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किसानों की मुसीबत बने नील गाय व छुट्टा पशु
Updated Sat, 30 Dec 2017 12:41 AM IST
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जिगना। किसानों के लिए नील गाय व छुट्टा पशु मुसीबत बन गए हैं। नील गाय व छुट्टा पशु फसलों को तहस-नहस कर दे रहे हैं। उन्होेंने जिलाधिकारी इन से पशुओं को जंगल में पहुंचवाने की मांग की है।
विकास खंड छानबे में इन दिनों छुट्टा पशु और नील गायों का आतंक है। झुंड में घूमने वाले ये पशु किसी के खेत में घुस कर उसे तहस-नहस कर दे रहे हैं। इससे किसानों को काफी क्षति उठानी पड़ रही है। किसानों द्वारा कई बार छुट्टा व आवारा पशुओं तथा नील गायों से छुटकारा दिलाने की मांग जिला प्रशासन से की थी लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। छानबे क्षेत्र में नीलगाय व अवारा पशु काफी संख्या में आ गए हैं। एक तरफ जहां नील गाय और आवारा मवेशी फसल तो बरबाद कर ही रहे हैं, उनकी वजह से दुर्घटनाएं भी बढ़ी हैं। किसान हरिप्रसाद दुबे, शिवचंद्र मिश्र, शशि भूषण पाठक, भुपेंद्र शुक्ल, शशि शंकर मिश्र, पन्नालाल पटेल, सुरेश दुबे, अमरनाथ तिवारी, गणेश, शिवशंकर तिवारी, नागेंद्र सिंह, पप्पू सिंह, राघवेंद्र प्रताप सिंह, राजेश सिंह का कहना है कि फसलों को बचाने के लिए कितने भी उपाय किया जाय फिर भी नील गाय व छुट्टा पशु नुकसान कर दे रहे हैं । किसानों को प्रति वर्ष काफी क्षति का सामना करना पड़ रहा है। किसानों की मांग का निराकरण करने की बजाए जिला प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। किसानों ने जिलाधिकारी का ध्यान आकर्षित करते हुए नील गायों व आवारा पशुओं को जंगल आदि में पहुंचवाने की मांग की है ।
विकास खंड छानबे में इन दिनों छुट्टा पशु और नील गायों का आतंक है। झुंड में घूमने वाले ये पशु किसी के खेत में घुस कर उसे तहस-नहस कर दे रहे हैं। इससे किसानों को काफी क्षति उठानी पड़ रही है। किसानों द्वारा कई बार छुट्टा व आवारा पशुओं तथा नील गायों से छुटकारा दिलाने की मांग जिला प्रशासन से की थी लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। छानबे क्षेत्र में नीलगाय व अवारा पशु काफी संख्या में आ गए हैं। एक तरफ जहां नील गाय और आवारा मवेशी फसल तो बरबाद कर ही रहे हैं, उनकी वजह से दुर्घटनाएं भी बढ़ी हैं। किसान हरिप्रसाद दुबे, शिवचंद्र मिश्र, शशि भूषण पाठक, भुपेंद्र शुक्ल, शशि शंकर मिश्र, पन्नालाल पटेल, सुरेश दुबे, अमरनाथ तिवारी, गणेश, शिवशंकर तिवारी, नागेंद्र सिंह, पप्पू सिंह, राघवेंद्र प्रताप सिंह, राजेश सिंह का कहना है कि फसलों को बचाने के लिए कितने भी उपाय किया जाय फिर भी नील गाय व छुट्टा पशु नुकसान कर दे रहे हैं । किसानों को प्रति वर्ष काफी क्षति का सामना करना पड़ रहा है। किसानों की मांग का निराकरण करने की बजाए जिला प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। किसानों ने जिलाधिकारी का ध्यान आकर्षित करते हुए नील गायों व आवारा पशुओं को जंगल आदि में पहुंचवाने की मांग की है ।
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