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महाहड़ताल के पहले दिन हुई तालाबंदी, कार्यालयों में पसरा रहा सन्नाटा
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मिर्जापुर। पुरानी पेंशन योजना बहाली के लिए बुधवार से महाहड़ताल व कार्य बहिष्कार शुरू हो गया। कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी- पुरानी पेंशन बहाली मंच की ओर आहूत इस कार्यक्रम में पहले दिन अधिकांश जगहों पर तालाबंदी रही और कार्यालयों में सन्नाटा पसरा रहा। कई कार्यालयों में कर्मचारी दिखाई दिए और उन्होंने कार्य भी किया। नाम न बताने का आग्रह करते हुए कहा कि इस आंदोलन को उनका नैतिक समर्थन है लेकिन वह इस आंदोलन में शामिल नहीं हैं।
प्रदेश संगठन के आह्वान पर कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार कर जिला मुख्यालय पर धरना दिया। इस अवसर पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग की। मंच के जिलाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने कहा वर्तमान सरकार से आशा थी कि यह सरकार पुरानी पेंशन योजना को बहाल करेगी लेकिन इस सरकार ने भी सभी को बहुत निराश किया। सरकार एस्मा लगा सकती है लेकिन पुरानी पेंशन योजना को बहाल नहीं कर सकती। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बात है। लेकिन हम सरकार के दमनकारी रवैये से डरने वाले नहीं हैं। मंच के संयोजक लल्लू तिवारी ने कहा लोगों की एकजुटता से सरकार जरूर झुकेगी और पुरानी पेंशन योजना की बहाली करेगी लेकिन यदि नहीं झुकती है तो हम इसे झुकाएंगे। सरकार की बर्बरता के खिलाफ कर्मचारियों, शिक्षकों और अधिकारियों में बहुत आक्रोश है। विनय श्रीवास्तव ने कहा हमें किसी भी कीमत पर पुरानी पेंशन चाहिए। एसएन द्विवेदी ने कहा एकजुटता बनाए रहें, पुरानी पेंशन मिलेगी। उमा शुक्ला ने कहा यह सरकार दोहरी नीति पर चल रही है। नेताओं के लिए पुरानी और हमारे लिए नई पेंशन यह शर्मनाक है। सर्वेश विक्रम ने कहा सभी कर्मचारियों और शिक्षकों को सीधे धरना स्थल पर आना है और यहीं पर अपनी उपस्थिति देनी है। रेनू यादव, रामपाल, ओमप्रकाश उपाध्याय, प्रशांत मिश्र, प्रदीप चंद पाल, विनोद कुमार सिंह, राजपाल, लवकुमार सिंह, खुशवंत मौर्य, वीवी पांडेय आदि ने अपने विचार प्रकट किए। विनोद तिवारी, चंद्रशेखर मिश्र, राजेश कुमार, सर्वेश दुबे, समद, उमाकांत मिश्र, रमाकांत दुबे, धीरज किशोर, शान मोहम्मद आदि थे।
इस महाहड़ताल का विकास खंडों के विभिन्न कार्यालयों में भी असर रहा। अधिकांश कर्मचारी कार्यालय बंद कर या एकाध कर्मचारियों को छोड़कर मुख्यालय चले आए और धरना प्रदर्शन में शामिल हुए।
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मार्शल टीम ने बंद कराया कार्यालय
मंच की ओर से बाइक सवार कर्मचारियों की मार्शल टीम बनाई गई थी। वे जगह- जगह विभागों व विद्यालयों में जाकर उसे बंद करा रहे थे। कई जगह तो इस टीम के आने पर कार्यालय बंद कर दिए गए लेकिन बाद में खुल गए। माध्यमिक शिक्षक अधिकांश जगहों पर बोर्ड परीक्षा की तैयारी करते दिखाई दिए। कमोवेश यही हाल परिषदीय विद्यालयों का भी रहा।
गुटबाजी का शिकार हुआ आंदोलन
