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39 साल बाद पूरी हुई बाणसागर परियोजना
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मिर्जापुर। चार दशक पहले सोन नदी पर शुरू हुई महत्वाकांक्षी बाणसागर परियोजना का लाभ मध्य प्रदेश और बिहार को भी मिलेगा। इस परियोजना के लिए प्रदेश सरकार ने बजट में 122 करोड़ रुपये देने की घोषणा की है। यह एशिया की सबसे बड़ी परियोजना है। इस परियोजना से खास तौर पर यूपी के पूर्वांचल क्षेत्र में सिंचाई की समस्या का समाधान होगा। 171.84 किलोमीटर लंबी परियोजना 3420 करोड़ की लागत से तैयार की गई है।
उत्तर प्रदेश में बाणसागर परियोजना 1997-98 से प्रस्तावित थी। पूर्ववर्ती सरकारों ने इसके लिए बजट नहीं दिया। इस वजह से परियोजना अटकी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके लिए बजट स्वीकृत किया। 3420 करोड़ की लागत से बाणसागर परियोजना को तैयार किया गया है। विंध्याचल पर्वत से तैमूर की पहाड़ियों से होते हुए सोन नदी से परियोजना को लाया गया है। मध्य प्रदेश में 71 किलोमीटर, उत्तर प्रदेश में 100 किलोमीटर लंबी परियोजना से मिर्जापुर और इलाहाबाद के 1.70 लाख किसान सीधे लाभान्वित होंगे। सिंचाई मंत्री ने दावा किया है कि इस परियोजना के आने से 5.14 मीट्रिक टन का अतिरिक्त उत्पादन होगा।
सुरंग बनाकर पहाड़ियों से लाई गई परियोजना
बाणसागर परियोजना पहाड़ियों के बीच सुरंग बना कर लाई गई है। इसमें विश्व का सर्वश्रेष्ठ एक्वाडक्ट पाइप इस्तेमाल किया गया है। सोन नदी से इस परियोजनाओं को इलाहाबाद और मिर्जापुर के किसानों के लिए लाया गया है।
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39 साल बाद पूरा हुआ कार्य
मिर्जापुर। बाणसागर परियोजना की परिकल्पना मध्यप्रदेश के विंध्य क्षेत्र में होने वाली वर्षा की अनिश्चितता को देखते हुए और उत्तर प्रदेश और बिहार राज्य के कुछ सर्वाधिक सूखाग्रस्त क्षेत्रों को सिंचित करने के लिए की गई थी। परियोजना के निर्माण के लिए मध्यप्रदेश ने 50 फीसदी, उत्तर प्रदेश ने 25 फीसदी और बिहार ने 25 फीसदी वित्तीय सहायता देना स्वीकार किया था। इस परियोजना के लिए 1977 के मूल्य के आधार पर वर्ष 1978 में 322.30 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। इसका शिलान्यास तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने 14 मई 1978 को किया था।
परियोजना का काम 10 साल में पूरा किया जाना था, लेकिन वित्तीय संसाधनों की सीमित उपलब्धता और सहभागिता के अनुसार अंशदान का भुगतान समय से न होने के कारण परियोजना लटकती गई। मध्यप्रदेश के हिस्से में इस महत्वाकांक्षी अंतर्राज्यीय परियोजना को 2006 में पूरा कर लिया गया। जिसका उद्घाटन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 2006 में किया था।
क्या है बाणसागर नहर परियोजना
सोन नदी पर मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार की बहुउद्देशीय बाणसागर नहर परियोजना का मुख्य बांध मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के देवलोंद गांव के पास है। मुख्य बांध की कुल लंबाई 1020 मीटर है, जिसमें से 671.72 मीटर का पक्का बांध है। बांध में जलनिकासी के लिए 50360 फुट के रेडियल क्रेस्ट गेट लगाए गए हैं।
मध्यप्रदेश में परियोजना का डूब क्षेत्र 58400 हेक्टेयर है, जिससे 336 गांव प्रभावित हुए। इनमें से 79 गांव पूरी तरह डूब गए, जबकि 257 गांव आंशिक तौर पर डूबे। बाणसागर परियोजना से मध्यप्रदेश में 1.54 लाख हेक्टेयर, उत्तर प्रदेश में 1.50 लाख हेक्टेयर और बिहार राज्य में 94 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो सकेगी। उत्तर प्रदेश के हिस्से की ऐतिहासिक बाणसागर नहर परियोजना का कार्य 1997 में शुरू हुआ था। 170 किमी टनल व नहर के माध्यम से परियोजना को पूरा किया गया है।
