड़,लहुरियादह,कुशियरा,बेलाही,मतवार,नौडिहवा,नदना आदि स्थान तो लाइलाज पेयजल संकट का सामना प्रतिवर्ष कर रहे हैं ।लहुरियादह और भैसोड़ में तो जनवरी माह से टैंकर चलाकर जलापूर्ति की जाती है। तहसील के मानिकपुर,सहिरा, रानीबारी, भैसोड़, लहुरियादह, बेलाही में पेयजल की व्यवस्था पूरी तरह फेल हो जाती है।
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पेयजल की समस्या से निपटने के लिए सरकार की योजना तैयार हो चुकी है। एक वर्ष के भीतर पहाड़ी क्षेत्रों से पेयजल संकट का निराकरण करा लिया जाएगा।-रमाशंकर सिंह पटेल, विधायक, मड़िहान
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