इस आंदोलन में कई कार्यालय खुले रहे। बरियाघाट स्थित बीएसए कार्यालय ही खुला रहा। कुछ कर्मचारी रहे और कुछ नहीं रहे। कुछ कार्यालय में उपस्थित होकर धूप लेते दिखाई दिए। कई कार्यालयों में तो कर्मचारियों ने सीधे ही कह दिया कि वे हड़ताल मेें शामिल नहीं हैं। विकास भवन के कई कार्यालय खुले रहे।
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प्रदेश संगठन के आह्वान पर कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार कर जिला मुख्यालय पर धरना दिया। इस अवसर पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग की। मंच के जिलाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने कहा वर्तमान सरकार से आशा थी कि यह सरकार पुरानी पेंशन योजना को बहाल करेगी लेकिन इस सरकार ने भी सभी को बहुत निराश किया। सरकार एस्मा लगा सकती है लेकिन पुरानी पेंशन योजना को बहाल नहीं कर सकती। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बात है। लेकिन हम सरकार के दमनकारी रवैये से डरने वाले नहीं हैं। मंच के संयोजक लल्लू तिवारी ने कहा लोगों की एकजुटता से सरकार जरूर झुकेगी और पुरानी पेंशन योजना की बहाली करेगी लेकिन यदि नहीं झुकती है तो हम इसे झुकाएंगे। सरकार की बर्बरता के खिलाफ कर्मचारियों, शिक्षकों और अधिकारियों में बहुत आक्रोश है। विनय श्रीवास्तव ने कहा हमें किसी भी कीमत पर पुरानी पेंशन चाहिए। एसएन द्विवेदी ने कहा एकजुटता बनाए रहें, पुरानी पेंशन मिलेगी। उमा शुक्ला ने कहा यह सरकार दोहरी नीति पर चल रही है। नेताओं के लिए पुरानी और हमारे लिए नई पेंशन यह शर्मनाक है। सर्वेश विक्रम ने कहा सभी कर्मचारियों और शिक्षकों को सीधे धरना स्थल पर आना है और यहीं पर अपनी उपस्थिति देनी है। रेनू यादव, रामपाल, ओमप्रकाश उपाध्याय, प्रशांत मिश्र, प्रदीप चंद पाल, विनोद कुमार सिंह, राजपाल, लवकुमार सिंह, खुशवंत मौर्य, वीवी पांडेय आदि ने अपने विचार प्रकट किए। विनोद तिवारी, चंद्रशेखर मिश्र, राजेश कुमार, सर्वेश दुबे, समद, उमाकांत मिश्र, रमाकांत दुबे, धीरज किशोर, शान मोहम्मद आदि थे।
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इस महाहड़ताल का विकास खंडों के विभिन्न कार्यालयों में भी असर रहा। अधिकांश कर्मचारी कार्यालय बंद कर या एकाध कर्मचारियों को छोड़कर मुख्यालय चले आए और धरना प्रदर्शन में शामिल हुए।
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मार्शल टीम ने बंद कराया कार्यालय
मंच की ओर से बाइक सवार कर्मचारियों की मार्शल टीम बनाई गई थी। वे जगह- जगह विभागों व विद्यालयों में जाकर उसे बंद करा रहे थे। कई जगह तो इस टीम के आने पर कार्यालय बंद कर दिए गए लेकिन बाद में खुल गए। माध्यमिक शिक्षक अधिकांश जगहों पर बोर्ड परीक्षा की तैयारी करते दिखाई दिए। कमोवेश यही हाल परिषदीय विद्यालयों का भी रहा।
गुटबाजी का शिकार हुआ आंदोलन
इस आंदोलन में कई कार्यालय खुले रहे। बरियाघाट स्थित बीएसए कार्यालय ही खुला रहा। कुछ कर्मचारी रहे और कुछ नहीं रहे। कुछ कार्यालय में उपस्थित होकर धूप लेते दिखाई दिए। कई कार्यालयों में तो कर्मचारियों ने सीधे ही कह दिया कि वे हड़ताल मेें शामिल नहीं हैं। विकास भवन के कई कार्यालय खुले रहे।