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उत्तर प्रदेश में बाणसागर परियोजना 1997-98 से प्रस्तावित थी। पूर्ववर्ती सरकारों ने इसके लिए बजट नहीं दिया। इस वजह से परियोजना अटकी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके लिए बजट स्वीकृत किया। 3420 करोड़ की लागत से बाणसागर परियोजना को तैयार किया गया है। विंध्याचल पर्वत से तैमूर की पहाड़ियों से होते हुए सोन नदी से परियोजना को लाया गया है। मध्य प्रदेश में 71 किलोमीटर, उत्तर प्रदेश में 100 किलोमीटर लंबी परियोजना से मिर्जापुर और इलाहाबाद के 1.70 लाख किसान सीधे लाभान्वित होंगे। सिंचाई मंत्री ने दावा किया है कि इस परियोजना के आने से 5.14 मीट्रिक टन का अतिरिक्त उत्पादन होगा।
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सुरंग बनाकर पहाड़ियों से लाई गई परियोजना
बाणसागर परियोजना पहाड़ियों के बीच सुरंग बना कर लाई गई है। इसमें विश्व का सर्वश्रेष्ठ एक्वाडक्ट पाइप इस्तेमाल किया गया है। सोन नदी से इस परियोजनाओं को इलाहाबाद और मिर्जापुर के किसानों के लिए लाया गया है।
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39 साल बाद पूरा हुआ कार्य
मिर्जापुर। बाणसागर परियोजना की परिकल्पना मध्यप्रदेश के विंध्य क्षेत्र में होने वाली वर्षा की अनिश्चितता को देखते हुए और उत्तर प्रदेश और बिहार राज्य के कुछ सर्वाधिक सूखाग्रस्त क्षेत्रों को सिंचित करने के लिए की गई थी। परियोजना के निर्माण के लिए मध्यप्रदेश ने 50 फीसदी, उत्तर प्रदेश ने 25 फीसदी और बिहार ने 25 फीसदी वित्तीय सहायता देना स्वीकार किया था। इस परियोजना के लिए 1977 के मूल्य के आधार पर वर्ष 1978 में 322.30 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। इसका शिलान्यास तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने 14 मई 1978 को किया था।
परियोजना का काम 10 साल में पूरा किया जाना था, लेकिन वित्तीय संसाधनों की सीमित उपलब्धता और सहभागिता के अनुसार अंशदान का भुगतान समय से न होने के कारण परियोजना लटकती गई। मध्यप्रदेश के हिस्से में इस महत्वाकांक्षी अंतर्राज्यीय परियोजना को 2006 में पूरा कर लिया गया। जिसका उद्घाटन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 2006 में किया था।
क्या है बाणसागर नहर परियोजना
सोन नदी पर मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार की बहुउद्देशीय बाणसागर नहर परियोजना का मुख्य बांध मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के देवलोंद गांव के पास है। मुख्य बांध की कुल लंबाई 1020 मीटर है, जिसमें से 671.72 मीटर का पक्का बांध है। बांध में जलनिकासी के लिए 50360 फुट के रेडियल क्रेस्ट गेट लगाए गए हैं।
मध्यप्रदेश में परियोजना का डूब क्षेत्र 58400 हेक्टेयर है, जिससे 336 गांव प्रभावित हुए। इनमें से 79 गांव पूरी तरह डूब गए, जबकि 257 गांव आंशिक तौर पर डूबे। बाणसागर परियोजना से मध्यप्रदेश में 1.54 लाख हेक्टेयर, उत्तर प्रदेश में 1.50 लाख हेक्टेयर और बिहार राज्य में 94 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो सकेगी। उत्तर प्रदेश के हिस्से की ऐतिहासिक बाणसागर नहर परियोजना का कार्य 1997 में शुरू हुआ था। 170 किमी टनल व नहर के माध्यम से परियोजना को पूरा किया गया है।