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Mirzapur News: बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहीं 20 औद्योगिक इकाइयां
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औद्योगिक आस्थान पसिर जल निकासी व्यवस्था न होने से बजबजा रही नालियां। -संवाद।
15.75 एकड़ में फैले औद्योगिक आस्थान में पेयजल तक की सुविधा नहीं
जाम नालियों का गंदा पानी फैक्ट्रियों में घुसने से मशीनों और उत्पादों को नुकसान का खतरा
मिर्जापुर। उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए विकसित पथरहिया औद्योगिक आस्थान में उद्यमियों को कारोबार चलाने के साथ बुनियादी सुविधाओं की कमी से भी जूझना पड़ रहा है। 15.75 एकड़ में फैले परिसर की 20 छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां सफाई, जलनिकासी और पेयजल व्यवस्था की बदहाली से प्रभावित हैं। हालत यह है कि परिसर की सफाई के लिए उद्यमियों को जेब से खर्च करना पड़ रहा है, पेयजल के लिए बनी टंकी बेकार खड़ी है।
संवाद न्यूज एजेंसी की शुक्रवार को की गई पड़ताल में औद्योगिक आस्थान की बदहाली सामने आई। उपायुक्त उद्योग कार्यालय और फैक्ट्रियों के सामने कूड़े के ढेर हैं। संयुक्त आयुक्त उद्योग कार्यालय के मुख्य गेट के आसपास भी घास-फूस और गंदगी । वर्षों पुरानी नालियां जगह-जगह पटी हैं। कुछ नालियों पर अतिक्रमण है, जबकि अन्य के जाम होने से गंदा पानी जमा रहता है। मामूली बारिश होते ही यह पानी फैक्ट्रियों में घुसने लगता है। इससे मशीनों, कच्चे माल और तैयार उत्पादों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है।
अपने खर्च पर करानी पड़ रही सफाई
औद्योगिक परिसर में नियमित सफाई की व्यवस्था नहीं होने का खामियाजा उद्यमियों को भुगतना पड़ रहा है। फैक्ट्रियों के आसपास फैली गंदगी और कूड़े से निजात पाने के लिए उन्हें खर्च पर सफाई करानी पड़ती है। इससे कारोबार की दूसरी जरूरतों के बीच अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। पेयजल टंकी होने के बावजूद पानी की सुविधा नहीं मिलना भी व्यवस्था की बदहाली को उजागर करता है।
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जलभराव और मच्छरों से कामगार परेशान
नालियों में जमा गंदे पानी से मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। इससे फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिकों को परेशानी होती है। पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं होने से भी परिसर में कामकाज और आवाजाही प्रभावित होती है। उद्यमियों के सामने एक ओर उत्पादन और कारोबार सुचारु रखने की चुनौती है, तो दूसरी ओर सफाई, जलनिकासी और पेयजल जैसी बुनियादी समस्याओं से निपटने की मजबूरी है। औद्योगिक विकास के उद्देश्य से बनाए गए इस परिसर में जरूरी सुविधाओं का अभाव व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
श्रमिकों और उद्यमियों ने बताईं समस्याएं
“परिसर में नालियां जाम होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। ऐसे में फैक्ट्रियों के अंदर काम करना मुश्किल हो रहा है। परिश्रम का पैसा बीमारी में जा रहा है।”
— गिरधारीलाल, श्रमिक
“परिसर में साफ-सफाई की समस्या तो है ही, साथ ही पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में रात के समय फैक्ट्री आना-जाना मुश्किल हो रहा है।”
— गुलशन, श्रमिक
“औद्योगिक आस्थान में नियमित सफाई नहीं होने से अपने खर्च पर श्रमिकों को लगाकर सफाई करानी पड़ती है। इससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।”
— नरोत्तमदास ठक्कर, उद्यमी
“औद्योगिक आस्थान की सफाई का मुद्दा उद्योग बंधु की बैठक में उठाया जाता है। इसके बावजूद सफाईकर्मी नियमित रूप से नजर नहीं आते। सप्ताह में कम से कम दो से तीन बार परिसर की सफाई होनी चाहिए।”
— कल्याण अग्रहरि, मेटल उद्यमी
विभागीय स्तर पर नगर पालिका को पत्र लिखने का दावा
संयुक्त आयुक्त उद्योग वीरेंद्र कुमार ने बताया कि उद्यमियों की ओर से हर बार उद्योग बंधु की बैठक में साफ-सफाई का मुद्दा उठाया जाता है। जिलाधिकारी के निर्देश पर विभाग की ओर से नगर पालिका को पत्र भी लिखा जाता है। इसके बावजूद परिसर में साफ-सफाई का अभाव है।
