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व्यापारियों को बताया जीएसटी का लाभ-हानि
Updated Wed, 14 Jun 2017 12:31 AM IST
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कछवां। नगर पंचायत में व्यापार मंडल के तत्वावधान में जीएसटी पर सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसमें डिप्टी कमिश्नर व्यापार कर रामअनुज मिश्रा ने व्यापारियों को जीएसटी के बारे में जानकारी दी। साथ ही जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराने के बारेे में बताया। स्पेशल ट्रेनर समी रानी ने व्यापारियों को लाभ और हानि की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में व्यवसायों को वस्तुओं के उत्पादन करने पर उत्पाद शुल्क, ट्रेडिंग करने पर सेल्स टैक्स, सेवा प्रदान करने पर सर्विस टैक्स अलग-अलग प्रकार के अप्रत्यक्ष करों का भुगतान करना पड़ता है। इससे व्यवसायों को विभिन्न प्रकार के कर कानूनों का पालन करना मुश्किल एवं जटिल कार्य है, लेकिन जीएसटी के लागू होने से केवल एक ही प्रकार का अप्रत्यक्ष क़ानून का पालन करना होगा, जिससे व्यवसाय में सरलता आएगी। वर्तमान में व्यवसायी, उत्पाद शुल्क व सेवा कर के भुगतान में बिक्री कर की इनपुट क्रेडिट (ख़रीदे गए माल पर चुकाए गए कर) का उपयोग नहीं कर सकता और बिक्री कर के भुगतान में सेवा कर(सेवाओं पर चुकाए गए कर) और उत्पाद शुल्क (ख़रीदे गए माल पर लगे उत्पाद शुल्क) की क्रेडिट का उपयोग नहीं कर सकता। इस कारण वस्तुओं और सेवाओं की लागत बढ़ जाती है, लेकिन जीएसटी के लागू होने से व्यवसायियों को सभी प्रकार की खरीदी गई वस्तुओं और सेवाओं पर चुकाए गए जीएसटी की पूरी क्रेडिट मिल जाएगी। जिसका उपयोग बेचे गए वस्तुओं और सेवाओं पर लगे जीएसटी के भुगतान में कर सकेगा। इससे लागत में कमी आएगी। वर्तमान में विभिन्न प्रकार के अप्रत्यक्ष करों में छूट की सीमा अलग अलग है। मुख्य रूप से सेल्स टैक्स में थ्रेसहोल्ड लिमिट पांच लाख, सर्विस टैक्स में 10 लाख और उत्पाद शुल्क में 1.5 करोड़ है। जीएसटी आने से सभी प्रकार के व्यवसायों (ट्रेडिंग, उत्पादक या सेवा प्रदाता ) के लिए एक ही प्रकार की छूट की सीमा रखने का प्रस्ताव है। इस अवसर पर काशी नाथ, नंदलाल पांडेय, फुलचंद, अजय उपाध्याय, प्रदीप सिंह, आनंद गुप्ता, राजकुमार गुप्ता, संतोष केशरी, अमरेश केशरी, मटुक मधुर आदि मौजूद रहे।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में व्यवसायों को वस्तुओं के उत्पादन करने पर उत्पाद शुल्क, ट्रेडिंग करने पर सेल्स टैक्स, सेवा प्रदान करने पर सर्विस टैक्स अलग-अलग प्रकार के अप्रत्यक्ष करों का भुगतान करना पड़ता है। इससे व्यवसायों को विभिन्न प्रकार के कर कानूनों का पालन करना मुश्किल एवं जटिल कार्य है, लेकिन जीएसटी के लागू होने से केवल एक ही प्रकार का अप्रत्यक्ष क़ानून का पालन करना होगा, जिससे व्यवसाय में सरलता आएगी। वर्तमान में व्यवसायी, उत्पाद शुल्क व सेवा कर के भुगतान में बिक्री कर की इनपुट क्रेडिट (ख़रीदे गए माल पर चुकाए गए कर) का उपयोग नहीं कर सकता और बिक्री कर के भुगतान में सेवा कर(सेवाओं पर चुकाए गए कर) और उत्पाद शुल्क (ख़रीदे गए माल पर लगे उत्पाद शुल्क) की क्रेडिट का उपयोग नहीं कर सकता। इस कारण वस्तुओं और सेवाओं की लागत बढ़ जाती है, लेकिन जीएसटी के लागू होने से व्यवसायियों को सभी प्रकार की खरीदी गई वस्तुओं और सेवाओं पर चुकाए गए जीएसटी की पूरी क्रेडिट मिल जाएगी। जिसका उपयोग बेचे गए वस्तुओं और सेवाओं पर लगे जीएसटी के भुगतान में कर सकेगा। इससे लागत में कमी आएगी। वर्तमान में विभिन्न प्रकार के अप्रत्यक्ष करों में छूट की सीमा अलग अलग है। मुख्य रूप से सेल्स टैक्स में थ्रेसहोल्ड लिमिट पांच लाख, सर्विस टैक्स में 10 लाख और उत्पाद शुल्क में 1.5 करोड़ है। जीएसटी आने से सभी प्रकार के व्यवसायों (ट्रेडिंग, उत्पादक या सेवा प्रदाता ) के लिए एक ही प्रकार की छूट की सीमा रखने का प्रस्ताव है। इस अवसर पर काशी नाथ, नंदलाल पांडेय, फुलचंद, अजय उपाध्याय, प्रदीप सिंह, आनंद गुप्ता, राजकुमार गुप्ता, संतोष केशरी, अमरेश केशरी, मटुक मधुर आदि मौजूद रहे।
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