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विंध्याचल व मिर्जापुर स्टेशन पर मात्र एक एक ओवरब्रिज है
Updated Fri, 29 Sep 2017 11:59 PM IST
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मिर्जापुर। विंध्याचल व मिर्जापुर रेलवे स्टेशन पर भगदड़ मचने पर यात्रियों को एक से दूसरे प्लेटफार्म पर जाने के लिए मात्र एक ही सीढ़ी का सहारा है। इसके अलावा अन्य कोई ओवरब्रिज नहीं बनाया गया है। जिससे यहां भगदड़ होने पर दुर्घटना होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि दोनों स्टेशनों पर स्वचालित सीढ़ी का निर्माण कराया जा रहा है लेकिन वह कब बन कर तैयार होगा इसके बारे कहना मुश्किल है।
बता दें कि मुंबई के परेल स्टेशन पर शुक्रवार को भीड़ के चलते मची भगदड़ के चलते कई यात्रियों की मौत हो गई जबकि कई यात्री घायल हो गए। जिले के यात्रियों का कहना है कि अगर वहां और ओवरब्रिज होता है इतनी बड़ी घटना नहीं होती। बताते चलें कि विंध्याचल रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को एक से दो नंबर पर आने जाने के लिए करीब 40 वर्ष पूर्व एक ओवरब्रिज बनाया था। वहीं प्लेटफार्म नंबर दो से स्टेशन के बाहर जाने के लिए करीब दस वर्ष पूर्व एक ओवरब्रिज बनाया गया। वहीं मिर्जापुर में करीब सौ साल पहले अंग्रेजों ने एक से दो नंबर प्लेटफार्म जाने के लिए लोहे का ओवरब्रिज बनाया था। इसके अलावा स्टेशन के उत्तरी छोर से पूवी छोर तक उस पार जाने के लिए एक बड़ा ओवरब्रिज बनाया है। इन दो ओवरब्रिजों को छोड़ दिया जाए तो यहां भी कोई तीसरा ओवरब्रिज नहीं है। जबकि विंध्याचल में नवरात्र के दिनों में यात्रियों की भीड़ बढ़ जाती है। वहीं बोलबम व किसी भर्ती के समय मिर्जापुर स्टेशन पर पैर रखने की तक की जगह नहीं बचता है। फिर भी अभी तक तीसरा ब्रिज बन कर तैयार नहीं हो पाया है।
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बता दें कि मुंबई के परेल स्टेशन पर शुक्रवार को भीड़ के चलते मची भगदड़ के चलते कई यात्रियों की मौत हो गई जबकि कई यात्री घायल हो गए। जिले के यात्रियों का कहना है कि अगर वहां और ओवरब्रिज होता है इतनी बड़ी घटना नहीं होती। बताते चलें कि विंध्याचल रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को एक से दो नंबर पर आने जाने के लिए करीब 40 वर्ष पूर्व एक ओवरब्रिज बनाया था। वहीं प्लेटफार्म नंबर दो से स्टेशन के बाहर जाने के लिए करीब दस वर्ष पूर्व एक ओवरब्रिज बनाया गया। वहीं मिर्जापुर में करीब सौ साल पहले अंग्रेजों ने एक से दो नंबर प्लेटफार्म जाने के लिए लोहे का ओवरब्रिज बनाया था। इसके अलावा स्टेशन के उत्तरी छोर से पूवी छोर तक उस पार जाने के लिए एक बड़ा ओवरब्रिज बनाया है। इन दो ओवरब्रिजों को छोड़ दिया जाए तो यहां भी कोई तीसरा ओवरब्रिज नहीं है। जबकि विंध्याचल में नवरात्र के दिनों में यात्रियों की भीड़ बढ़ जाती है। वहीं बोलबम व किसी भर्ती के समय मिर्जापुर स्टेशन पर पैर रखने की तक की जगह नहीं बचता है। फिर भी अभी तक तीसरा ब्रिज बन कर तैयार नहीं हो पाया है।
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