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जाम नालियों का गंदा पानी फैक्ट्रियों में घुसने से मशीनों और उत्पादों को नुकसान का खतरा
मिर्जापुर। उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए विकसित पथरहिया औद्योगिक आस्थान में उद्यमियों को कारोबार चलाने के साथ बुनियादी सुविधाओं की कमी से भी जूझना पड़ रहा है। 15.75 एकड़ में फैले परिसर की 20 छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां सफाई, जलनिकासी और पेयजल व्यवस्था की बदहाली से प्रभावित हैं। हालत यह है कि परिसर की सफाई के लिए उद्यमियों को जेब से खर्च करना पड़ रहा है, पेयजल के लिए बनी टंकी बेकार खड़ी है।
संवाद न्यूज एजेंसी की शुक्रवार को की गई पड़ताल में औद्योगिक आस्थान की बदहाली सामने आई। उपायुक्त उद्योग कार्यालय और फैक्ट्रियों के सामने कूड़े के ढेर हैं। संयुक्त आयुक्त उद्योग कार्यालय के मुख्य गेट के आसपास भी घास-फूस और गंदगी । वर्षों पुरानी नालियां जगह-जगह पटी हैं। कुछ नालियों पर अतिक्रमण है, जबकि अन्य के जाम होने से गंदा पानी जमा रहता है। मामूली बारिश होते ही यह पानी फैक्ट्रियों में घुसने लगता है। इससे मशीनों, कच्चे माल और तैयार उत्पादों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है।
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अपने खर्च पर करानी पड़ रही सफाई
औद्योगिक परिसर में नियमित सफाई की व्यवस्था नहीं होने का खामियाजा उद्यमियों को भुगतना पड़ रहा है। फैक्ट्रियों के आसपास फैली गंदगी और कूड़े से निजात पाने के लिए उन्हें खर्च पर सफाई करानी पड़ती है। इससे कारोबार की दूसरी जरूरतों के बीच अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। पेयजल टंकी होने के बावजूद पानी की सुविधा नहीं मिलना भी व्यवस्था की बदहाली को उजागर करता है।
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जलभराव और मच्छरों से कामगार परेशान
नालियों में जमा गंदे पानी से मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। इससे फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिकों को परेशानी होती है। पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं होने से भी परिसर में कामकाज और आवाजाही प्रभावित होती है। उद्यमियों के सामने एक ओर उत्पादन और कारोबार सुचारु रखने की चुनौती है, तो दूसरी ओर सफाई, जलनिकासी और पेयजल जैसी बुनियादी समस्याओं से निपटने की मजबूरी है। औद्योगिक विकास के उद्देश्य से बनाए गए इस परिसर में जरूरी सुविधाओं का अभाव व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
श्रमिकों और उद्यमियों ने बताईं समस्याएं
“परिसर में नालियां जाम होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। ऐसे में फैक्ट्रियों के अंदर काम करना मुश्किल हो रहा है। परिश्रम का पैसा बीमारी में जा रहा है।”
— गिरधारीलाल, श्रमिक
“परिसर में साफ-सफाई की समस्या तो है ही, साथ ही पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में रात के समय फैक्ट्री आना-जाना मुश्किल हो रहा है।”
— गुलशन, श्रमिक
“औद्योगिक आस्थान में नियमित सफाई नहीं होने से अपने खर्च पर श्रमिकों को लगाकर सफाई करानी पड़ती है। इससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।”
— नरोत्तमदास ठक्कर, उद्यमी
“औद्योगिक आस्थान की सफाई का मुद्दा उद्योग बंधु की बैठक में उठाया जाता है। इसके बावजूद सफाईकर्मी नियमित रूप से नजर नहीं आते। सप्ताह में कम से कम दो से तीन बार परिसर की सफाई होनी चाहिए।”
— कल्याण अग्रहरि, मेटल उद्यमी
विभागीय स्तर पर नगर पालिका को पत्र लिखने का दावा
संयुक्त आयुक्त उद्योग वीरेंद्र कुमार ने बताया कि उद्यमियों की ओर से हर बार उद्योग बंधु की बैठक में साफ-सफाई का मुद्दा उठाया जाता है। जिलाधिकारी के निर्देश पर विभाग की ओर से नगर पालिका को पत्र भी लिखा जाता है। इसके बावजूद परिसर में साफ-सफाई का अभाव है।