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गलन से कांपे लोग, ठिठुरन में बीता दिन
Updated Thu, 28 Dec 2017 12:13 AM IST
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मिर्जापुर। जिले में बुधवार को सबसे अधिक गलन व ठंडक भरा दिन रहा। असमान साफ रहा लेकिन सुबह के वक्त हल्का कोहरा छाया रहा। सूर्य की तेज धूप दोपहर तीन बजे तक लोगों के लिए राहत बनी रहीं, लेकिन शाम ढलते ही ठंडक ने जिले को अपने आगोश में ले लिया। ठंड से बचने के लिए लोग चौराहों व घरों में अलाव जला कर तापते रहे। वहीं मंडलीय अपस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। गलन से लोग कांपते व ठिठुरत रहे।
बुधवार को जिले का न्यूनतम तापमान नौ डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। गलन ने लोगों को घरों में कैद रहने को मजबूत कर दिया। सांस के मरीजों के लिए ठंड जानलेवा साबित हो रही है। अस्पतालों में कोल्ड डायरिया और बुखार के रोगियों की संख्या बढ़ी हुई है। मंडलीय अस्पताल के ओपीडी में रोजाना की अपेक्षा मरीजों की संख्या बुधवार को अधिक दिखी। सार्वजनिक स्थानों पर ठंड से बचाव के लिए नगर पालिका की ओर से दी जाने वाली व्यवस्था नदारत है। ठंड के चलते बहुत आवश्यकता पड़ने पर ही लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों को जिलाधिकारी बिमल कुमार दुबे द्वारा किये गए समय में परिवर्तन से थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन गलन के बीच सुबह तैयार होकर जाने में बच्चों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ विद्यालय के प्रबंधकों ने ठंड को देखते हुए प्ले ग्रुप से लेकर नर्सरी तक के बच्चों का स्कूल बंद कर दिया है। गलन व ठंड में अभिभावकों का कहना है कि विद्यालयों को बंद कर दिया जाना चाहिए। प्रत्येक वर्ष 25 दिसंबर से विंटर वेकेशन शुरू हो जाता है। अबकी बार ठंड व गलन शुरू हो गई है, लेकिन अधिकांश विद्यालय खुले हुए हैं, बच्चे कांपते हुए स्कूल जाने के लिए विवश हैं। काम की तलाश में ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मजदूरों का ठंड में बुरा हाल है। रोज कमाने व खाने वालों के लिए ठंड खतरनाक बनी हुई है, इसके बावूजद जिला व नगर पालिका प्रशासन की ओर से कोई मुकम्मल व्यवस्था नही किया गया है। ठंड से बचाव के लिए सामाजिक संस्थाएं व नगरवासी लगातार अलाव जलवाने की मांग कर रहे हैं।
बुधवार को जिले का न्यूनतम तापमान नौ डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। गलन ने लोगों को घरों में कैद रहने को मजबूत कर दिया। सांस के मरीजों के लिए ठंड जानलेवा साबित हो रही है। अस्पतालों में कोल्ड डायरिया और बुखार के रोगियों की संख्या बढ़ी हुई है। मंडलीय अस्पताल के ओपीडी में रोजाना की अपेक्षा मरीजों की संख्या बुधवार को अधिक दिखी। सार्वजनिक स्थानों पर ठंड से बचाव के लिए नगर पालिका की ओर से दी जाने वाली व्यवस्था नदारत है। ठंड के चलते बहुत आवश्यकता पड़ने पर ही लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों को जिलाधिकारी बिमल कुमार दुबे द्वारा किये गए समय में परिवर्तन से थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन गलन के बीच सुबह तैयार होकर जाने में बच्चों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ विद्यालय के प्रबंधकों ने ठंड को देखते हुए प्ले ग्रुप से लेकर नर्सरी तक के बच्चों का स्कूल बंद कर दिया है। गलन व ठंड में अभिभावकों का कहना है कि विद्यालयों को बंद कर दिया जाना चाहिए। प्रत्येक वर्ष 25 दिसंबर से विंटर वेकेशन शुरू हो जाता है। अबकी बार ठंड व गलन शुरू हो गई है, लेकिन अधिकांश विद्यालय खुले हुए हैं, बच्चे कांपते हुए स्कूल जाने के लिए विवश हैं। काम की तलाश में ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मजदूरों का ठंड में बुरा हाल है। रोज कमाने व खाने वालों के लिए ठंड खतरनाक बनी हुई है, इसके बावूजद जिला व नगर पालिका प्रशासन की ओर से कोई मुकम्मल व्यवस्था नही किया गया है। ठंड से बचाव के लिए सामाजिक संस्थाएं व नगरवासी लगातार अलाव जलवाने की मांग कर रहे हैं।
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